अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जंग (US-Israel Vs Iran War) की आग का असर दुनियाभर में देखने को मिल रहा है. खासतौर पर शेयर बाजारों पर इसका बुरा असर पड़ा है और भारतीय शेयर मार्केट भी एक-दो दिन को छोड़ लगातार क्रैश हो रहा है. गुरुवार को भी कारोबार की शुरुआत के साथ ही बीएसई सेंसेक्स 978 अंक, जबकि एनएसई निफ्टी 275 अंक फिसल गया. इस युद्ध की शुरुआत से अब तक Stock Market Investors की करीब 23 लाख करोड़ रुपये की रकम स्वाहा हो चुकी है.
युद्ध के 13 दिन, 23 लाख करोड़ साफ
भारतीय शेयर में पैसे लगाने वालों को अमेरिका-इजरायल और ईरान में चल रहे युद्ध का तगड़ा घाटा हो रहा है. अब तक इस जंग के चलते भारतीय शेयर बाजार निवेशकों को 23,00,000 करोड़ रुपये या लगभग 250 अरब डॉलर (92 रुपये प्रति डॉलर की दर से) का नुकसान (Stock Market Investors Loss) उठाना पड़ा है, जबकि युद्ध को अभी 13 दिन ही हुए हैं. लेकिन इस दौरान एक-दो दिन को छोड़कर बाकी के ज्यादातर दिन बाजार के दोनों इंडेक्स सेंसेक्स-निफ्टी जमकर क्रैश (Sensex-Nifty Crash) हुए हैं.
21 महीनों से बाजार सुधरने का इंतजार
शेयर बाजार निवेशकों के लिए मिडिल ईस्ट युद्ध इसलिए भी बड़ी मुसीबत बनकर सामने आया है, क्योंकि वे बीते 21 महीनों से बाजार में सुधार की आस लगाए हैं और नुकसान पर नुकसान झेल रहे हैं. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ने ईरान युद्ध को जल्द समाप्त करने का वादा किया है, लेकिन कोई डेडलाइन नहीं बताई है.
US-Israel Vs Iran War 28 फरवरी को शुरू हुआ था और इसने न सिर्फ भारत, बल्कि दुनियाभर के शेयर बाजारों को प्रभावित किया है. इसकी वजह ये है कि युद्ध खाड़ी देशों और होर्मुज स्ट्रेट तक फैला है, जिससे फ्यूल सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है.
इतना रह गया BSE मार्केट कैप
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को सभी बॉम्ब स्टॉक एक्सचेंज यानी BSE पर लिस्टेड कंपनियों का 28 फरवरी से अब तक 22,65,831 करोड़ रुपये घट चुका है. दरअसल, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर अटैक से एक दिन पहले यानी 27 फरवरी को BSE MCap 463.51 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया था, जो कि अब गिरकर 440.84 लाख करोड़ रुपये रह गया है. फिलहाल Sensex-Nifty की स्थिति देखें, तो दोनों इंडेक्स जून 2023 के स्तर के समान कारोबार कर रहे हैं.
एक्सपर्ट्स बोले- युद्ध अभी लंबा चलेगा
Donald Trump भले ही ईरान के साथ युद्ध जल्द खत्म होने का दावा कर रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष लंबा चल सकता है. ICICI Securities ने बताया कि कच्चे तेल की कीमतों जैसे ही 90-100 डॉलर प्रति बैरल की लिमिट को पार करती हैं, यह भारत के तेल आयात बिल को गंभीर रूप से प्रभावित करना शुरू कर देती हैं और भू-राजनीतिक संकट बढ़ने या अन्य व्यापक कारणों से आपूर्ति में अचानक कमी का संकेत देती है.
Yes Securities के हितेश जैन का कहना है कि संघर्ष के आर्थिक परिणाम इसकी अवधि और तीव्रता पर बहुत हद तक निर्भर करेंगे. एक लंबा संघर्ष संभवतः हाई एनर्जी प्राइस को बनाए रखेगा, महंगाई का जोखिम बढ़ाएगा, उभरते बाजारों की करेंसी कमजोर करेगा. इससे शेयर बाजारों पर दबाव बड़ सकता है.
(नोट- शेयर बाजार में किसी भी तरह के निवेश से पहले अपने मार्केट एक्सपर्ट्स की सलाह जरूर लें.)