अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के साथ एक समझौता किया है. इस समझौते के तहत अमेरिकी वेनेजुएला के लगभग 65 अरब बैरल तेल भंडार पर नियंत्रण करेगा. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इस डील की जानकारी दी है.
ट्रंप के मुताबिक, यह समझौता अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री हेगसेथ और वेनेजुएला की अंतिम राष्ट्रीपति डेल्सी रोड्रिग्ज के बीच बातचीत के बाद हुआ था. ट्रंप ने इसे दुनिया की सबसे बड़ी तेल डील करार दिया है.
ट्रंप ने लिखा, "संयुक्त राज्य अमेरिका ने अभी-अभी वेनेजुएला देश के साथ एक समझौता किया है - जो दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है!"
बता दें, यह ऐलान ऐसे समय में हुआ है जब ट्रंप के आदेश पर अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका लाने का ऑपरेशन चलाया था. ऐसा इसलिए किया गया था ताकि उन पर नार्को-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के संघीय आरोप लगाए जा सकें.
यह भी पढ़ें: ट्रंप ने कनाडा के इस लेक पर किया 'कब्जा', पास कर दिया ऑर्डर
अमेरिका में गैस की बढ़ती कीमतों के कारण राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बढ़ते जा रहा है. लगभग छह महीने से ईरान में युद्ध हो रहा है. और फिलहाल इसके खत्म होने के कोई संकेत भी नहीं हैं. ऐसे में, अमेरिका ने अपनी रणनीतिक पेट्रोलियम भंडाल का इस्तेमाल किया है जिससे अगस्त की शुरुआत तक इसमें 30 करोड़ बैरल से भी कम तेल बचा था.
जनवरी में मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रंप ने अमेरिकी तेल कंपनियों को वेनेजुएला में वापस भेजने और वहां के तेल भंडारण के इस्तेमाल की बात कही थी. ट्रंप का कहना था कि वेनेजुएला ने अमेरिका का तेल चुराया था, जब वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति ह्यूगो शावेज ने दशकों पहले सैकड़ों विदेश संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया था. इनमें अमेरिकी तेल कंपनियों की संपत्तियां भी शामिल थी.
वेनेजुएला के पास दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक है, जहां जमीन के नीचे करीब 303 अरब बैरल कच्चा तेल है. अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन के मुताबिक, यह दुनिया की कुल आर्पूति का लगभग 17% है. विशेषज्ञों की मानें तो दुनिया के अन्य हिस्सों के बिल्कुल विपरीत जहां भूवैज्ञानिकों को बिना इस्तेमाल किए गए तेल की खोज करनी पड़ती है. वहीं वेनेजुएला की जमीन के नीचे मौजूद भंडार का बहुत हद तक पता लगाया जा चुका है और उनकी जानकारी है. लेकिन खराब बुनियादी ढांचे के कारण यह देश दुनिया के तेल का सिर्फ 1% ही उत्पादन करता है.
aajtak.in