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इंजन, गियर और केबिन सब बर्बाद! बारिश या बाढ़ से डैमेज हुई कार तो क्या इंश्योरेंस से मिलेगा पैसा?

मानसून जहां चिलचिलाती धूप से राहत देता है वहीं अपने साथ कुछ मुश्किलें भी लेकर आता है. कई बार भारी बारिश और जलजमाव के बीच कारें भी फंस जाती हैं. जिससे कुछ ही मिनटों में इंजन से लेकर इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम तक सबकुछ डैमेज हो जाता है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि क्या कार इंश्योरेंस इस नुकसान की भरपाई करेगा या फिर पूरा खर्च आपकी जेब से जाएगा.

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हर कार इंश्योरेंस में फ्लड डैमेज का कवरेज नहीं मिलता है. Photo: ITG
हर कार इंश्योरेंस में फ्लड डैमेज का कवरेज नहीं मिलता है. Photo: ITG

बारिश आई नहीं कि शहर की पोल खुल गई. जिन सड़कों पर कल तक विकास दौड़ रहा था, आज वहीं कारें तैरती नजर आ रही हैं. फिर सोशल मीडिया पर वीडियो आते हैं, लोग बोनट खोलकर इंजन सुखाते हैं और किसी का लाखों रुपये का नुकसान एक वायरल रील बन जाता है. लेकिन कैमरे में जो दिखता है, असली कहानी उससे आगे की होती है. 

सवाल यह है कि जब कार पानी में डूब जाए, बारिश या बाढ़ से डैमेज हो जाए. तब आपके साथ कौन खड़ा होता है. नगर निगम, सरकार या फिर आपका कार इंश्योरेंस? ज्यादातर लोगों के दिमाग में ये सवाल रहता है कि, क्या कार इंश्योरेंस बारिश या बाढ़ के चलते हुए कार में नुकसान को कवर करता है? जवाब आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी में छिपा है. अगर सही कवर लिया है तो नुकसान कुछ कम हो सकता है, लेकिन अगर सिर्फ सस्ता प्रीमियम देखकर पॉलिसी खरीदी है, तो बाढ़ का पानी उतरने के बाद भी जेब का दर्द लंबे समय तक बना रह सकता है.

क्या होता है फ्लड डैमेज कवर?

कार इंश्योरेंस में फ्लड डैमेज कवर का मतलब है कि अगर आपकी कार बाढ़, भारी बारिश, जलभराव, नालों के ओवरफ्लो होने या किसी दूसरी प्राकृतिक आपदा की वजह से खराब होती है तो इंश्योरेंस कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार रिपेयर या पार्ट्स बदलने का खर्च उठाती है. इसमें इंजन, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, ब्रेक, गियरबॉक्स, इंटीरियर और इलेक्ट्रॉनिक सेंसर जैसे पार्ट शामिल हो सकते हैं. हालांकि यह सुविधा सिर्फ कुछ इंश्योरेंस पॉलिसी में ही मिलती है. 

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किस तरह डैमेज हो सकती है कार

  • बाढ़ का पानी कार के सबसे जरूरी पार्ट यानी इंजन को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा सकता है. 
  • मॉडर्न कारों में कई इलेक्ट्रॉनिक सेंसर और कंट्रोल यूनिट होते हैं. इनमें पानी पहुंचने पर शॉर्ट सर्किट हो सकता है और ECU जैसे महंगे पार्ट खराब हो सकते हैं.
  • बाढ़ का गंदा पानी कार की सीट, कारपेट, डैशबोर्ड और डोर पैनल को भी खराब कर देता है. कई मामलों में पूरा इंटीरियर बदलना पड़ जाता है.
  • अगर गियरबॉक्स में पानी चला जाए तो उसका लुब्रिकेशन खत्म हो जाता है और मेटल पार्ट आपस में रगड़ खाने लगते हैं. जिससे रिपेयरिंग खर्च बढ़ जाता है.
  • अगर सड़क पर पानी हद से ज्यादा हो और आप लगातार ऐसे इलाके में ड्राइविंग करते हैं तो, ब्रेक सिस्टम पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है.
  • ब्रेक पैड और ड्रम खराब हो सकते हैं और बाद में उनमें जंग लगने की संभावना भी बढ़ जाती है.

