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Trump On Hormuz: 'हमें किसी की जरूरत नहीं...', होर्मुज पर दोस्तों ने दिया गच्चा, तो ट्रंप ने ऐसे निकाली भड़ास

Donald Trump ने होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के लिए सहयोगी देशों द्वारा युद्धपोत तैनात करने से इनकार या अनिच्छा जाहिर करने पर अपनी भड़ास निकाली है और कह दिया है कि अमेरिका को किसी की जरूरत नहीं है.

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होर्मुज की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान. (Photo: AP)
होर्मुज की सुरक्षा को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान. (Photo: AP)

मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध (Middle East War) से बढ़ी ग्लोबल टेंशन के बीत दुनिया में तेल संकट गहरा रहा है. खासतौर पर ईरान के कंट्रोल वाले होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से चिंता चरम पर पहुंच चुकी है. इसे फिर से खोलने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी, जापान, ऑस्ट्रेलिया, स्पेन समेत अन्य सहयोगी देशों से Hormuz पर अपने युद्धपोत भेजने का आग्रह किया था, जिसपर कई देशों ने 'No' कह दिया, कई ने चुप्पी साध ली. इससे नाराज ट्रंप ने अब अपनी भड़ास निकालते हुए दो टूक कह दिया है कि, 'हमें किसी की कोई जरूरत नहीं है.'

'हम सबसे शक्तिशाली देश...'
Hormuz Strait को फिर से खोलने में मदद करने के लिए अमेरिकी सहयोगियों से की गई राष्ट्रपति ट्रंप की अपील को चुप्पी या सीधे तौर पर अस्वीकृति मिलने के एक दिन बाद उन्होंने अपनी नारजदी जाहिर की. Donald Trump ने मंगलवार को कहा कि वाशिंगटन को रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए किसी भी सहायता की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने  कहा कि, 'हमें किसी की जरूरत नहीं है, हम दुनिया के सबसे शक्तिशाली राष्ट्र हैं. हमारे पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है.' 

सहयोगी देशों को चेतावनी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस बात की आलोचना दोहराई कि NATO गठबंधन के सदस्य होने और सामूहिक रक्षा के विचार के बावजूद अमेरिका की मदद नहीं की जा रही. बता दें कि महज दो दिन पहले उन्होंने 7 देशों से होर्मुज स्ट्रेट में युद्धपोत तैनात करने का आग्रह किया था. उन्होंने इस अपील को और तेज करते हुए सहयोगी देशों को चेतावनी दी कि निगेटिव प्रतिक्रिया नाटो के लिए  फ्यूचर में बहुत बुरा हो सकता है.

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ट्रंप के इन दोस्तों ने कहा- No
ट्रंप के आग्रह को जर्मनी, स्पेन और इटली समेत ऑस्ट्रेलिया, जापान ने अस्वीकार कर दिया और कहा कि उनके पास होर्मुज में युद्धपोत भेजने की तत्काल कोई योजना नहीं है. जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि युद्ध शुरू करने से पहले वाशिंगटन या इजराइल ने बर्लिन से बात नहीं की थी. उन्होंने कहा कि हमें संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ या नाटो से स्वीकृति नहीं मिली है. इन देशों के इनकार को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं उन्हें जबरदस्ती अपने साथ शामिल करने की कोशिश नहीं करता, क्योंकि मेरा रवैया यही है कि हमें किसी की जरूरत नहीं है.

'देखना था कौन साथ आएगा...'
गौरतलब है कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के शुरू होने के बाद से ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को घेर रखा है. इसके चलते ग्लोबल तेल सप्लाई बाधित हुई है और दुनिया के तमाम देशों में Oil Crisis गहरा रहा है. यही नहीं क्रूड ऑयल की कीमतों में भी तेज उछाल (Crude Oil Price Rise) देखने को मिला है. अपने आग्रह को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि उनका यह प्रयास आंशिक रूप से जरूरत के समय अमेरिका का समर्थन करने के लिए सहयोगियों की तत्परता का परीक्षण करना मात्रा था. यानी वे सहयोगी देशों की परीक्षा ले रहे थे.

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