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मिडिल ईस्ट तनाव से 16% गिरी घरों की बिक्री, फिर भी दुबई में महंगी हो रही है जमीन

उद्योग जगत के विशेषज्ञों का मानना है कि कई वर्षों के तेज उछाल के बाद अब दुबई का रेजिडेंशियल मार्केट अधिक संतुलित विकास के दौर में प्रवेश कर रहा है. हालांकि बिक्री की गतिविधियां थोड़ी धीमी हुई हैं, लेकिन बढ़ती कीमतें दर्शाती हैं कि कई हाई-डिमांड सेगमेंट्स में मांग अभी भी आपूर्ति की तुलना में अधिक है. 

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दुबई में दुनिया भर के रईस खरीदते हैं प्रॉपर्टी (Photo-Pexles)
दुबई में दुनिया भर के रईस खरीदते हैं प्रॉपर्टी (Photo-Pexles)

साल 2026 की पहली छमाही के दौरान दुबई के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त की रफ्तार में मंदी देखी गई है, जिससे घरों की बिक्री में सालाना आधार पर 16 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, इसके बावजूद प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा, जो पश्चिमी एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद इस बाजार की मजबूती को दर्शाता है.

रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्म 'एनारॉक'  के अनुसार, जनवरी से जून 2026 के बीच दुबई में रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का कुल ट्रांजैक्शन 225.7 बिलियन दिरहम (AED) रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 267.8 बिलियन दिरहम दर्ज किया गया था. भले ही लेन-देन के कुल मूल्य में कमी आई है, लेकिन दुबई की मजबूत आर्थिक बुनियाद और एक वैश्विक निवेश गंतव्य के रूप में इसकी प्रतिष्ठा के कारण यह बाजार निवेशकों को लगातार आकर्षित कर रहा है.

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बिक्री धीमी होने के बावजूद कीमतें बढ़ीं

प्रॉपर्टी के लेन-देन में आई कमी के बावजूद, साल की पहली छमाही के दौरान रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में लगभग 6 प्रतिशत का इजाफा हुआ. एनारॉक ने कीमतों में इस उछाल का श्रेय प्रीमियम संपत्तियों की लगातार बनी हुई मांग, प्रमुख स्थानों पर सीमित सप्लाई और विदेशी निवेशकों की लगातार रुचि को दिया है.

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कंसल्टेंसी फर्म ने नोट किया कि मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक अनिश्चितता ने कुछ समय के लिए खरीदारों के सेंटिमेंट को प्रभावित किया, जिससे कुछ निवेशकों ने 'रुको और देखो' की नीति अपनाई. हालांकि, बिक्री गतिविधियों में आई इस सुस्ती का असर कीमतों पर नहीं पड़ा है, जो बाजार की बुनियादी ताकत को बयां करता है.

भू-राजनीतिक तनाव का असर

एनारॉक के मुताबिक, वेस्ट एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, विशेष रूप से क्षेत्रीय संघर्षों को लेकर चिंताओं के कारण साल की पहली छमाही के दौरान घर खरीदारों और निवेशकों ने अधिक सावधानी बरती. इस अनिश्चितता ने प्रॉपर्टी के लेन-देन की रफ्तार को प्रभावित किया.

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इन चुनौतियों के बावजूद, कंसल्टेंसी का कहना है कि दुबई के प्रॉपर्टी बाजार ने ऐतिहासिक रूप से अपनी विविध अर्थव्यवस्था, निवेशक-अनुकूल नियमों और विदेशी खरीदारों की मजबूत मांग के दम पर वैश्विक और क्षेत्रीय व्यवधानों से तेजी से उबरने की क्षमता दिखाई है.

एनारॉक के विश्लेषण के अनुसार, अब खरीदार पहले से कहीं अधिक सिलेक्टिव हो रहे हैं. मांग अब बेहतरीन सुविधाओं, प्राइम लोकेशन और लॉन्ग-टर्म वैल्यू देने वाले हाई-क्वालिटी प्रोजेक्ट्स की तरफ बढ़ रही है. यह बदलाव एक अधिक परिपक्व बाजार को दर्शाता है, जहां निवेशक सट्टा मुनाफे के बजाय टिकाऊ और सुरक्षित रिटर्न को प्राथमिकता दे रहे हैं.

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रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि अगर भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं बनी रहती हैं, तो आने वाले समय में भी ट्रांजैक्शन वॉल्यूम सीमित रह सकता है. हालांकि, लगातार चल रहे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, अनुकूल सरकारी नीतियों और मजबूत अंतरराष्ट्रीय मांग के कारण दुबई का रियल एस्टेट सेक्टर बुनियादी रूप से मजबूत बना रहेगा.

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