अमेरिका और ईरान में शांति वार्ता पर डील फाइनल (US-Iran Peace Deal Done) हो गई है और डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज के आसपास नाकाबंदी हटाने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोले जाने के बयान के बाद दुनिया में तेल-गैस का संकट कम होता नजर आ रहा है.
दूसरी ओर सरकार ने डीजल और एयर टर्बाइन फ्यूल यानी ATF पर टैक्स बढ़ाया है. सरकार ने सोमवार को बड़ा फैसला लेते हुए डीजल और एटीएफ के एक्सपोर्ट पर विंडफॉल गेन टैक्स बढ़ा दिया, जबकि 16 जून से शुरू होने वाले पखवाड़े (अगले 15 दिन) के लिए पेट्रोल पर विंडफॉल टैक्स में कोई चेंज नहीं किया गया है.
अब Diesel पर कितना टैक्स?
वित्त मंत्रालय की ओर से इस संबंध में जारी किए गए एक नोटिफिकेशन को देखें, तो इसमें कहा गया है कि टैक्स में ये इजाफा मंगलवार 16 जून से लागू होगी. Diesel Export पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) की दर 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 14 रुपये प्रति लीटर हो गई. वहीं ATF के एक्सपोर्ट पर SAED 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दी गई है.
घरेलू स्तर पर राहत की बात
पेट्रोल एक्सपोर्ट पर ये ड्यूटी 1.5 रुपये प्रति लीटर पर स्थिर है. इस बीच घरेलू खपत के लिए जारी पेट्रोल-डीजल पर भी ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी साफ है कि भारतीय उपभोक्ताओं और आम जनता के लिए राहत है कि सरकार के इस फैसले का घरेलू बाजार पर कोई असर नहीं पड़ेगा. विंडफॉल टैक्स का उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना और निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय कीमतों का अत्यधिक फायदा उठाने से रोकना है. इससे घरेलू आपूर्ति को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी.
क्यों लगता है 'विंडफॉल टैक्स'?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घटते-बढ़ते रहते हैं. अगर ग्लोबल मार्केट में के दाम घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों से ज्यादा होते हैं, तो रिफाइनरियां निर्यात बढ़ाने लगती हैं, ताकि उन्हें ज्यादा मुनाफा हो. सरकार इस पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगा देती है.
वहीं जब ग्लोबल मार्केट में इनके भाव कम हो जाते हैं, तो कंपनियां खुद ही एक्सपोर्ट कम करने लगती हैं. ऐसी स्थिति आने पर सरकार विंडफॉल टैक्स को कम करने या हटाने का फैसला लेती है. सरकार ने सबसे पहले 01 जुलाई 2022 को विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाने का फैसला लिया था. जब रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध के चलते तेल की कीमतों में आग लगी हुई थी.
मिडिल ईस्ट युद्ध के बाद तीसरी बार
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान जंग के चलते बढ़ने तनाव के बीच सरकार ने इस साल 26 मार्च को डीजल और ATF पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाई थी, जबकि बीते 16 मई को सरकार ने पेट्रोल पर भी एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई थी. दरअसल, युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गई थीं और सरकार के इस कदम का मकसद एक्सपोर्टर्स को कीमतों के अंतर का अनुचित फायदा उठाने से रोकना है.