बिहार में अपराध और महिला सुरक्षा को लेकर निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सम्राट सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि अगर आठ आरोपियों में से एक का हाफ एनकाउंटर हो सकता है तो बाकी का क्यों नहीं. साथ ही उन्होंने कोर्ट के एक फैसले पर भी सवाल उठाए और नेताओं के आचरण को लेकर भी बयान दिया.
पप्पू यादव ने भाजपा नेता और प्रदेश के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के उस बयान पर जवाब दिया जिसमें कहा गया था कि अपराधियों की कोई जाति नहीं होती. पप्पू यादव ने कहा कि अपराधी की पहचान उसकी जाति से नहीं बल्कि उसके अपराध से होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जब अलग-अलग जातियों के लोग अपराध में शामिल पाए जाते हैं तो पूरी जाति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
बिहार में दुष्कर्म, छेड़खानी और बच्चों के खिलाफ बढ़ते अपराधों का जिक्र करते हुए पप्पू यादव ने कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह कहना कि कपड़े उठाकर छूना बलात्कार की श्रेणी में नहीं आता, ऐसे अपराधों को और बढ़ावा देने वाला बयान है. उन्होंने कहा कि शिक्षक, पुलिसकर्मी, अधिकारी और राजनीतिक रसूख रखने वाले लोगों पर भी ऐसे आरोप लगते रहे हैं और सबके खिलाफ बराबर कार्रवाई होनी चाहिए.
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पप्पू यादव ने पुलिस से सवाल किया कि जब कई आरोपी होते हैं तो सबके खिलाफ एक जैसी चार्जशीट और कार्रवाई क्यों नहीं होती. उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई जाति, पार्टी या राजनीतिक दबाव देखकर नहीं होनी चाहिए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई दलों में आपराधिक मामलों से जुड़े लोगों को टिकट और संरक्षण मिलता रहा है, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है.
भाजपा नेता श्रेयसी सिंह की मोरल पुलिसिंग वाली टिप्पणी पर भी पप्पू यादव ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि नेताओं को पहले अपना आचरण देखना चाहिए. वहीं चिराग पासवान को लेकर उठ रहे सवालों पर उन्होंने कहा कि सम्मानित नेता के बारे में ऐसी बातें ठीक नहीं हैं.