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राज्यसभा चुनाव में कांग्रेसी विधायकों से कैसे गच्चा खा गए तेजस्वी यादव? Inside Story

कांग्रेस के तीनों विधायकों ने तेजस्वी यादव की रणनीति पर सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि तेजस्वी ने सहयोगी दलों से बिना कोई बात किए महागठबंधन से अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बना दिया. यही असहमति मतदान के दिन ‘रणनीतिक दूरी’ के रूप में सामने आई.

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कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में बिगाड़ दिया तेजस्वी यादव का गेम (Photo: X/@RJD)
कांग्रेस ने राज्यसभा चुनाव में बिगाड़ दिया तेजस्वी यादव का गेम (Photo: X/@RJD)

बिहार के राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की हार के बाद महागठबंधन के भीतर गहरे राजनीतिक मतभेद सतह पर आ गए हैं. कांग्रेस के तीन विधायकों की वोटिंग से गैरहाजिरी को अब महज असंतोष नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है, जिसने चुनाव के नतीजे को निर्णायक रूप से प्रभावित किया.

राज्यसभा चुनाव को नतीजे आने के बाद अब आरजेडी को लेकर कांग्रेस विधायकों का गुस्सा सामने देखने को मिल रहा है. जिन तीन कांग्रेस विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में वोटिंग से दूरी बनाई, उनका कहना है कि चुनाव से पहले ही राजद के उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के चयन को लेकर कांग्रेस के अंदर एक राय नहीं थी.

कांग्रेस के तीनों विधायकों ने RJD पर आरोप लगाया कि तेजस्वी यादव ने सहयोगी दलों से बिना कोई बात किए महागठबंधन से अमरेंद्र धारी सिंह को उम्मीदवार बना दिया. बताया जा रहा है कि यही असहमति मतदान के दिन ‘रणनीतिक दूरी’ के रूप में सामने आई, जब कांग्रेस के तीन विधायक वोटिंग से दूर रहे.

'वोट न देना ही बेहतर विकल्प'
कांग्रेस विधायक मनोज शिमास ने खुलकर नाराजगी जताते हुए कहा, 'RJD ने हमारे प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया. जब सहयोगी दलों को विश्वास में ही नहीं लिया जाएगा, तो इस तरह की स्थिति बनेगी. हमें अपने स्तर पर निर्णय लेने की छूट दी गई थी.'

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उन्होंने उम्मीदवार चयन पर सवाल उठाते हुए कहा,'जिस व्यक्ति को उम्मीदवार बनाया गया, उसका राजनीतिक आधार स्पष्ट नहीं था. ऐसे में मुझे लगा कि वोट न देना ही बेहतर विकल्प है.'

'हमें निर्णय लेने की छूट दी गई'
कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, 'मैं NDA के साथ नहीं जा सकता, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आंख बंद करके हर फैसले का समर्थन किया जाए. जब उम्मीदवार चयन ही सवालों के घेरे में हो, तो मतदान से दूरी बनाना ही सही लगा.'

कांग्रेस के एक अन्य विधायक मनोज बिस्वास ने भी पार्टी लाइन का हवाला देते हुए वोटिंग से दूरी बनाई. उन्होंने कहा, 'हम प्रदेश नेतृत्व के निर्देशों का पालन करते हैं. जब हमें निर्णय लेने की छूट दी गई, तो हमने वही किया जो हमें राजनीतिक रूप से उचित लगा.'

बिहार कांग्रेस अध्यक्ष से तेजस्वी ने नहीं किया संपर्क
सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस की नाराजगी सिर्फ उम्मीदवार तक सीमित नहीं थी. पार्टी इस बात से भी नाराज थी कि लालू प्रसाद या फिर तेजस्वी यादव ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के 6 विधायकों के समर्थन के लिए औपचारिक रूप से बिहार प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष राजेश राम या फिर बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्ण अल्लावरु से कोई संपर्क नहीं किया. तेजस्वी यादव सीधे कांग्रेस विधायकों से संपर्क बनाए हुए थे.

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इसका नतीजा था कि वोटिंग के दिन कांग्रेस के तीन विधायकों- सुरेंद्र कुशवाहा, मनोज बिस्वास और मनोहर प्रसाद सिंह की अनुपस्थिति ने विपक्ष के वोट गणित को सीधा नुकसान पहुंचाया. माना जा रहा है कि यदि ये वोट पड़ते, तो राज्यसभा चुनाव का नतीजा कुछ और हो सकता था.

क्या कांग्रेस के विधायकों पर होगी कार्रवाई?
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में कांग्रेस ने डबल गेम खेलते हुए राजद प्रत्याशी को हरा भी दिया. वोटिंग में हिस्सा नहीं लेने वाले और परोक्ष तरीके से एनडीए को मदद पहुंचाने वाले तीनों विधायकों पर कोई कार्रवाई भी नहीं करने के मूड में है.

गौरतलब है कि राजद विधायक मोहम्मद फैसल रहमान भी राज्यसभा चुनाव में पार्टी के प्रत्याशी के लिए वोट करने नहीं पहुंचे थे. अपनी अनुपस्थिति को निजी कारण बताते हुए उन्होंने कहा, 'मैं व्यक्तिगत कारणों से वोटिंग में शामिल नहीं हो सका. इसे राजनीतिक रूप से नहीं देखा जाना चाहिए. मेरी मां की तबीयत खराब थी और उसे दिन मैं दिल्ली में था.'

कांग्रेस ने आरजेडी को दे दिया संदेश
माना जा रहा है कि कांग्रेस के तीनों विधायक भी यही दलील देंगे कि उन्होंने राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग नहीं किया, जिसकी वजह से उन पर कोई कार्रवाई हो बल्कि निजी कारण से वे वोटिंग प्रक्रिया से दूर रहे.

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माना जा रहा है कि यह कांग्रेस की क्लासिक 'डबल पॉलिटिक्स’ है. पार्टी ने आरजेडी से सीधे टकराव नहीं करते हुए आरजेडी का खेल भी बिगाड़ दिया और साथ ही वह यह भी नहीं चाहती कि मामला इतना बढ़े कि गठबंधन ही टूट जाए.

RJD खेमे में इस घटनाक्रम को लेकर नाराजगी साफ दिख रही है. पार्टी के कुछ नेताओं का मानना है कि कांग्रेस ने जानबूझकर दूरी बनाकर चुनावी गणित बिगाड़ा.

अब तेजस्वी के फैसले पर नजर
राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर मौजूद दरार को उजागर कर दिया है. फिलहाल, कांग्रेस का रुख साफ है- संदेश भी देना है और टकराव से भी बचना है.

हालांकि, यह देखना दिलचस्प होगा कि तेजस्वी यादव इस पूरे घटनाक्रम पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या आने वाले दिनों में बिहार महागठबंधन में कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है?

राज्यसभा चुनाव का स्कोर कार्ड
बता दें कि अप्रैल-2026 में खाली होने वाली 37 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव के फाइनल नतीजे आ गए हैं. 37 राज्यसभा सीटों में 26 सीटें पर पहले ही निर्विरोध सदस्यों का चुन लिया गया था, जिसमें एनडीए और विपक्ष को 13-13 सीटें मिली थी. 

हरियाणा, बिहार और ओडिशा की 11 राज्यसभा सीटों पर सोमवार को चुनाव हुए, जिसमें एनडीए 9 और विपक्ष दो सीटें जीती है. इस तरह से चुनाव का फाइनल स्कोर देखें तो एनडीए को 22 सीटें मिली है जबकि विपक्ष के हिस्सा में 15 सीट ही आ सकी हैं.

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जहां तक कि बिहार की बात है कि तो वहां की पांच राज्यसभ सीटों में जेडीयू ने अपनी दोनों सीटें बचाए रखा तो आरजेडी को 2 सीट का नुकसान. बीजेपी को दो सीट का लाभ हुआ तो उपेंद्र कुशवाहा अपनी सीट बचा लिया.

बिहार में कांग्रेस के 6 में से 3 विधायक वोटिंग के दिन गायब रहे. यहां तक कि पार्टी के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु खुद पटना भी नहीं पहुंचे. इस अनुपस्थिति का सीधा नुकसान यह हुआ कि NDA ने बिहार से पांचवीं राज्यसभा सीट जीत ली, जो विपक्ष के हाथ जा सकती थी. RJD नेताओं ने इसे 'विश्वासघात' करार दिया.

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