अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध (US-Iran War) से बढ़ी ग्लोबल टेंशन कम होने का नाम नहीं ले रही है. मिडिल ईस्ट में जंग से जुड़े नए-नए अपडेट इसे चरम पर पहुंचाने का काम कर रहे हैं. अब खबरें चर्चा में हैं कि अमेरिका ईरान की इकोनॉमी की रीढ़ माने जाने वाले खार्ग द्वीप को अगला निशाना बना सकता है और वहां पर ग्राउंड ऑपरेशन के लिए बड़ी तैयारी की है.
इससे पहले भी यूएस ने खार्ग पर हमला किया था, लेकिन यहां पर मौजूद एनर्जी साइट्स को नुकसान नहीं पहुंचाया था, अगले हमले में अगर ऐसा होता है, तो फिर Iran Economy चरमरा जाएगी, क्योंकि वैश्विक बाजारों में ईरानी कच्चे तेल के लगभग 90% शिपमेंट को यहीं से संभाला जाता है. आइए जानते हैं क्या है अमेरिका का प्लान और क्यों खास है Iran Kharg Island?
अमेरिका ने कर ली ये तैयारी
वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट की मानें, तो पेंटागन स्पेशन ऑपरेशन फोर्स के साथ-साथ ग्राउंड एक्शन के विकल्पों पर विचार कर रहा है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है. लेकिन खबरें चर्चा में हैं कि अमेरिका ईरान में कई हफ्तों तक चलने वाले एक संभावित Ground Operation की बड़ी तैयारी कर रहा है, जिसमें संभावित सबसे बड़ा निशाना ईरान का खार्ग द्वीप हो सकता है.
व्हाइट हाउस (White House) की प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट का इस संबंध में कहना है कि कमांडर इन चीफ को अधिकतम विकल्प उपलब्ध कराने के लिए तैयारी करना पेंटागन का काम है. रिपोर्ट के मुताबिक, क्षेत्र में सैन्य तैनाती तेज हो गई है, यूएस सेंट्रल कमान ने शनिवार को कहा कि करीब 3,500 नौसैनिक और मरीन सैनिक, विमानों और अनय संसाधनों के साथ USS त्रिपोली पर पहुंचे हैं. सीएनएन की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इन हजारों अमेरिकी सैनिकों में से कुछ को खार्ग द्वीप से संबंधित अभियानों में लगाया जा सकता है.
गौरतलब है कि अमेरिकी सेना ने पहले भी Kharg Island पर हमला किया था, लेकिन उनस अटैक में सिर्फ वहां पर मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था, जबकि ऑयल साइट्स को नुकसान नहीं पहुंचाया गया था. Donald Trump ने उस हमले के बाद कहा था कि, 'अमेरिका ने जानबूझकर उन सुविधाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया.' हालांकि, इसके बाद ट्रंप ने ईरान को बड़ी वॉर्निंग देते हुए संकेत दिया था कि अमेरिकी सेना ईरान के खार्ग द्वीप पर स्थित तेल पाइपलाइनों पर हमला कर सकती है और हम 5 मिनट को नोटिस पर ऐसा कर सकते हैं.
'क्राउन ज्वेल' है ईरान का खर्ग?
जैसा कि रिपोर्ट में अनुमान लगाया जा रहा है कि मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच अब अमेरिका का अगला बड़ा निशाना खार्ग द्वीप हो सकता है, तो ये जान लेना जरूरी है कि आखिर क्यों ये खास है. तो इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खार्ग आइलैंड को ईरानी शासन का क्राउन ज्वेल यानी सबसे कीमती संपत्ति बताते हैं.
अगर ईरान खार्ग से अपने ऑयल इंफ्रास्ट्रक्चर पर कंट्रोल खो देता है, तो उसकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से नष्ट हो सकती है, क्योंकि ये इसी द्वीप पर केंद्रित है और इस युद्ध का भविष्य तय करने वाली भी है.
₹700000 करोड़ की रेवेन्यू मशीन
फारस की खाड़ी में स्थित खार्ग द्वीप एक छोटा सा द्वीप है. इसका साइज में सिर्फ 20 वर्ग किलोमीटर का है, जिसकी करीब 3 मील और लंबाई तकरीबन 7 मील है. ईरान के बुशेहर प्रांत के कोस्ट से इस द्वीप की दूरी महज 25 किलोमीटर है. इसके बावजूद भी ये ईरान की तेल आधारित इकोनॉमी की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि ये ईरान के 90 से 95% कच्चे तेल के निर्यात को संभालता है. इसके अलावा ये आइलैंड ईरान की सैन्य ताकत, वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी खास है.
यहां समुद्र की गहराई ज्यादा होने की वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल टैंकर यहां आसानी से आ सकते हैं और सीधे तेल लोड कर सकते हैं, जिससे ये रणनीतिक रूप से अहम हो जाता है. ये ईरान का सबसे बड़ा तेल टर्मिनल (Iran Oil Terminal) माना जाता है. यहां स्थित टैंक फार्म की क्षमता करीब 2.4 करोड़ बैरल कच्चा तेल जमा करने की है. यहां से पाइपलाइन्स से तेल आइलैंड पर आता है और बड़े टैंकरों के जरिए अलग-अलग देशों में पहुंचता है.
अमेरिका के वाशिंगटन स्थित फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के सीनियर एडवाइजर मियाद मालेकी ने बीते दिनों टाइम मैगजीन को दिए एक इंटरव्यू में बताया था कि खार्ग ईरान के लिए सालाना करीब 78 अरब डॉलर (करीब 7 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा) एनर्जी रेवेन्यू पैदा करता है. मतलब ईरान की तेल निर्यात से होने वाली इनकम का सबसे बड़ा हिस्सा यहीं से आता है.