बिहार विधान परिषद की 10 सीटों के लिए चुनाव और उपचुनाव हो रहे हैं. इन चुनावों में यह उम्मीद जताई जा रही थी कि सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार में राष्ट्रीय लोक मोर्चा ( आरएलएम) कोटे से मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजा जा सकता है. ऐसा हुआ नहीं. आरएलएम खाली हाथ रह गई और दीपक प्रकाश अपने पिता आरएलएम अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के साथ पटना के पार्टी कार्यालय में ही बैठे रह गए.
विधान परिषद चुनाव के लिए एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन के साथ ही दीपक प्रकाश के कैबिनेट में भविष्य को लेकर भी कयासों का दौर तेज हो गया है. उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए उम्मीदवारों के नामांकन से भी दूरी बना ली. उपेंद्र कुशवाहा भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को बार-बार एक विधान परिषद सीट देने के वादे की याद दिलाते रहे. अब आरएलएम सूत्रों का दावा है कि उपेंद्र कुशवाहा को इसका अंदाजा पहले ही हो गया था.
आरएलएम सूत्रों की मानें तो उपेंद्र कुशवाहा यह समझ गए थे कि एनडीए की ओर से विधान परिषद चुनाव में उनके बेटे दीपक प्रकाश को उम्मीदवार नहीं बनाया जा रहा है. इससे दीपक प्रकाश का मंत्री पद भी खतरे में आ गया है. उपेंद्र कुशवाहा ने एक दिन पहले ही अपनी पार्टी के नेताओं के साथ अहम बैठक की थी.
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राज्यसभा सांसद कुशवाहा ने इस बैठक में खुले मंच से कहा था कि किसी एक पद के लिए पार्टी का अस्तित्व समाप्त हो जाए, यह मुझे मंजूर नहीं है. उपेंद्र कुशवाहा ने आरएलएम नेताओं को संबोधित करते हुए कहा था कि दुनिया की कोई भी ताकत ऐसा नहीं कर सकती. उपेंद्र कुशवाहा के इस बयान को आरएलम कार्यकर्ताओं को स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
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गौरतलब है कि ऐसी चर्चा सियासी गलियारों में होती रही है कि बीजेपी ने उपेंद्र कुशवाहा को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि वह अपनी पार्टी का विलय कर दें. कुशवाहा के ताजा बयान को इस तरह की चर्चाओं की पुष्टि की तरह भी देखा जा रहा है.