होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका और ईरान (US Vs Iran On Hormuz) में बात नहीं बन पा रही है. जहां अमेरिका में महंगाई की तगड़ी मार का अनुमान लगाया जा रहा है, तो वहीं मिडिल ईस्ट युद्ध और अमेरिकी नाकाबंदी ईरान पर भारी पड़ रही है. ईरान के संकट की ताजा तस्वीर केप्लर के आंकड़े साफ करते नजर आ रहे हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के पास अब बिना इस्तेमाल वाले कच्चे तेल का स्टोरेज (Iran Crude Oil Storage) महज 22 दिन या उससे कम का रह गया है, जबकि देश में ऑयल स्टोरेज साइट्स तेजी से खत्म होती जा रही हैं.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान का बिना इस्तेमाल वाला तेल स्टोरेज 22 दिन या उससे कम समय के लिए रह गया है और ये ईरान के लिए बड़ा संकट माना जा सकता है. रिसर्च फर्म केप्लर के आंकड़ों का हवाला देते हुए इसमें बताया गया कि ईरान में क्रूड ऑयल स्टोर करने की साइट्स तेजी से खत्म होती जा रही हैं, जिससे प्रोडक्शन में कटौती का खतरा और भी अधिक बढ़ गया है.
अब क्या करेगा ईरान?
रिपो्र्ट की मानें, तो इस्लामिक रिपब्लिक के पास अब सिर्फ इतना तेल रिजर्व बचा है, जो अगले 12 से 22 दिनों तक चलने के लिए ही काफी है. ऐसे में अमेरिका के साथ उसका तनाव बढ़ता है, तो फिर स्थिति खराब होती जाएगी. बिना इस्तेमाल वाली क्रूड स्टोरेज क्षमता में इस गिरावट से उम्मीद जताई जा रही है कि Iran मई के बीच तक रोजाना के क्रूड ऑयल प्रोडक्शन 1.5 मिलियन बैरल और कटौती करने के लिए मजबूर हो सकता है.
गोल्डमैन सैश (Goldman Sachs) के मुताबिक, ईरान के लिए ये इसलिए भी चिंता की बात है, क्योंकि पहले ही पहले ही 2.5 मिलियन बैरल प्रति दिन की कटौती हो चुकी है.
यही नहीं ईरानी के कच्चे तेल का एक्सपोर्ट भी लगातार गिरता जा रहा है और अब ये घटते हुए 567,000 BPD रह गया है, जो कि मार्च महीने में 1.85 मिलियन BPD था. इसके अलावा लोडिंग में करीब 70 फीसदी की बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. कुल मिलाकर अमेरिका से युद्ध ईरान को भारी पड़ रहा है. Iran Crisis अप्रैल की शुरुआत से और भी बढ़ा है और ईरानी क्रूड एक्सपोर्ट तेजी से फिसला है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरानी पोर्ट्स की नेवल नाकाबंदी का ऑर्डर दिया था और ये अभी भी जारी है.
ट्रंप की नाकाबंदी से बढ़ी मुसीबत
US-Iran War सिर्फ ईरान पर ही नहीं, बल्कि खुद अमेरिका पर भी भारी पड़ रहा है. US Petrol-Diesel Price Hike ने डोनाल्ड ट्रंप की टेंशन बढ़ाने का काम किया है. लेकिन ट्रंप ईरान से मिले किसी प्रोपोजल को मानने के लिए तैयार नहीं दिख रहे हैं. जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति के ईरानी बंदरगाहों पर की गई नाकाबंदी (US Blockade Iran Ports) लगातार ईरान की लाइफलाइन पर अटैक कर रही है और उसकी मुसीबत को बढ़ाती जा रही है, जिसका उदाहरण ईरान का कम होता तेल रिजर्व है.
अमेरिकी नाकाबंदी बेहद असरदार साबित हो रही है और होर्मुज से कोई भी तेल-गैस का टैंकर पार करने में कामयाब होता नजर नहीं आ रहा है. Hormuz से शिपिंग में तेजी से कमी आई है और इसका असर ईरान के साथ ही खाड़ी क्षेत्र के अन्य तेल उत्पादकों पर भी पड़ रहा है. सऊदी अरब, इराक, कुवैत, UAE भी मिडिल ईस्ट टेंशन के चलते अपने क्रूड ऑयल प्रोडक्शन में कटौती कर रहे हैं.