श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय राजनीति, शिक्षा और राष्ट्रवाद के क्षेत्र में एक काफी प्रभावशाली व्यक्तित्व थे. उन्होंने 'एक देश में दो प्रधान, दो विधान, दो निशान नहीं चलेंगे' का नारा दिया था. (Photo: Shyamaprasad.org)
श्यामा प्रसाद मुखर्जी स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग मंत्री, एक शिक्षाविद, और भारतीय जनसंघ के संस्थापक थे. मुखर्जी का जीवन देशभक्ति, सिद्धांतों और बलिदान का प्रतीक मान जाता है.(Photo: Shyamaprasad.org)
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की राजनीति में रुचि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित थी. मुखर्जी पहले हिंदू महासभा में शामिल हुए, फिर पंडित नेहरू की मंत्रिपरिषद में भारत के पहले उद्योग मंत्री बने. (Photo: Shyamaprasad.org)
श्यामा प्रसाद ने कोलकाता विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसके बाद इंग्लैंड से बैरिस्टर बने. महज 33 साल की उम्र में वे कोलकाता विश्वविद्यालय के कुलपति बने और उस समय के सबसे युवा कुलपति होने का गौरव हासिल किया. (Photo: Shyamaprasad.org)
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की राजनीति में रुचि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन से प्रेरित थी. मुखर्जी पहले हिंदू महासभा में शामिल हुए, फिर पंडित नेहरू की मंत्रिपरिषद में भारत के पहले उद्योग मंत्री बने. (Photo: Shyamaprasad.org)
मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई 1901 को बंगाल में हुआ था. उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी एक फेमस न्यायविद् और शिक्षाविद् थे. (Photo: Shyamaprasad.org)
मुखर्जी का जीवन राष्ट्रवाद, आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति समर्पित रहा. उन्होंने देश में उद्योगों की नींव रखी, शिक्षा के क्षेत्र में सुधार किए और भारत को आत्मनिर्भर बनाने का सपना भी देखा था. (Photo: Shyamaprasad.org)
बता दें, संस्कृति मंत्रालय, पश्चिम बंगाल सरकार के साथ मिलकर, सोमवार को कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर एक विशेष कार्यक्रम आयोजित कर रहा है. (Photo: Shyamaprasad.org)
मिलन मेला प्रांगण में हो रहे इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मुख्य अतिथि होंगे. जानकारी के मुताबिक, अमित शाह इको पार्क में 'भूमि पूजन' करेंगे और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125 फुट ऊंची प्रतिमा की आधारशिला रखेंगे. (Photo: Shyamaprasad.org)