scorecardresearch
 

US से अटकी डील? भारत समेत 16 देशों के खिलाफ अमेरिका में जांच, लगे ये आरोप!

रिपोर्ट का दावा है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्‍यापार समझौते पर बातचीत रुक गई है, जो कि अमेरिका में शुरू हुए नए जांच के कारण है. हालांकि भारत सरकार ने इस खबर का खंडन किया है.

Advertisement
X
भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील. (Photo: File/ITG)
भारत अमेरिका के बीच ट्रेड डील. (Photo: File/ITG)

भारत और अमेरिका ट्रेड डील पर एक बड़ी रिपोर्ट सामने आई है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील फिलहाल धीमी पड़ गई है. इसकी वजह अमेरिकी प्रशासन की ओर से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी नई जांच मानी जा रही है, जो कि ट्रंप सरकार ने शुरू की है.

यह जांच, अमेरिका मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में 'अत्यधिक उत्पादन और अनुचित व्यापार प्रथा' को लेकर भारत समेत 16 देशों पर है. रिपोर्ट का कहना है कि इसी जांच के कारण भारत ट्रेड डील पर फिर से विचार कर रहा है. हालांकि भारत के वाणिज्य मंत्रालय का कहना है कि यह सिर्फ अफवाह है. दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार समझौते के लिए बातचीत कर रहे हैं.

अमेर‍िका क्‍या जांच कर रहा है?
अमेरिका का आरोप है कि कुछ देशों में औद्योगिक उत्पादन जरूरत से ज्यादा है, जिससे वे कम कीमत पर सामान निर्यात कर अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं. जांच के तहत स्टील, केमिकल्स, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और सोलर जैसे कई सेक्टरों को देखा जाएगा. यह जांच Section 301 कानून के तहत की जा रही है. 

इस कानून के जरिए अमेरिका उन देशों के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है, जिन्हें वह अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोपी मानता है. अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो अमेरिका इन देशों पर नए टैरिफ या व्यापार प्रतिबंध भी लगा सकता है. इन 16 देशों में भारत भी शामिल है.

Advertisement

जांच ने बातचीत को बनाया कठिन
फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद बातचीत की गति काफी धीमी हो गई, जिसमें कुछ टैरिफ रद्द कर दिए गए थे, जिससे अमेरिका को अपने टैरिफ योजना पर फिर से विचार करना पड़ा.

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, बाद में हुई अमेरिकी जांच ने बातचीत के माहौल को और जटिल बना दिया है. खासकर तब जब अमेरिकी प्रशासन को अतिरिक्त वैश्विक दबावों का सामना करना पड़ रहा है.

रिपोर्ट में एक सरकारी सूत्र के हवाले से कहा गया है कि हम किसी भी समझौते पर हस्ताक्षर करने की जल्दी में नहीं हैं और नवीनतम अमेरिकी कार्रवाई को 'कोर्ट के आदेश के बाद देशों को समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर करने की एक दबाव रणनीति' बताया. उन्होंने कहा कि यह बातचीत में बाधा डालने जैसा है.

टैरिफ पर थी और राहत की उम्‍मीद थी
व्यापार वार्ता शुरू में भारत और अमेरिका के 'अंतरिम समझौते के ढांचे' बेस्‍ड रही है. इस ढांचे के तहत, भारत ने चरणबद्ध तरीके से टैरिफ हटाने और अमेरिकी निर्यात में वृद्धि की उम्मीद जताई थी. साथ ही भारतीय अधिकारियों को भविष्य में टैरिफ रेट्स के संबंध में और अधिक स्पष्टता की भी उम्मीद थी. हालांकि, हाल के घटनाक्रमों के कारण नई दिल्ली ने अधिक सतर्क रुख अपनाते हुए अमेरिका द्वारा अपनी व्यापार नीति और शुल्क संरचनाओं में किए जा रहे बदलावों पर 'विचार करें और देखें' की नीति अपनाई है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement