यमन में हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने यमन सरकार के समर्थन की बात दोहराई है. अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के साथ खड़े रहने की बात कही है.
वहीं, मक्का की तरफ ड्रोन भेजे जाने के सऊदी दावे के बाद कई देशों ने सऊदी अरब के समर्थन का ऐलान किया है. हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने की बात से इनकार किया है. इस बीच यमन में लड़ाई तेज हो गई है. तेल सप्लाई पर भी इसका असर दिख रहा है.
यमन सरकार के समर्थन में खड़ा है ट्रंप प्रशासन
यमन के लिए अमेरिका के शीर्ष राजनयिक नील हॉप ने यमन की विदेश मंत्री अफरा अल-जुबैरी से बात की. इस दौरान उन्होंने कहा कि अमेरिका यमन की सरकार और वहां के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है. अमेरिकी दूतावास के मुताबिक, अमेरिका हूतियों के खिलाफ यमन सरकार के समर्थन में है.
अमेरिका ने हूतियों को ईरान समर्थित समूह बताया है. हालांकि, अभी अमेरिका ने सऊदी अरब की तरफ से चल रही सैन्य कार्रवाई में सीधे शामिल होने की बात नहीं कही है. अमेरिकी समर्थन फिलहाल राजनीतिक और सुरक्षा सहयोग तक सीमित बताया जा रहा है.
मक्का ड्रोन हमले पर कई देशों ने जताई नाराजगी
सऊदी अरब ने कहा है कि हूतियों की तरफ से मक्का की ओर भेजे गए एक ड्रोन को एयर डिफेंस ने रास्ते में ही रोककर नष्ट कर दिया. हूतियों ने इस आरोप को खारिज किया है. समूह ने मक्का को निशाना बनाने की बात को झूठ बताया है.
घटना के बाद UAE, कतर, तुर्की, लेबनान और सोमालिया समेत कई देशों ने सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई है. इन देशों ने पवित्र स्थलों की सुरक्षा पर जोर दिया है. भारत ने भी घटना पर चिंता जताते हुए सऊदी अरब के साथ एकजुटता जाहिर की है.
यमन में हूतियों पर हमले का दावा
यमन सरकार की सेना ने भी हूतियों के ठिकानों पर हमले का दावा किया है. सेना के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिमी बंदरगाह शहर मोचा के आसपास हूतियों के ठिकानों और सैन्य उपकरणों को निशाना बनाया गया. उत्तरी मारिब प्रांत में भी ड्रोन हमले किए जाने की बात कही गई है.
यमन की सरकार के समर्थन वाली सदर्न जायंट्स फोर्सेज ने भी काहबूब मोर्चे पर हूतियों को नुकसान पहुंचाने का दावा किया है. हालांकि, युद्ध से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.
हूतियों का दावा- सऊदी ने किए 40 हवाई हमले
हूतियों ने भी सऊदी अरब पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले करने का आरोप लगाया है. हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सारी ने दावा किया कि पिछले 24 घंटे में सऊदी विमानों ने पश्चिमी यमन के अलग-अलग इलाकों में 40 हवाई हमले किए. उन्होंने कहा कि इन हमलों में F-15 लड़ाकू विमानों का इस्तेमाल किया गया.
हूतियों के मुताबिक, ताइज, मारिब और होदेइदा प्रांतों को निशाना बनाया गया. इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
संघर्ष का तेल सप्लाई पर भी पड़ रहा असर
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार पर भी पड़ा है. सऊदी अरब की एक अहम तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले के बाद सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी थी. अब सऊदी अरब ओमान के रास्ते एशियाई खरीदारों को अतिरिक्त कच्चा तेल भेजने की कोशिश कर रहा है. इससे बाजार में सप्लाई को लेकर कुछ चिंता कम हुई है.
यह भी पढ़ें: हूती-ईरान पर होगा कड़ा प्रहार या खत्म होगी जंग? अगले हफ्ते अरब नेताओं से मिलेंगे ट्रंप
इसका असर तेल की कीमतों पर भी दिखा. बुधवार को ब्रेंट क्रूड 2.7 फीसदी गिरकर 105.83 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. अमेरिकी WTI क्रूड भी 3.2 फीसदी गिरा और 102.43 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. हालांकि, क्षेत्र में जारी संघर्ष के कारण बाजार पर दबाव बना हुआ है.
गुटेरेस ने की तनाव कम करने की अपील
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच सभी पक्षों से तनाव कम करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि इस समय सबसे बड़ी प्राथमिकता तनाव कम करना और कूटनीति की ओर लौटना होना चाहिए. उन्होंने मानवीय मदद के कामों की सुरक्षा और समुद्री रास्तों में आवाजाही बहाल करने पर भी जोर दिया.
यमन में हूतियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ती लड़ाई अब सिर्फ सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं है. मक्का की सुरक्षा, तेल सप्लाई और समुद्री रास्तों को लेकर भी चिंता बढ़ रही है. ऐसे में अमेरिका का यमन सरकार के समर्थन को दोहराना और कई देशों का सऊदी अरब के साथ खड़ा होना इस पूरे संकट को और अहम बना रहा है.
aajtak.in