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'15 दिन में एक्शन नहीं तो सम्राट के आवास का करेंगे घेराव', भरत तिवारी केस में प्रशांत किशोर का अल्टीमेटम

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बिलौटी गांव की महापंचायत में शामिल होकर सिटिंग जज से न्यायिक जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा कि जांच में पटना के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका भी शामिल होनी चाहिए. प्रशांत किशोर ने चेतावनी दी कि 15 दिनों में कार्रवाई नहीं होने पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का घेराव किया जाएगा.

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प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की. Photo PTI
प्रशांत किशोर ने भरत तिवारी के परिजनों से मुलाकात की. Photo PTI

बिहार भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने न्यायिक जांच को लेकर बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं. बुधवार को भरत तिवारी के गांव बिलौटी में आयोजित महापंचायत में शामिल हुए प्रशांत किशोर ने मांग की कि मामले की जांच किसी रिटायर जज नहीं, बल्कि कार्यरत (सिटिंग) न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए.

महापंचायत को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जांच केवल भोजपुर पुलिस या स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पटना में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह पता लगाया जाना चाहिए कि एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी अपने स्तर पर कार्रवाई कर रहे थे या उन्हें ऊपर से निर्देश मिले थे.

प्रशांत किशोर ने कहा कि भरत तिवारी के परिजन किसी प्रकार का मुआवजा या सरकारी नौकरी नहीं चाहते, बल्कि केवल न्याय की मांग कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दोषियों की जवाबदेही तय किए बिना न्याय संभव नहीं है.

जन सुराज प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह समर्थकों के साथ पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास का घेराव करेंगे. उन्होंने कहा कि पहले मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा जाएगा और यदि मुलाकात नहीं होती है तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.

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प्रशांत किशोर ने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के आधार पर भरत तिवारी मानसिक रूप से अस्थिर नहीं थे, बल्कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता थे. उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की शुरुआती प्रतिक्रिया को भी असंवेदनशील बताया और आरोप लगाया कि सरकार इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है.

उधर, बिहार सरकार पहले ही मामले की न्यायिक जांच के आदेश दे चुकी है. सरकार ने रिटायर हाईकोर्ट जज की निगरानी में जांच कराने का फैसला लिया है. वहीं जेडीयू के वरिष्ठ नेता और मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि सरकार भी घटना से दुखी है और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाएगी.

गौरतलब है कि 17 जून को भोजपुर जिले में पुलिस कार्रवाई के दौरान 28 वर्षीय भरत तिवारी की मौत हो गई थी. इसके बाद से परिजन और कई सामाजिक संगठन इसे फर्जी एनकाउंटर बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं. यह मामला अब बिहार की राजनीति का बड़ा मुद्दा बन चुका है.

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