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DDA का मेगा प्लान, प्रदूषण और ट्रैफिक से मुक्त होगी दिल्ली, बदलेगी शहर की सूरत!

24 वर्ग किलोमीटर में फैले पुराने शहर का पुनर्विकास, 31 वर्ग किलोमीटर के बंगला ज़ोन का सुधार, और प्रमुख परिवहन मार्गों के साथ 20 वर्ग किलोमीटर के 'हाई डेंसिटी कॉरिडोर' का निर्माण इस महा-योजना का हिस्सा हैं.

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जाम और प्रदूषण से मुक्त होगी दिल्ली (Photo-PTI)
जाम और प्रदूषण से मुक्त होगी दिल्ली (Photo-PTI)

दिल्ली विकास प्राधिकरण दिल्ली को एक टिकाऊ और ग्रीन शहर में बदलने के लिए एक 8-सूत्रीय विकास कार्यक्रम पर काम कर रहा है. अधिकारियों ने बताया कि इसमें किफायती आवास, मोबिलिटी, पर्यावरण और विरासत संरक्षण पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जा रहा है. इस रोडमैप पर उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू की अध्यक्षता में डीडीए की सलाहकार परिषद की हालिया बैठक में चर्चा की गई, जिसमें शहर के बुनियादी ढांचे को सुधारने की कवायद शुरू की गई है.

सलाहकार परिषद की बैठक में दिल्ली के आवासीय संकट से जुड़े गंभीर मुद्दों की समीक्षा की गई, इसमें किफायती आवास की मांग और आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर, झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों के लगातार होते फैलाव, और उनके पुनर्वास और स्थानांतरण पर गहराई से चर्चा हुई, इसके साथ ही, राजधानी में अवैध कॉलोनियों के लंबे समय से लंबित नियमितीकरण और उनके व्यवस्थित पुनर्विकास की स्थिति का भी जायजा लिया गया.

दिल्ली के विकास के चार मुख्य स्तंभ

एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, परिषद ने एक टिकाऊ, हरित और रहने योग्य दिल्ली के निर्माण के उद्देश्य से एक चार-स्तंभों वाला रोडमैप अपनाया है. इस योजना को लेकर उपराज्यपाल ने विशेष रूप से जोर दिया कि दिल्ली की भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवास, गतिशीलता, पर्यावरण और ऐतिहासिक विरासत इन चारों क्षेत्रों में केवल नियोजित और सुनियोजित विकास को ही बढ़ावा दिया जाना चाहिए.

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बैठक के दौरान उन प्रमुख शहरी चुनौतियों को भी रेखांकित किया गया जो दिल्लीवासियों के जीवन को प्रभावित कर रही हैं. इनमें रोजाना का ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण, मानसून में शहरी बाढ़, कंक्रीट के कारण बनने वाले हीट आइलैंड और कम घनत्व वाले क्षेत्रों में नए विकास शामिल हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी कि ऐतिहासिक इमारतों का जर्जर होना और पानी की गंभीर कमी ऐसे मुद्दे हैं जिन पर तुरंत ध्यान न दिया गया तो शहर का व्यवस्थित विकास रुक जाएगा.

पर्यावरण स्थिरता के लिए नए उपाय

आगे की राह की रूपरेखा तैयार करते हुए उपराज्यपाल ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण को बचाना इस पूरे विज़न का सबसे पहला और मजबूत स्तंभ है, इसके तहत दिल्ली में देश का सबसे अधिक प्रति-व्यक्ति हरित क्षेत्र हासिल करने का लक्ष्य रखा गया है. इसके साथ ही, यमुना के किनारों पर जीवंत रिवरफ्रंट विकसित किए जाएंगे.

योजना का दूसरा मुख्य उद्देश्य दिल्ली के नागरिकों को एक सुरक्षित और उच्च गुणवत्ता वाला जीवन प्रदान करना है, इसके लिए शहर की आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक मजबूत किया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके. साथ ही, भविष्य के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करने और दिल्ली की सड़कों को पैदल चलने वालों से लेकर वाहन चालकों तक, सभी उपयोगकर्ताओं के लिए सुरक्षित बनाने पर विशेष जोर दिया जाएगा.

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दिल्ली की आर्थिक और सांस्कृतिक साख को मजबूत करने के लिए भी इस रोडमैप में विशेष प्रावधान किए गए हैं. योजना के तहत पुराने और नए व्यावसायिक बाजारों व व्यापारिक केंद्रों का पुनर्विकास करके व्यापार को एक नया जीवन दिया जाएगा. इसके अतिरिक्त, माल की सुचारू आवाजाही के लिए आधुनिक लॉजिस्टिक्स हब बनाए जाएंगे, और दिल्ली की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत का उपयोग एक सांस्कृतिक संपत्ति के साथ-साथ आर्थिक विकास के इंजन के रूप में किया जाएगा.

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इस विशाल विज़न को जमीन पर उतारने के लिए परिषद को पूरी दिल्ली में फैली विभिन्न भौगोलिक परियोजनाओं से अवगत कराया गया. इसके तहत, प्रमुख सार्वजनिक परिवहन मार्गों के किनारे विकास को बढ़ावा देने के लिए 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में 'ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट' (TOD) की योजना बनाई गई है. वहीं, शहर के व्यवस्थित और नए विस्तार के लिए 'लैंड पूलिंग एरिया' के तहत 200 वर्ग किलोमीटर से अधिक का क्षेत्र चिन्हित किया गया है.

वर्तमान में दिल्ली के विकसित आवासीय क्षेत्र लगभग 700 वर्ग किलोमीटर में फैले हैं, जबकि 150 वर्ग किलोमीटर को कम घनत्व वाले क्षेत्र के रूप में आरक्षित रखा गया है. डीडीए की इस नई योजना के तहत ज़ोन-ओ (Zone-O) में 100 वर्ग किलोमीटर में फैला एक विशाल रिवरफ्रंट विकास प्रोजेक्ट पहले से ही चल रहा है. 

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