डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक ऐलान क्या किया, शेयर बाजार झूम उठे और लगातार भाग रहीं कच्चे तेल की कीमतें क्रैश हो गईं. अमेरिका में लिए जाने वाले फैसलों का असर दुनिया में देखने को मिलता है और मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच तेल की कीमतों पर सट्टेबाजी भी चरम पर नजर आई है. तेल की कीमतों के लेकर तगड़ा दांव लगाया जा रहा है.
इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ट्रंप के ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम देने के बाद अचानक ईरानी साइट्स पर अटैक के प्लान को 5 दिन के लिए टालने के ऐलान से पहले ही तेल बाजार में सट्टेबाजों ने Crude Price को लेकर 580 मिलियन डॉलर (करीब 5,440 करोड़ रुपये से ज्यादा) का दांव लगा दिया. खास बात ये है कि ज्यादातर सौदे ट्रंप के ऐलान से ठीक 15 मिनट पहले किए गए.
ट्रंप ने बदला अटैक प्लान, सट्टेबाज एक्टिव
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सकारात्मक बातचीत का दावा किए जाने और ईरानी साइट्स पर अटैक के अपने प्लान को 5 दिन के लिए टालने के ऐलान से पहले ही तेल और शेयर दोनों में ताबड़तोड़ सट्टेबाजी की गई. इसमें बताया गया कि ट्रंप की ओर से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस संबंध में की गई पोस्ट से ठीक पहले 580 मिलियन डॉलर के तेल और इक्विटी सौदे हुए, जिससे ग्लोबल मार्केट में इनसाइडर ट्रेडिंग की चिंताएं बढ़ रही हैं.
ईरान पर हमला टालने से पहले महज 15 मिनट में ही तेल की कीमतों में गिरावट और शेयरों में तेजी की भविष्यवाणी करने वाले बड़े दांव लगाए गए. सीधे शब्दों में कहें, तो इस सेक्टर से जुड़े व्यापारियों और निवेशकों ने ट्रंप की ओर से सार्वजनिक ऐलान से पहले ही यह अनुमान लगा लिया था कि तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट आएगी और शेयर बाजार में उछाल आएगा. इसके बाद जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान अटैक को लेकर ऐलान किया और सोशल मीडिया पोस्ट शेयर की, तो अनुमानों के अनुरूप ही तेल की कीमतें भर-भराकर टूट गईं, जबकि दुनियाभर के बाजार उछल पड़े.

इधर सट्टा, उधर गिर गईं कीमतें
एफटी की रिपोर्ट में बताया गया कि न्यूयॉर्क के समय के मुताबिक, सुबह 6:49 बजे से 6:50 बजे के बीच व्यापारियों ने Brent Crude और वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड (WTI Crude) में लगभग 580 मिलियन डॉलर के दांव लगाए थे. करीब 6,200 कॉन्ट्रैक्ट्स से जुड़े ये सौदे ट्रंप के ईरानी एनर्जी साइट्स पर हमला टालने के ऐलान से लगभग 15 मिनट किए गए थे. ये सौदे असल में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट की शर्त थे और इसके तुरंत बाद कीमतों में तेजी से गिरावट भी देखने को मिली थी.
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर सौदे और वो भी सीमित समय सीमा के भीतर, बिना किसी तय मैक्रो ट्रिगर के किए जाते हैं, बेहद असामान्य हैं. हालांकि, ट्रंप के दावे के विपरीत ईरान की ओर से इसे फेक न्यूज बताया गया और अमेरिका के साथ किसी भी बातचीत से इनकार किया. ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स ने बताया कि अमेरिका के साथ कोई सीधा संपर्क नहीं हुआ था, न तो सीधे तौर पर और न ही किसी मध्यस्थ के जरिए ऐसा हुआ.
Trump का ट्वीट का बाजार में एक्शन
डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर ईरान के साथ बातचीत का दावा करते हुए एक पोस्ट किया और उसमें लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका और ईरान में बीते दो दिनों में बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई. ईरानी एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर मिलिट्री ऑपरेशन 5 दिनों के लिए स्थगित किए जा रहे हैं, जो संभावित रूप से तनाव कम होने का संकेत है.' इसके बाद अमेरिका समेत अन्य शेयर बाजारों ने पॉजिटिव प्रतिक्रिया की और कई में क्रैश का सिलसिला अचानक रुक गया.

क्या कह रहे एक्सपर्ट्स?
ट्रंप की पोस्ट और तेल-शेयर पर भारी-भरकम दांव को लेकर एक निवेशक का कहना है कि, 'आपको यह सोचना होगा कि ट्रंप के पोस्ट से 15 मिनट पहले कौन वायदा शेयरों को बेचने में इतना सक्रिय रहा होगा.' एक अन्य व्यापारी ने फाइनेंशियल टाइम्स को बताया कि यह कदम वास्तव में असामान्य लग रहा था, खासकर ऐसे समय में जबकि न तो कोई बड़ा आर्थिक डेटा था और न ही किसी तरह के कोई संकेत. कोई सबूत नहीं, फिर भी इतना बड़ा दांव लगा.
हालांकि, इनसाइडर ट्रेडिंग या किसी और गड़बड़ी के कोई सबूत नहीं मिले हैं, न ही यह स्पष्ट है कि इन सौदों को किसने अंजाम दिया, क्या यह एक या कई बाजार खिलाड़ियों के जरिए किया गया.
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर (अब X) पर एक पोस्ट में ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ ने कहा है कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हुई है और फाइनेंशियल व ऑयल मार्केट में हेरफेर करने के लिए फर्जी खबरों का इस्तेमाल किया जा रहा है.