अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के नतीजों में जीत दर्ज करने वालों में एक नाम अब्देल अल-सैयद का भी है. सैयद ने मिशिगन से अमेरिकी सीनेट का चुनाव जीत लिया है. वह डेमोक्रेटिक पार्टी के उभरते प्रोग्रेसिव नेता हैं और उनकी जीत राष्ट्रपति ट्रंप की ध्रुवीकरण की राजनीति पर करारी चोट है. उन्होंने अमेरिका का पहला मुस्लिम सीनेटर चुनकर इतिहास रच दिया है. वह जनवरी 2027 में पद संभालेंगे.
अब्दुल अल-सैयद ने जीत के बाद डेट्रॉयट में रैली को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप पर निशाना साधा. उन्होंने ट्रंप पर तंज कसते हुए कहा कि ट्रंप को उनका नाम बोलते समय काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है. लेकिन अब उनके नए नाम से ट्रंप को ज्यादा दिक्कत नहीं होगी. उन्होंने कहा कि डोनाल्ड, देखिए मैं जानता हूं कि आपको मैं नाम बोलते वक्त दिक्कत होती है. लेकिन जब जनवरी में जेडी वेंस मुझे शपथ दिलाएंगे तो आप मुझे सिर्फ सीनेटर कह सकते हैं.
बता दें कि रिपब्लिकन पार्टी के माइक रोजर्स को हराकर सैयद अमेरिकी सीनेट तक पहुंचने वाले पहले मुस्लिम सीनेटर चुने गए हैं. 42 साल के अब्देल अल सैयद पेशे से डॉक्टर हैं और पब्लिक हेल्थ एडमिनिस्ट्रेटर रहे हैं. उनका जन्म मिशिगन में हुआ था और उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे. उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से पढ़ाई की. इसके बाद रो़्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड से पब्लिक हेल्थ में डॉक्टरेट की और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री ली.
पॉलिटिक्स में आने से पहले उन्होंने डेट्रॉयट हेल्थ डिपार्टमेंट को शहर के वित्तीय संकट के बाद दोबारा खड़ा करने में काम किया. वह 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद के लिए भी डेमोक्रेटिक प्राइमरी लड़ चुके हैं, हालांकि तब हार गए थे.
अल सैयद को डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रोग्रेसिव विंग का नेता माना जाता है. उनके प्रमुख मुद्दों में मेडिकेयर फॉर ऑल यानी सबके लिए व्यापक स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना है. इसके अलावा राजनीति में कॉरपोरेट और बड़े पैसे के प्रभाव को कम करना. कामकाजी और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए बढ़ती लागत कम करना और आवास और स्वास्थ्य सेवाओं को ज्यादा सुलभ बनाना है.
वह इजरायल की गाजा नीति के मुखर आलोचक रहे हैं और उन्होंने इजरायली कार्रवाई को नरसंहार तक कहा है. वह इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता पर भी सवाल उठाते रहे हैं. इस वजह से उन्हें कुछ यहूदी संगठनों और राजनीतिक विरोधियों की आलोचना का सामना करना पड़ा, जबकि उनके समर्थक उन्हें डेमोक्रेटिक राजनीति में एक नई, मुखर प्रोग्रेसिव आवाज मानते हैं.
सैयद की जीत सिर्फ एक चुनावी जीत नहीं है. एक मिस्र-अमेरिकी मुस्लिम, डॉक्टर और प्रोग्रेसिव नेता का अमेरिकी सीनेट तक पहुंचना डेमोक्रेटिक पार्टी की बदलती राजनीति और अमेरिका में मुस्लिम प्रतिनिधित्व दोनों के लिहाज से बड़ी बात है.
मालूम हो कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निशाने पर सैयद लंबे समय से रहे है ट्रंप उन्हें कई मौकों पर जिहादी तक बोल चुके हैं. ट्रंप ने एक चुनावी रैली में कहा था कि सैयद को सीनेट जाने से पहले मेटल डिटेक्टर से गुजरना होगा और वह ऐसा करने वाले इकलौते सीनेटर होंगे.
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