मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने चीन से अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का सुझाव देते हुए कहा है कि यह बीजिंग के प्रति केंद्र की नीति के विरोधाभासी नहीं है. इंडिया टुडे टीवी के साथ एक खास बातचीत में नागेश्वरन ने सोमवार को जारी प्री-बजट आर्थिक सर्वेक्षण की सिफारिशों के बारे में बात की. उन्होंने इस दौरान लोकल मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और एक्सपोर्ट मार्केट का दोहन करने के लिए बीजिंग से एफडीआई की मांग की वकालत भी की.
चीन पर आयात निर्भरता में हो रही बढ़ोतरी
नागेश्वरन के अनुसार, भारत का चीन के साथ 87-90 अरब अमेरिकी डॉलर का व्यापार घाटा है और सामान आयात करना डोमेस्टिक मेन्यूफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज को बढ़ाने के लिए हतोत्साहित करने वाला है. मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि, भारत की चीन पर आयात निर्भरता लगातार बढ़ रही है और माल आयात बनाम पूंजी आयात में संतुलन बनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि, "देश के अंदर डोमेस्टिक प्रोडक्शन एक अलग खेल है. यह देश में एक्सपोर्ट क्षमताओं को बढ़ने, जानकारी के हस्तांतरण की अनुमति देता है. इसलिए हमें दोनों के बीच सही संतुलन बनाने की जरूरत है. और यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे हम आगे की जांच और रिफ्लेक्शन के लिए उठा रहे हैं."
कई देश भी चीन के साथ दुविधा में
नागेश्वरन ने कहा कि न केवल भारत बल्कि कई अन्य देश भी चीन के साथ उलझने की इस दुविधा से जूझ रहे हैं. उन्होंने कहा, "हमने ब्राजील और तुर्की का उदाहरण दिया, जिन्होंने चीन से इलेक्ट्रिक वाहनों के आयात पर प्रतिबंध लगाया, लेकिन उन्होंने चीन को देशों के अंदर इलेक्ट्रिक वाहन विनिर्माण के लिए दुकान स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित भी किया."
आर्थिक सर्वेक्षण में दिया गया ये सुझाव
आर्थिक सर्वेक्षण में सुझाव दिया गया है कि चूंकि अमेरिका और यूरोप अपनी तत्काल सोर्सिंग चीन से दूर कर रहे हैं, इसलिए यह अधिक प्रभावी है कि चीनी कंपनियां भारत में निवेश करें और फिर पड़ोसी देश से आयात करने के बजाय इन बाजारों में उत्पादों का निर्यात करें. सर्वेक्षण में कहा गया है, "इन विकल्पों में से, अमेरिका में भारत के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए चीन से एफडीआई पर ध्यान केंद्रित करना अधिक आशाजनक लगता है, जैसा कि पूर्व एशियाई अर्थव्यवस्थाओं ने किया था."
"इसके अलावा, चीन से लाभ पाने की रणनीति के रूप में एफडीआई को चुनना और एक दृष्टिकोण व्यापार पर निर्भर रहने की तुलना में अधिक फायदेमंद प्रतीत होता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि चीन भारत का शीर्ष आयात भागीदार है, और चीन के साथ व्यापार घाटा बढ़ रहा है." वर्तमान में, भारत में आने वाला अधिकांश एफडीआई ऑटोमेटिक अप्रूवल रूट के अंतर्गत आता है. हालाँकि, भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से FDI को किसी भी क्षेत्र में अनिवार्य सरकारी मंजूरी की जरूरत होती है. अप्रैल 2000 से मार्च 2024 तक भारत में रिपोर्ट किए गए कुल एफडीआई इक्विटी इनफ्लो में केवल 0.37 प्रतिशत हिस्सेदारी (2.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर) के साथ चीन 22वें स्थान पर है.