अमेरिका में एक नया बिल पेश किया गया है, जिसके तहत कोई भी देश अगर रूस से तेल या यूरेनियम जैसी चीजों का आयात करता है तो उसपर 500 फीसदी तक टैरिफ लगाया जा सकता है. इस बिल को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से मंजूरी भी मिल चुकी है.
अब अगर ये बिल पास होता है तो 500% तक टैरिफ चीन, भारत, ब्राजील जैसे देशों पर लग सकता है. क्योंकि ये रूसी तेल और यूरेनियम के बड़े आयातक हैं. लेकिन सिर्फ यही देश रूस से एनर्जी नहीं खरीदते हैं, बल्कि अमेरिका का भी रूस से एनर्जी खरीदने का एग्रीमेंट है. आइए समझते हैं...
अमेरिका का रूस से एग्रीमेंट
चीन के अलावा, अमेरिका भी रूस से यूरेनियम खरीदता है. अमेरिका खासकर एनरिच्ड/लो-एनरिच्ड यूरेनियम को खरीदता है. कई सालों तक लगातार अमेरिका ने अपने नाभिकीय रियैक्टरों के लिए रूसी लो-एनरिच्ड यूरेनियम (LEU) खरीदा है और यह अमेरिका की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा रहा है. 2023 में रूस से अमेरिका को लगभग 701 टन यूरेनियम बेचा गया था, जिसकी कीमत 1.2 अरब डॉलर थी. यह खरीद पुराने न्यूक्लियर सप्लाई एग्रीमेंट और लाइसेंस व्यवस्था के तहत हुई है.
वहीं हाल के अमेरिकी कानून के तहत रूस से यूरेनियम आयात पर प्रतिबंध लागू है. इसे 13 अगस्त 2024 से लागू किया गया, जिसके बाद से ही मूलरूप से यूरेनियम की खरीद नहीं होती है, लेकिन विशेष परमिट के तहत अमेरिका रूस से यूरेनियम खरीद सकता है, जो 2028 तक लागू रहेगा. उसके बाद इसपर पूणर्त: प्रतिबंध लग जाएगा.
Prohibiting Russian Uranium Imports Act के तहत कहा गया है कि अगर अमेरिका को यूरेनियम की आपूर्ति नहीं हो पा रही है तो राष्ट्रहित के लिए वह रूस से 2028 तक यूरेनियम की सप्लाई जा जारी रख सकता है.
फिर भारत के तेल खरीद पर ढोंग क्यों?
सवाल साफ है कि अगर अमेरिका अपने हितों के लिए रूस से यूरेनियम जैसे घातक पदार्थ की सप्लाई जारी रख सकता है तो भारत और चीन जैसे देशों को रूसी तेल खरीदने से क्यों रोक रहा है? भारत और चीन जैसे देशों पर 500 फीसदी तक टैरिफ का प्रस्ताव क्यों लेकर आ रहा है? क्या वह खुद के लिए भी कुछ ऐसे प्रावधान कर सकता है? यह ट्रंप और अमेरिका का दोहरा रवैया भी दिखा रहा है.
अमेरिका की मजबूरी भी
खैर, एक और फैक्ट यह भी है माना जाता है कि अमेरिका की एक मजबूरी बनी हुई है, जिससे वह यूरेनियम रूस से खरीदना जारी रख सकता है.
दरअसल, रूस की सरकारी कंपनी Rosatom दुनिया की सबसे बड़ी यूरेनियम एनरिचमेंट सप्लायर है और 40–45% यूरेनियम क्षमता रूस के पास ही है. खास बात यह है कि अमेरिका और यूरोप के कई न्यूक्लियर रिएक्टर जिस तरह के LEU और HALEU पर चलते हैं, उस तरह की स्थिर सप्लाई फिलहाल रूस ही कर पा रहा है. यही कारण है कि अमेरिका प्रतिबंध लागू करने के बाद भी रूस से खुद को अलग नहीं कर पा रहा है.
तेल की सप्लाई हुई कम
अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध लागू करने के कारण भारत की रिफाइनरों द्वारा रूसी तेल का आयात कम हुआ है. हाल के डेटा के अनुसार, रूस से भारत के कच्चे तेल का आयात दिसंबर 2025 में करीब 1.2 मिलियन बैरल प्रति दिन (bpd) रहा, जो 2022 के उच्च स्तर (लगभग 1.8–2.0 मिलियन bpd) की तुलना में बहुत कम है.