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बिजनेस

Backroom Strategists: ये 8 चेहरे पर्दे के पीछे से कर रहे थे असली खेल, दिला दी अपनी पार्टी को बंपर जीत!

साइलेंट गेम-चेंजर
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कुछ चेहरे 'साइलेंट गेम-चेंजर' होते हैं, जो चुपचाप पर्दे के पीछे काम करते हैं. सोमवार को आए 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में भी कुछ ऐसे चेहरे हैं, जो पर्दे के पीछे रहकर जीत की रणनीति बना रहे थे, और उनकी मेहनत रंग लाई. खासकर असम और पश्चिम बंगाल में जीत के पीछे बीजेपी के कुछ ऐसे चेहरे हैं, जो 'छुपे रुस्तम' के तौर पर उभरे हैं. भले ही ताबड़तोड़ रैलियां पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह कर रहे थे. लेकिन तमाम ऐसे नाम हैं, जो एक-एक बूथ को मैनेज करने में लगे थे, और पार्टी की झोली में जीत डाल दी. 
 
 

भूपेंद्र यादव
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भूपेंद्र यादव
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने एक व्यापक और बहुस्तरीय रणनीति अपनाई थी, जिसमें केंद्रीय नेतृत्व से लेकर राज्य के स्थानीय दिग्गजों तक की अहम भूमिका रही. बंगाल में भाजपा के 'चुनाव प्रभारी' के रूप में भूपेंद्र यादव ने संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने और बूथ प्रबंधन पर विशेष ध्यान केंद्रित किया. जिससे बीजेपी को प्रचंड जीत मिली. (Photo: ITG)

 सुनील बंसल
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सुनील बंसल
एक-एक वोटर तक बीजेपी की हो पहुंच, यही रणनीति सुनील बंसल की रही है. पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में सुनील बंसल की माइक्रो लेवल पर वोटर टारगेटिंग और डेटा-आधारित रणनीति को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही. इससे पहले भी कई राज्यों में अपनी रणनीति का लोहा मनवा चुके हैं. वे डेटा, कैडर और ग्राउंड नेटवर्क को जोड़कर चुनावी रणनीति बनाते हैं. सुनील बंसल ऐसे रणनीतिकार हैं जो स्पॉटलाइट से दूर रहकर चुनाव जिताने वाली मशीनरी खड़ी करते हैं.

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धर्मेंद्र प्रधान 
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धर्मेंद्र प्रधान 
धमेंद्र प्रधान को एक 'ट्रबलशूटर' के रूप में देखा गया है, जिन्होंने विशेष रूप से राज्य के उन हिस्सों पर ध्यान केंद्रित किया, जो कि ओडिशा की सीमा के करीब हैं. साल 2017 में यूपी चुनाव में उन्हें प्रभारी टीम का अहम हिस्सा बनाया गया था. तब से लगातार वे पार्टी को उम्मीद से बढ़कर सफलता दिला रहे हैं. बूथ मैनेजमेंट और संगठन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका रही है. प्रधान गुटबाजी सुलझाने और संगठन खड़ा करने में माहिर हैं. (Photo: ITG)
 

शुभेंदु अधिकारी
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शुभेंदु अधिकारी
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ शुरू से शुभेंदु अधिकारी मजबूती के साथ डटे रहे. वैसे भी ये पश्चिम बंगाल में बीजेपी के लिए सबसे बड़े स्थानीय चेहरे हैं. तृणमूल कांग्रेस के काम करने के तरीके को बखूबी जानते हैं. ग्रामीण पश्चिम बंगाल को अच्छी तरह से समझते हैं. इस चुनाव में उन्होंने मतदाताओं को लामबंद करने में बड़ी भूमिका निभाई. उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर पिछले दो विधानसभा चुनावों में बीजेपी को फर्श से अर्श पर पहुंचाने का काम किया है. 

बिप्लब देब  (प्रदेश सह-प्रभारी)
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बिप्लब देब  (प्रदेश सह-प्रभारी)
त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री होने के नाते, उन्हें बंगाली भाषा और वहां की सांस्कृतिक बारीकियों का लाभ मिला. उन्होंने जातिगत समीकरणों को साधने और पार्टी की ब्रांड इमेज को निखारने में बड़ी भूमिका निभाई. इसलिए इन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ी भूमिका दी गई, और पार्टी की बंपर जीत में इनकी भी भूमिका रही. 

जय पांडा
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जय पांडा
असम विधानसभा चुनाव- 2026 के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के मुख्य चुनाव प्रभारी जय पांडा थे. इसके साथ ही पार्टी ने चुनाव प्रबंधन में उनकी सहायता के लिए दो सह-प्रभारी सुनील शर्मा और दर्शना जरदोश (पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री) भी नियुक्त किए थे. इन तीनों वरिष्ठ नेताओं की टीम ने असम में पार्टी की चुनावी रणनीति और जमीनी स्तर पर चुनावी तैयारियों का नेतृत्व किया. जय पांडा ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ मिलकर कांग्रेस के उन बड़े नेताओं को पार्टी में शामिल कराया, फिर उन्हें कांग्रेस की जनाधार वाली सीटों पर उतार दिया. (Photo: ITG)

K. C. Venugopal
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K. C. Venugopal
केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को शानदार जीत मिली है, पार्टी की ओर से केंद्रीय चुनाव प्रभारी की भूमिका के सी वेणुगोपाल थे. केरल और दिल्ली (हाईकमान) के बीच मुख्य समन्वयक तौर पर इनकी भूमिका थी. उम्मीदवार चयन और टिकट वितरण में अहम रोल था. वेणुगोपाल पहले भी केरल की राजनीति से जुड़े रहे हैं और संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. इसी वजह से उन्हें हाईकमान का भरोसेमंद चेहरा माना जाता है. जहां उन्होंने कांग्रेस को शानदार जीत दिलाई. (Photo: ITG)

किंगमेकर विजय की सेना
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किंगमेकर विजय की सेना
अभिनेता से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय की नई पार्टी TVK ने तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर कर दिया है. तमिलनाडु की राजनीति पिछले 5 दशकों से DMK और AIADMK के इर्द-गिर्द घूमती रही थी. लेकिन इस चुनाव में TVK ने शानदार प्रदर्शन किया है.  TVK के महासचिव एन. आनंद (N. Anand) विजय के राजनीतिक अभियानों और संगठन को संभालने वाले सबसे करीबी और भरोसेमंद नेताओं में से एक माने जाते हैं. इन्होंने पर्दे के पीछे रहकर बड़ी जीत दिलाई. (Photo: Facebook.com)

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