मोतिहारी के कैथवलिया गांव में आज का दिन ऐतिहासिक है. यहां विश्व का सबसे बड़ा शिवलिंग स्थापित होने जा रहा है, जिसकी ऊंचाई 33 फीट, चौड़ाई 33 फीट और वजन 210 मीट्रिक टन है. ग्रेनाइट पत्थर से निर्मित इस शिवलिंग की स्थापना के मौके पर पूरे देश से साधु-संत और श्रद्धालु मौजूद हैं. इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बनने के लिए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी मंदिर परिसर पहुंच रहे हैं.
मोतिहारी के कल्याणपुर प्रखंड के राजपुर पंचायत के कैथवलिया गांव में विश्व के सबसे बड़े शिवलिंग की स्थापना का उत्सव शुरू हो गया है. देश-विदेश से आए वैदिक पंडितों और विद्वानों के मंत्रोच्चार के बीच सायन कुणाल, स्व. आचार्य किशोर कुणाल के पुत्र और उनकी सांसद पत्नी शाम्भवी चौधरी यजमान की भूमिका में इस पुनीत कार्य का नेतृत्व कर रहे हैं.

इस विशालकाय शिवलिंग की स्थापना महावीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा की जा रही है. ग्रेनाइट से निर्मित यह 210 मीट्रिक टन वजनी शिवलिंग विश्व का सबसे बड़ा एकल शिवलिंग माना जा रहा है. इसकी भव्यता को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ सुबह से ही मंदिर परिसर में जमा हो गई.
सीएम नीतीश कुमार भी इस ऐतिहासिक आयोजन का हिस्सा बनने पहुंच रहे हैं. कार्यक्रम स्थल पर मंदिर और शिवलिंग की पूजा अर्चना शुरू हो गई है. यहां हेलिकॉप्टर से पुष्पवर्षा की तैयारी है. देश की कई पवित्र नदियों के जल से जलाभिषेक किया जाएगा.

इस शिवलिंग का आकार तमिलनाडु के महाबलीपुरम में बने 33 फीट ऊंचे शिवलिंग के समान है. मंदिर निर्माण का काम अब तेजी से आगे बढ़ेगा और 2030 तक पूरे विराट रामायण मंदिर का निर्माण पूरा होने की उम्मीद है.
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शिवलिंग स्थापना कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालु इस भव्य और अद्भुत पल को कैमरे में कैद करते दिखे. हर कोई अपने मोबाइल से वीडियो बना रहा था और सोशल मीडिया पर इस ऐतिहासिक पल को साझा कर रहा था.

सायन कुणाल ने बताया कि शिवलिंग स्थापना का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विरासत को भी संरक्षित करना है. उन्होंने कहा कि यह शिवलिंग आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और श्रद्धा का प्रतीक बनेगा.
आज का दिन न केवल मोतिहारी बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का पल है. सहस्त्रालिंगम शिवलिंग की स्थापना के साथ ही यहां का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया है. श्रद्धालुओं का कहना है कि इस ऐतिहासिक स्थापना को देखना और इसके दर्शन करना जीवन का अद्भुत अनुभव है. साल 2030 तक बनने वाले विराट रामायण मंदिर का यह पहला ऐतिहासिक अध्याय है.