इजराइल और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है. रिपोर्ट्स आ रही है कि सोमवार को इजराइल ने ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट साउथ पार्स (South Pars) पर फिर से बड़ा हमला कर दिया है.
दरअसल, इजरायल का ये हमला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए भी एक तरह से झटका है, क्योंकि ट्रंप ईरान से सुलह का दावा कर रहे हैं. यही नहीं, पिछले महीने यानी मार्च में भी इजरायल ने ईरान के इसी गैस प्लांट को निशाना बनाया था. जिसके बाद ट्रंप का बयान आया था कि अब ईरान के एनर्जी इंफ्रा, खासकर साउथ पार्स प्लांट पर हमला नहीं किया जाएगा.
लेकिन अब इजरायल ने एक बार फिर ईरान के सबसे बड़े गैस प्लांट को निशाना बनाया है. क्या इजरायल के इस हमले को लेकर अमेरिका को जानकारी नहीं है, या फिर ये साजिश का हिस्सा है?
ईरान की अर्थव्यवस्था पर चोट
दरअसल साउथ पार्स ईरान का सबसे बड़ा गैस इंफ्रा है, ये ईरान के लिए सोने की खान जैसा है. ईरान की 70% गैस यहीं से आती है. इस प्लांट पर हमला करने का मतलब है कि ईरान के घरों की बिजली, फैक्ट्रियां और उसकी कमाई का सबसे बड़ा जरिया खतरे में है. यानी इजरायल ने सीधे तौर पर ईरान की अर्थव्यवस्था पर हमला किया है. 'साउथ पार्स' का इसका होर्मुज से बेहद नजदीक है, अब होर्मुज रूट पर भी संकट मडराने लगा है.
इस हमले का प्राथमिक उद्देश्य ईरान की ऊर्जा उत्पादन क्षमता को पंगु बनाना और उसकी आर्थिक कमर तोड़ना माना जा रहा है. शुरुआती सूचनाओं के अनुसार, रिफाइनरी और पाइपलाइन नेटवर्क को भारी नुकसान पहुंचा है.
बता दें, 'साउथ पार्स' दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस क्षेत्र है. यह फारस की खाड़ी में स्थित है. ईरान की कुल गैस आपूर्ति का 70% से ज्यादा हिस्सा इसी एक क्षेत्र से आता है. ईरान के घरों की बिजली, हीटिंग और उसकी भारी इंडस्ट्री (जैसे पेट्रोकेमिकल्स और स्टील) पूरी तरह इसी गैस पर निर्भर हैं. इस हमले के बाद ईरान में बिजली की किल्लत हो सकती है, औद्योगिक उत्पादन पर भी ब्रेक लग सकता है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस बुनियादी ढांचे की मरम्मत में महीनों या साल लग सकते हैं, जिससे ईरान की वित्तीय स्थिति और खराब हो सकती है.
दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का डर
ईरान के गैस इंफ्रा पर हमले से ग्लोबली गैस की कीमतें बढ़ सकती हैं. यही नहीं, साउथ पार्स का इलाका समुद्री व्यापार का मुख्य रास्ता भी है, इसलिए अगर यहां युद्ध छिड़ता है, तो भारत समेत पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस महंगी हो सकती है.
इजराइल ने ऐसा क्यों किया?
इस हमले के पीछे इजरायल का तर्क है कि ईरान अपनी गैस बेचकर जो पैसा कमाता है, उसी पैसे से वह इजराइल के खिलाफ लड़ने वाले समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) की मदद करता है. इजराइल का मकसद ईरान के पास मौजूद उस फंड को रोकना है, जिससे युद्ध चलता है.
ईरान भी करेगा पलटवार?
वहीं ईरान का कहना था कि अगर उसके तेल या गैस ठिकानों पर दोबारा हमला हुआ तो वह चुप नहीं बैठेगा. इस हमले के बाद अब डर यह है कि दोनों देश एक-दूसरे पर सीधे मिसाइलें दाग सकते हैं, जिससे पूरे मिडिल-ईस्ट में युद्ध भयावह रूप ले सकता है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर जैसे पड़ोसी देश भी इस तनाव की चपेट में आ सकते हैं, उनकी सीमाएं इस क्षेत्र से लगी हुई है.
इजराइल ने इस हमले को ईरान द्वारा हाल ही में किए गए ड्रोन और मिसाइल हमलों के पलटवार के तौर पर देखा जा रहा है, इजरायली रक्षा अधिकारियों का तर्क है कि ईरान के आर्थिक संसाधनों को निशाना बनाना उसे भविष्य में युद्ध जारी रखने से रोकने का एक प्रभावी तरीका है.
वहीं कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अब स्थिति नियंत्रण से बाहर हो सकती है, जहां एक ओर शांति वार्ता की कोशिशें की जा रही थीं, वहीं इस हमले ने बातचीत के रास्तों को लगभग बंद कर दिया है.