अमेरिका-ईरान जंग के कारण होर्मुज में नाकबंदी जारी है. किसी भी देश के जहाजों को इस रास्ते से निकलने की इजाजत नहीं है. अमेरिका पूरी तरह से इस रास्ते को रोक रहा है. वहीं मिडिल ईस्ट से कोई टैंकर इस रास्ते से नहीं जा पा रहे हैं, लेकिन अब एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जो आपको हैरान कर देगी.
दरअसल, इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि तेल और गैस के जहाज गुपचुप तरीके से और अपने सर्विंसलांस को बंद करके होर्मुज को पार कर रहे हैं, जो एक खतरनाक तरीका माना जाता है. जहाजों के रडार बंद होने से किसी को उनके गुजरने या लोकेशन की जानकारी नहीं मिल सकती है.
विश्लेषकों का कहना है कि इस महत्वपूर्ण जलमार्ग से तेल की कुछ खेप गुप्त तरीके से निकल रहे हैं. ये तेल टैंकर इतने गुप्त तरीके से निकल रहे हैं कि यह तक पता लगाना मुश्किल है कि खरीदारों तक वास्तव में कितनी ऊर्जा आपूर्ति पहुंच रही है. भारत, चीन और पाकिस्तान जैसे देशों को इसी तरह से तेल की सप्लाई की जा रही है.
किस तरह का ये रास्ता अपना रहे टैंकर?
शिपिंग डेटा के विश्लेषण के अनुसार, ज्यादातर तेल टैंकर अब 'डार्क मोड' में काम करने लगे हैं यानी वे होर्मुज जलडमरूमध्य को पार करते समय या फारस की खाड़ी में माल लादने के लिए एंट्री करते समय अपने ट्रांसपोंडर (AIS - ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) को बंद कर देते हैं.
ऑयल प्राइस के मुताबिक, पहले इस तरीके का इस्तेमाल सिर्फ ईरान से जुड़े जहाज बैन से बचने के लिए किया जाता था, लेकिन अब यह आम कमर्शियल जहाजों के लिए भी किया जाने लगा है. मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म वोर्टेक्सा (Vortexa) के आंकड़ों के अनुसार इस क्षेत्र से गुजरने वाले 57% जहाजों ने अपने ट्रांसपोंडर बंद रखे और मई में यह आंकड़ा रिकॉर्ड 65.2% तक पहुंच चुका है.
तेल सिस्टम को ट्रैक करना काफी मुश्किल
ईटी की एक रिपोर्ट में वोर्टेक्सा के डायरेक्टर क्लेयर जंगमैन ने बताया कि ट्रांसपोंडर बंद करना सिर्फ बैन से बचने का एक तरीका नहीं है, बल्कि यह युद्ध के जोखिम, परिचालन संबंधी अनिश्चितता और खाड़ी के देशों से माल को सुरक्षित निकालने के लिए एक व्यापक कमर्शियल सिस्टम बन चुका है. ऐसे में अब रियल टाइम में तेल शिपमेंट को ट्रैक करना काफी मुश्किल हो चुका है.
चुपके से की जा रही कई देशों को सप्लाई
ईरान-अमेरिका जंग के बीच, जब होर्मुज पूरी तरह से बंद है, तब भी भारत, चीन जैसे देशों को तेल की सप्लाई मिडिल ईस्ट से आने का दावा किया जा रहा है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि इस संकट के समय पाकिस्तान, भारत और चीन जैसे एशियाई खरीदारों के लिए तेल की खेप गुप्त रास्तों से भेजी जा रही है. यह भी दावा किया जा रहा है कि इसके लिए ईरान की ओर से प्रस्तावित रास्तों और कॉरिडोर का इस्तेमाल किया जा रहा है, क्योंकि उन रास्तों पर ईरान का पूरा कंट्रोल है और जहाज पूरी तरह से सुरक्षित निकल सकते हैं.