ट्रंप के खिलाफ गुस्सा, मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन की करारी शिकस्त, डेमोक्रेट्स की बल्ले-बल्ले

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी को बड़ा झटका लगा है. जॉर्जिया, टेक्सास, ओहायो और नॉर्थ कैरोलाइना समेत कई राज्यों में डेमोक्रेट्स ने जीत दर्ज की. चुनावी नतीजे ट्रंप की गिरती लोकप्रियता, महंगाई और उनकी नीतियों से लोगों की नाराजगी का संकेत दे रहे हैं.

Advertisement
ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को मिडटर्म चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. (File Photo) ट्रंप की पार्टी रिपब्लिकन को मिडटर्म चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:19 AM IST

अमेरिका का मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड के लिए लोकप्रियता का इम्तिहान बन गया है. उन्होंने लगातार अपने समर्थकों से अपील की कि वे ऐसे वोट करें, जैसे चुनाव में खुद ट्रंप मैदान में हों. अमेरिकी वोटरों ने उनकी इस अपील पर अमल तो किया, लेकिन नतीजे ट्रंप और उनकी रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदों के बिल्कुल उलट रहे. मंगलवार को आए चुनावी नतीजों में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई अहम राज्यों में बड़ी जीत दर्ज की. जॉर्जिया, टेक्सास, ओहायो, मिशिगन, नॉर्थ कैरोलाइना और न्यू हैम्पशायर जैसे राज्यों में रिपब्लिकन उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा.

Advertisement

इन नतीजों को ट्रंप की नीतियों और उनके नेतृत्व के खिलाफ जनता की नाराजगी के तौर पर देखा जा रहा है. चुनाव से पहले ही महंगाई, ईरान के साथ जंग और ट्रंप की गिरती लोकप्रियता रिपब्लिकन पार्टी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रही थीं. करीब 75 फीसदी मतदाता देश की मौजूदा दिशा से नाराज या असंतुष्ट हैं. वहीं, करीब 60 फीसदी लोगों ने ट्रंप के कामकाज पर असहमति जताई. डेमोक्रेट्स की इस जीत से अब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की उनकी उम्मीद भी मजबूत हुई है.

यह भी पढ़ें: US Midterm Election Results 2026 Live: सीनेट चुनाव में ट्रंप की पार्टी की करारी हार, विपक्षी डेमोक्रेट्स को मिला बहुमत

ट्रंप के खिलाफ वोटरों का गुस्सा, युवा और हिस्पैनिक भी छिटके

चुनाव के नतीजों से संकेत मिलता है कि राष्ट्रपति ट्रंप का चुनावी आधार कमजोर पड़ रहा है. 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप को समर्थन देने वाले युवा और हिस्पैनिक वोटरों का एक बड़ा हिस्सा इस बार डेमोक्रेट्स की तरफ जाता दिखाई दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, 30 साल से कम उम्र के मतदाताओं में करीब 70 फीसदी ने अपने इलाके में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार को वोट दिया. 2024 में इसी उम्र के वोटर ट्रंप और कमला हैरिस के बीच लगभग बराबर बंटे हुए थे.

Advertisement

हिस्पैनिक मतदाताओं में भी रिपब्लिकन पार्टी का समर्थन घटा है. करीब 60 फीसदी हिस्पैनिक वोटरों ने अपने इलाके में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार का समर्थन किया. वहीं, लगभग 70 फीसदी हिस्पैनिक मतदाताओं का मानना है कि ट्रंप की नीतियों से अमेरिका की आर्थिक स्थिति खराब हुई है. करीब 60 फीसदी वोटरों ने महंगाई के लिए ट्रंप प्रशासन की नीतियों को जिम्मेदार माना.

पोल में यह भी सामने आया कि जिन लोगों ने वोट देते समय ट्रंप को ध्यान में रखा, उनमें उनकी नीतियों का विरोध करने वालों की संख्या समर्थन करने वालों से करीब दोगुनी थी. लगभग 70 फीसदी मतदाता चाहते हैं कि कांग्रेस राष्ट्रपति की शक्तियों पर ज्यादा नियंत्रण रखे. करीब 60 फीसदी लोगों का मानना है कि ट्रंप देश के हितों से ज्यादा अपने निजी हितों को प्राथमिकता देते हैं.

जॉर्जिया से टेक्सास तक डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत

डेमोक्रेटिक पार्टी ने कई ऐसे राज्यों में जीत दर्ज की, जहां ट्रंप ने 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में बड़ी बढ़त हासिल की थी. जॉर्जिया, ओहायो और टेक्सास में डेमोक्रेट्स ने सीनेट और गवर्नर के चुनावों में जीत हासिल की. टेक्सास में ट्रंप ने 2024 में 14 फीसदी और ओहायो में 11 फीसदी अंकों की बढ़त से जीत दर्ज की थी.

जॉर्जिया में डेमोक्रेट कीशा लांस बॉटम्स राज्य की पहली अश्वेत महिला गवर्नर चुनी गईं. वहीं, सीनेटर जॉन ओसॉफ ने दोबारा चुनाव जीत लिया. नॉर्थ कैरोलाइना में पूर्व गवर्नर रॉय कूपर ने सीनेट का चुनाव जीता. न्यू हैम्पशायर में क्रिस पप्पास ने जीत दर्ज की. वह अमेरिकी सीनेट के पहले ओपन समलैंगिक सदस्य होंगे.

