अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान पर हमले से बिल्कुल पीछे नहीं हट रहे हैं. व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि राष्ट्रपति ट्रंप ईरान पर नए हमले के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. अमेरिका चाहता है कि तेहरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोले. साथ ही, पिछले महीने दोनों पक्षों के बीच हुए (सीजफायर) युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन करे.
ईरान पर रात भर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ. लेकिन ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया. वहीं, कुवैत ने भी कहा कि उसने अपने हवाई क्षेत्र में आए ड्रोन को रोक दिया.
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने अमेरिकी प्रशासन का पक्ष रखा. उनका आरोप है कि तेहरान ने पिछले महीने अमेरिका के साथ सीज़फायर के लिए एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे लेकिन तेहरान ने जल्द इसे तोड़ दिया. कमर्शियल जहाजों पर हमले किए और अमेरिकी सैनिकों की जान ले ली.
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कैरोलिन लेविट ने अपने बयान में इसे आतंकी व्यवहार करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप चुपचाप खड़े होकर इसे नहीं देख सकते. ईरान को तब तक कीमत चुकानी होगी जब तक वह बातचीत की मेज पर उस तरह नहीं आता जैसे राष्ट्रपति ट्रंप चाहते हैं.
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए ईरान पर हमले जारी रखने का संकेत दिया. उन्होंने बातचीत में कहा कि वे "बस जीतना चाहते हैं."
शुक्रवार को मैरीलैंड में कैंप डेविड प्रेसिडेंशियल रिट्रीट में पत्रकारों के साथ बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "हम उन पर(ईरान) बहुत जोरदार हमला करेंगे. और किसी न किसी समय वे कहेंगे कि अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते."
कैंप डेविड में ट्रंप ने सिर्फ ईरान का ही नहीं बल्कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी जिक्र किया. उन्होंने फिर एक बार दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों की जंग को रुकवाया. उनका कहना है कि भारत पाकिस्तान संघर्ष समेत आठ में से पांच युद्धों को उन्होंने रुकवाया.
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ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराया. उनका कहना है कि उन्होंने टैरिफ की धमकी देते हुए भारत-पाकिस्तान को परमाणु युद्ध की तरफ जाने से रोका.
ट्रंप की ओर से बार-बार भारत-पाकिस्तान संघर्ष रुकवाने के दावे किए गए हैं. हालांकि भारत सरकार ने हमेशा उनके इस दावे को सिरे से खारिज किया है.
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