अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का युद्ध (US-Israel Iran War) जारी है और इसके चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. सबसे ज्यादा चिंता तेल और गैस की बाधित हुई सप्लाई को लेकर है, खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद ये विकराल हो चुकी है. दुनिया के तमाम देशों में Oil-LPG Crisis नजर आने लगा है.
इस बीच ईरान ने बुधवार को एक बड़ी चेतावनी देते हुए क्रूड ऑयल प्राइस (Crude Oil Price) 200 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने की बात कही और धमकी दी की होर्मुज के रास्ते 1 लीटर तेल नहीं गुजरने देंगे. इसके बाद इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी यानी IEA के सभी 32 सदस्य देश एक साथ आ गए और 400 मिलियन बैरल तेल को लेकर एक सर्वसम्मति से बड़ा समझौता कर डाला.
400 मिलियन बैरल तेल पर सहमति
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने US-Israel Vs Iran युद्ध और इसके चलते Hormuz Strait के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण वैश्विक तेल बाजारों में संकट के बीच बड़ा कदम उठाया है. आईईए ने अपने इमरजेंसी रिजर्व से 400 मिलियन बैरल तेल जारी करने की घोषणा की है और इस समझौते पर एजेंसी के सभी 32 सदस्य देशों ने सहमति जताई है. इस फैसले का उद्देश्य ग्लोबल ऑयल ट्रेड (Global Oil Trade) के लिए महत्वपूर्ण समुद्री रूट होर्मुज को ईरान द्वारा बंद करने से तेल सप्लाई की गंभीर कमी को दूर करना है.
बता दें कि ईरान की सेना (Iran Army) ने बुधवार को चेतावनी दी कि दुनिया को 200 डॉलर प्रति बैरल के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि वह होर्मुज से एक लीटर तेल भी गुजरने नहीं देगी.
चुनौतियों के बीच बड़ा फैसला
आईईए के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने इस संबंध में एक बयान जारी करते हुए कहा है कि, 'तेल बाजार में हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे बड़े पैमाने की हैं. ऐसे में बेहद खुशी की बात है कि एजेंसी के 32 सदस्य देशों ने एक साथ मिलकर इमरजेंसी कार्रवाई के साथ इनका जवाब दिया है. उन्होंने आगे कहा कि तेल बाजार वैश्विक हैं, इसलिए बड़े संकटों के प्रति प्रतिक्रिया भी वैश्विक ही होनी चाहिए. ऊर्जा सुरक्षा आईईए सदस्य एक साथ निर्णायक कार्रवाई करने में मजबूत एकजुटता दिखा रहे हैं.
क्या है IEA और क्यों बना?
आईईए एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो दुनिया के एनर्जी मार्केट की निगरानी करता है और पॉलिसी संबंधित सलाह देने का काम करता है. जब 1973 में दुनिया में तेल संकट (Oil Crisis) गहराया था, तो उसके बाद तेल आपूर्ति पर बेहतर समन्वय और डेटा की जरूरत महसूस हुई थी और इसके लिए ही इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी की स्थापना अगले साल 1974 में की गई थी. इसका मुख्यालय पेरिस में है और इस संगठन को OECD इंफ्रास्ट्रक्चर के तहत बनाया गया था. इसका मुख्य काम Global Energy Market की निगरानी करते हुए तेल, गैस, कोयला, बिजली पर डेटा और रिपोर्ट जारी करना.
IEA के पास इतना तेल रिजर्व
आईईए के पास सार्वजनिक आपातकालीन रिजर्व के रूप में 1.2 अरब बैरल से अधिक तेल है. इसके अलावा सरकारी दायित्व के तहत उद्योग भंडार के रूप में 600 मिलियन बैरल तेल मौजूद है. ऐसा पहली बार नहीं है जब इस तरह इमरजेंसी में तेल जारी करने का फैसला लिया गया है. इतिहास में छठी बार ये मामला सामने आया है. इससे पहले 1991, 2005, 2011 और 2022 में दो बार तेल जारी किया जा चुका है.
Hormuz ने बढ़ाई दुनिया की टेंशन
गौरतलब है कि 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष ने होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल टैंकरों की आवाजाही को बुरी तरह प्रभावित किया है. इसके चलते इस क्षेत्र से कच्चे और रिफाइंड तेल उत्पादों का निर्यात वर्तमान में संघर्ष पूर्व स्तरों के 10% से भी कम है. साल 2025 में औसतन 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल और तेल उत्पाद होर्मुज से होकर गुजरे, जो दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का लगभग 25% था.