
बारिश आई नहीं कि शहर की पोल खुल गई. जिन सड़कों पर कल तक विकास दौड़ रहा था, आज वहीं कारें तैरती नजर आ रही हैं. फिर सोशल मीडिया पर वीडियो आते हैं, लोग बोनट खोलकर इंजन सुखाते हैं और किसी का लाखों रुपये का नुकसान एक वायरल रील बन जाता है. लेकिन कैमरे में जो दिखता है, असली कहानी उससे आगे की होती है.
सवाल यह है कि जब कार पानी में डूब जाए, बारिश या बाढ़ से डैमेज हो जाए. तब आपके साथ कौन खड़ा होता है. नगर निगम, सरकार या फिर आपका कार इंश्योरेंस? ज्यादातर लोगों के दिमाग में ये सवाल रहता है कि, क्या कार इंश्योरेंस बारिश या बाढ़ के चलते हुए कार में नुकसान को कवर करता है? जवाब आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी में छिपा है. अगर सही कवर लिया है तो नुकसान कुछ कम हो सकता है, लेकिन अगर सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीदी है, तो बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी जेब का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है.
कार इंश्योरेंस में फ्लड डैमेज कवर का मतलब है कि अगर आपकी कार बाढ़, भारी बारिश, जलभराव, नालों के ओवरफ्लो होने या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा की वजह से खराब होती है तो इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार रिपेयर या पार्ट्स बदलने का खर्च उठाती है. इसमें इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, ब्रेक, गियरबॉक्स, इंटीरियर और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर जैसे पार्ट शामिल हो सकते हैं. हालांकि यह सुविधा सिर्फ कुछ इंश्योरेंस पॉलिसी में ही मिलती है.
नहीं. हर इंश्योरेंस पॉलिसी में यह सुविधा नहीं होती. अगर आपके पास सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है तो बाढ़ से कार को हुए नुकसान का कोई क्लेम नहीं मिलेगा. अगर आपके पास स्टैंडअलोन ओन-डैमेज पॉलिसी या कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस है तो फ्लड डैमेज का कवर मिलता है. ऐसे में कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार रिपेयर या पार्ट्स बदलने का खर्च देती है.

अगर आप ऐसे शहर में रहते हैं जहां हर साल बाढ़ या जलभराव का खतरा होता है, तो कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस लेना समझदारी का फैसला होगा. इंश्योरेंस लेने से पहले अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी और प्रीमियम को कम्पेयर करें. जरूरत पड़े तो हर कंपनी के एक्जीक्यूटिव से फोन पर या आमने-सामने पॉलिसी की पूरी बात करें. इसके बाद अपने जरूरत के हिसाब से बेहतर प्लान चुना जा सकता है.
| पॉलिसी | फ्लड डैमेज |
| थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस | कवरेज नहीं |
| स्टैंडअलोन ओन डैमेज | कवरेज मिलेगा |
| कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस | कवरेज मिलेगा |
इंजन प्रोटेक्शन कवर सबसे अहम माना जाता है. क्योंकि रेगुलर कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में इंजन को पानी से हुए नुकसान का पूरा कवर नहीं मिलता.
कंज्यूमेबल्स कवर के तहत इंजन ऑयल, गियर ऑयल, ग्रीस, नट-बोल्ट और दूसरी जरूरी चीजों का खर्च भी कवर हो सकता है.
रोडसाइड असिस्टेंस कवर बारिश के मौसम में काफी काम आता है. इसमें 24 घंटे टोइंग और दूसरी इमरजेंसी मदद मिल सकती है.
जीरो डेप्रिसिएशन कवर लेने पर क्लेम के समय कार के पार्ट्स की कीमत में होने वाली कटौती का नुकसान नहीं उठाना पड़ता है.
बता दें कि, केवल कॉम्प्रिहेंसिव या स्टैंडअलोन ओन-डैमेज पॉलिसी में ही कार को फ्लड डैमेज का कवर मिलता है. इसके अलावा अगर इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन नहीं है तो पानी से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलने में दिक्कत आ सकती है. इसलिए जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन प्रोटेक्शन, कंज्यूमेबल्स और रोडसाइड असिस्टेंस जैसे ऐड-ऑन लेने से सेफ्टी बेहतर हो जाती है.
बाढ़ से कार को होने वाला नुकसान के मरम्मत का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसे में सही इंश्योरेंस पॉलिसी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि पानी में डूबी कार का इंजन कभी स्टार्ट न करें. तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को सूचना दें और फोटो-वीडियो रिकॉर्ड अपने पास जरूर रखें. यही छोटी-सी सावधानी आपको लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है.