क्या हर कार इंश्योरेंस में मिलता है फ्लड डैमेज का कवर?

नहीं. हर इंश्योरेंस पॉलिसी में यह सुविधा नहीं होती. अगर आपके पास सिर्फ थर्ड पार्टी इंश्योरेंस है तो बाढ़ से कार को हुए नुकसान का कोई क्लेम नहीं मिलेगा. अगर आपके पास स्टैंडअलोन ओन-डैमेज पॉलिसी या कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस है तो फ्लड डैमेज का कवर मिलता है. ऐसे में कंपनी पॉलिसी की शर्तों के अनुसार रिपेयर या पार्ट्स बदलने का खर्च देती है.

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Car insurance flood damage cover
स्टैंडअलोन और कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में ही कार को फ्लड डैमेज का कवर मिलता है. Photo: ITG

अगर आप ऐसे शहर में रहते हैं जहां हर साल बाढ़ या जलभराव का खतरा होता है, तो कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस लेना समझदारी का फैसला होगा. इंश्योरेंस लेने से पहले अलग-अलग कंपनियों की पॉलिसी और प्रीमियम को कम्पेयर करें. जरूरत पड़े तो हर कंपनी के एक्जीक्यूटिव से फोन पर या आमने-सामने पॉलिसी की पूरी बात करें. इसके बाद अपने जरूरत के हिसाब से बेहतर प्लान चुना जा सकता है.

पॉलिसी फ्लड डैमेज
थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस कवरेज नहीं
स्टैंडअलोन ओन डैमेज कवरेज मिलेगा
कॉम्प्रिहेंसिव कार इंश्योरेंस कवरेज मिलेगा

मानसून में जरूरी ये ऐड-ऑन कवर

इंजन प्रोटेक्शन कवर सबसे अहम माना जाता है. क्योंकि रेगुलर कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में इंजन को पानी से हुए नुकसान का पूरा कवर नहीं मिलता.

कंज्यूमेबल्स कवर के तहत इंजन ऑयल, गियर ऑयल, ग्रीस, नट-बोल्ट और दूसरी जरूरी चीजों का खर्च भी कवर हो सकता है.

रोडसाइड असिस्टेंस कवर बारिश के मौसम में काफी काम आता है. इसमें 24 घंटे टोइंग और दूसरी इमरजेंसी मदद मिल सकती है.

जीरो डेप्रिसिएशन कवर लेने पर क्लेम के समय कार के पार्ट्स की कीमत में होने वाली कटौती का नुकसान नहीं उठाना पड़ता है. 

बता दें कि, केवल कॉम्प्रिहेंसिव या स्टैंडअलोन ओन-डैमेज पॉलिसी में ही कार को फ्लड डैमेज का कवर मिलता है. इसके अलावा अगर इंजन प्रोटेक्शन ऐड-ऑन नहीं है तो पानी से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलने में दिक्कत आ सकती है. इसलिए जीरो डेप्रिसिएशन, इंजन प्रोटेक्शन, कंज्यूमेबल्स और रोडसाइड असिस्टेंस जैसे ऐड-ऑन लेने से सेफ्टी बेहतर हो जाती है.

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बाढ़ से कार को होने वाला नुकसान के मरम्मत का खर्च काफी ज्यादा हो सकता है. ऐसे में सही इंश्योरेंस पॉलिसी आपको बड़े नुकसान से बचा सकती है. सबसे जरूरी बात यह है कि पानी में डूबी कार का इंजन कभी स्टार्ट न करें. तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को सूचना दें और फोटो-वीडियो रिकॉर्ड अपने पास जरूर रखें. यही छोटी-सी सावधानी आपको लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है.

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