Advertisement

ओहायो में पूर्व सीनेटर शेरॉड ब्राउन ने रिपब्लिकन पार्टी की सीट छीन ली. वहीं, गवर्नर के चुनाव में एमी एक्टन ने ट्रंप के करीबी सहयोगी विवेक रामास्वामी को हरा दिया. टेक्सास में 37 साल के डेमोक्रेट नेता जेम्स तालारिको सीनेट के लिए चुने गए. वहीं, जीना हिनोजोसा ने तीन बार के गवर्नर ग्रेग एबॉट को हराकर राज्य की पहली लैटिना गवर्नर बनने का इतिहास रचा.

कंसास में भी डेमोक्रेट एडम हैमिल्टन ने रिपब्लिकन सीनेटर रोजर मार्शल को हरा दिया. वहीं, साउथ कैरोलाइना में ट्रंप की ओर से चुनी गई उम्मीदवार डार्लिन ग्राहम को डेमोक्रेट एनी एंड्रयूज ने शिकस्त दी. यह ट्रंप के लिए खास तौर पर बड़ा झटका माना जा रहा है.

कांग्रेस पर कब्जे की तैयारी में डेमोक्रेट्स

डेमोक्रेटिक पार्टी अब अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने की उम्मीद कर रही है. फिलहाल सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के पास 53 और डेमोक्रेट्स के पास 47 सीटें हैं. सीनेट पर कब्जे के लिए डेमोक्रेट्स को उन राज्यों में जीत दर्ज करनी होगी, जहां 2024 में ट्रंप ने जीत हासिल की थी.

वहीं, प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी के पास पहले से बेहद मामूली बहुमत है. मौजूदा सदन में रिपब्लिकन के पास 220 और डेमोक्रेट्स के पास 215 सीटें हैं. डेमोक्रेट्स 60 से ज्यादा सीटों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं. इनमें कई ऐसे इलाके भी हैं, जहां ट्रंप ने 2024 में दोहरे अंकों के अंतर से जीत हासिल की थी.

Advertisement

यह भी पढ़ें: मिड टर्म चुनाव में बुरी तरह पिछड़ने पर ट्रंप का पहला रिएक्शन, बोले-मैं मैदान में होता तो बड़े अंतर से जीतते

दूसरे विश्व युद्ध के बाद अब तक सिर्फ तीन बार ऐसा हुआ है, जब मिडटर्म चुनाव में हाउस और सीनेट दोनों का नियंत्रण एक पार्टी से दूसरी पार्टी के पास गया. ऐसा 1946, 1994 और 2006 में हुआ था. 2026 में डेमोक्रेट्स एक बार फिर ऐसा करने के करीब पहुंच गए हैं.

ट्रंप की चुनावी रणनीति भी पड़ती दिखी उलटी

ट्रंप ने पिछले साल टेक्सास में कांग्रेस की सीटों के चुनावी नक्शे यानी निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाएं बदलने की मुहिम शुरू की थी. इसका मकसद रिपब्लिकन पार्टी को ज्यादा सीटें दिलाना था. इसके जवाब में कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूजम ने भी अपने राज्य में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं बदलने की कोशिश की. इसके बाद कई रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक राज्यों में भी ऐसा हुआ.

कागजों पर ट्रंप समर्थित इस रणनीति से रिपब्लिकन पार्टी को नौ अतिरिक्त सीटों का फायदा मिलने का अनुमान था. लेकिन अब इसके उलट नतीजे सामने आते दिख रहे हैं. फ्लोरिडा में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने उन तीन सीटों पर जीत हासिल की, जिनकी सीमाएं रिपब्लिकन पार्टी ने अपने उम्मीदवारों को फायदा पहुंचाने के लिए बदली थीं. इनमें जेरेड मोस्कोविट्ज ने 25वें जिले, पिया दांडिया ने 22वें जिले और कैथी कास्टर ने 14वें जिले से जीत दर्ज की.

Advertisement

डेमोक्रेट्स की भी अपनी चुनौतियां

ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के खराब प्रदर्शन के बावजूद डेमोक्रेटिक पार्टी के सामने भी चुनौतियां हैं. AP के वोटर पोल के मुताबिक, करीब आधे अमेरिकी मतदाता डेमोक्रेटिक पार्टी को लेकर नकारात्मक राय रखते हैं. वहीं, रिपब्लिकन पार्टी को लेकर नकारात्मक राय रखने वालों की संख्या करीब 60 फीसदी है.

पार्टी के भीतर उदारवादी और प्रगतिशील धड़ों के बीच भी अपनी राजनीतिक दिशा को लेकर खींचतान जारी है. पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो और मैरीलैंड के गवर्नर वेस मूर ने दोबारा चुनाव जीतकर उदारवादी धड़े को मजबूती दी है. दोनों को 2028 के राष्ट्रपति चुनाव के संभावित दावेदारों में गिना जा रहा है.

अब इन नतीजों का असर 2028 के राष्ट्रपति चुनाव पर भी पड़ सकता है. ट्रंप के लिए यह संकेत है कि उनकी नीतियों, महंगाई और नेतृत्व को लेकर जनता में नाराजगी बढ़ रही है. वहीं, डेमोक्रेट्स के सामने इस बढ़त को बरकरार रखने और अपनी पार्टी की छवि सुधारने की चुनौती होगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »