बिहार के पूर्णिया जिले की रुपौली विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव हो रहे हैं. इस सीट के लिए 10 जुलाई को मतदान होना है. सूबे की सत्ता पर काबिज जनता दल (यूनाइटेड) ने इस सीट से कलाधर मंडल को टिकट दिया है तो वहीं राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देकर लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी में आईं बीमा भारती पर ही भरोसा जताया है. बीमा भारती इस सीट से 2020 के चुनाव में जेडीयू के टिकट पर विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुई थीं. रुपौली उपचुनाव में आरजेडी की बीमा भारती और जेडीयू के कलाधर मंडल के बीच है लेकिन साख सीएम नीतीश कुमार और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव की दांव पर लगी है. ये उपचुनाव दोनों नेताओं के लिए नाक का सवाल बन गया है.
नीतीश-तेजस्वी के लिए नाक का सवाल
लोकसभा चुनाव नतीजे आने के करीब महीनेभर बाद हो रहा रुपौली का उपचुनाव नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव, दोनों के लिए ही नाक का सवाल बन गया है. हालिया लोकसभा चुनाव में दोनों ही दलों को पूर्णिया में हार का सामना करना पड़ा था. अब रुपौली उपचुनाव में जीत के जरिए दोनों दल 2025 चुनाव से पहले अपनी सियासी उम्मीदों को नई उड़ान देने के लिए पूरी ताकत झोक रहे हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रुपौली में जेडीयू उम्मीदवार के लिए प्रचार किया और बीमा भारती को निशाने पर रखा तो वहीं उनकी पार्टी के कई बड़े नेताओं ने कैंप कर प्रचार की बागडोर संभाली.
नीतीश ने बीमा को तीन बार विधायक और राज्य सरकार में मंत्री बनाने का जिक्र कर दावा किया कि इतनी इज्जत दी फिर भी हमें छोड़कर भाग गईं. नीतीश के बयान पर बीमा की प्रतिक्रिया आई है और विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भी पलटवार किया. तेजस्वी यादव ने जेडीयू पर अति पिछड़े की बेटी को अपमानित करने का आरोप लगाया. नीतीश के सामने जेडीयू की जीती सीट बचाने की चुनौती है. वहीं, तेजस्वी के सामने यह साबित करने की चुनौती है कि लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने वोटों का जो नया समीकरण गढ़ा था, वह कोई तुक्का नहीं है. गौरतलब है कि बीमा भारती 2020 में रुपौली सीट से एनडीए की ओर से जेडीयू के टिकट पर जीती थीं.
ब्रांड नीतीश और तेजस्वी के समीकरणों का लिटमस टेस्ट
लोकसभा चुनाव नतीजों के पहले ब्रांड नीतीश की साख कमजोर होने की चर्चा चल निकली थी. एग्जिट पोल में भी जेडीयू को नुकसान के अनुमान जताए गए थे लेकिन इन सबको धता बताते हुए नीतीश कुमार की पार्टी ने बीजेपी के बराबर 12 सीटें जीत लीं जो आरजेडी के मुकाबले तीन गुना है. आरजेडी को चार सीटों पर जीत मिली थी. रुपौली उपचुनाव ब्रांड नीतीश के साथ ही लोकसभा चुनाव में आरजेडी की ओर से गढ़े गए वोटों के नए समीकरण का भी लिट्मस टेस्ट माने जा रहे हैं. लोकसभा चुनाव में आरजेडी भले ही चार सीटें जीत सकी, सूबे में उसकी अगुवाई वाले गठबंधन ने 10 सीटें हासिल की थी. पार्टी जेडीयू का कोर वोटर माने जाने वाले कुर्मी-कुशवाहा वर्ग में भी सेंधमारी करने में एक हद तक सफल रही थी.
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार ओमप्रकाश अश्क ने कहा कि नीतीश कुमार का वोटबैंक केवल कुर्मी-कुशवाहा तक सीमित नहीं है. नीतीश ने बिहार की सत्ता संभालने के तुरंत बाद से ही लड़कियों को साइकिल देकर और उन्हें स्कूल भेजने के लिए अभियान, शराबबंदी जैसे काम से जाति-वर्ग की सीमा से ऊपर उठकर महिला मतदाताओं के बीच अपना जो आधार बनाया है, उसकी चर्चा कम होती है. लोकसभा चुनाव में नीतीश की पार्टी तमाम खेमेबंदी और विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अगर साख बचाने में सफल रही तो उसके पीछे इस वोटबैंक की बड़ी भूमिका थी. रुपौली उपचुनाव में भी नीतीश और उनकी पार्टी को महिलाओं मतदाताओं के नैया पार लगाने की उम्मीद है और सीएम या एनडीए के नेता बीमा भारती पर जुबानी हमले करते समय अगर एहतियात बरतते नजर आ रहे हैं तो उसके पीछे यह भी एक वजह हो सकती है.
रुपौली में त्रिकोणीय हुई लड़ाई, पप्पू के स्टैंड ने चौंकाया
रुपौली उपचुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. जेडीयू ने भी इस सीट पर गौता कार्ड खेल दिया है. नीतीश की पार्टी ने भी उसी गौता समुदाय से ही उम्मीदवार दिया है जिससे बीमा भारती आती हैं. दो दलों और संवैधानिक पदों पर बैठे पक्ष-विपक्ष के दो शीर्ष नेताओं के बीच साख की लड़ाई बन चुके रुपौली उपचुनाव में मुकाबले को निर्दल शंकर सिंह ने त्रिकोणीय बना दिया है. शंकर सिंह पूर्व विधायक हैं और वह 2020 में दूसरे नंबर पर रहे थे. तब शंकर चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी से मैदान में उतरे थे और बीमा भारती 20 हजार से भी कम वोट के अंतर से जीत सकी थीं.
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रुपौली सीट पर दावा चिराग की पार्टी ने भी किया था लेकिन जेडीयू सीटिंग सीट देने के लिए तैयार नहीं हुई. शंकर सिंह ने इसके बाद निर्दलीय ही ताल ठोक दी. शंकर सिंह सवर्ण और दलित वोट के साथ ही निर्दलीय होने के नाते हर जाति-वर्ग से वोट मिलने की उम्मीद जता रहे हैं. दूसरी तरफ, दोनों ही दलों से गौता कम्युनिटी के उम्मीदवार मैदान में हैं. ऐसे में कहा ये भी जा रहा है कि ईबीसी की इस सबसे बड़ी कम्युनिटी के वोट बंट सकते हैं जो एकतरफा बीमा के साथ जाते थे. वोटों के इस गुणा-गणित में निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के स्टैंड ने भी चौंकाया है.
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पप्पू यादव ने बीमा भारती का समर्थन करने का ऐलान किया है. पप्पू यादव जिन बीमा भारती की वजह से इंडिया ब्लॉक की ओर से टिकट पाने में असफल रहे, अब वह उन्हीं का समर्थन कर रहे हैं. रुपौली उपचुनाव में यादव-मुस्लिम के साथ गौता वोट का गणित चलता है या सुशासन बाबू के चेहरे का जादू? यह 13 जुलाई की तारीख बताएगी जब उपचुनाव के नतीजे आएंगे.