अमेरिकी युद्धपोत इस समय ईरान की ओर बढ़ रहे हैं. वहीं, इजरायली लड़ाकू विमानों ने हमले की तैयारी के लिए अभ्यास भी कर लिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की एक परमाणु ठिकाने को भी संभावित निशाने के रूप में चिह्नित किाय है. वहां फिलहाल कड़ी सुरक्षा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर फिर से हमला करने की प्लानिंग कर ली है.
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिका में मध्यावधि चुनाव खत्म होने के बाद ट्रंप पर ईरान के खिलाफ एक और बड़ा हमला करने का दबाव बना रहे हैं. ऐसे में, पिछले आठ महीने से चल रहे इस युद्ध के और भयानक होने की आशंका है. दरअसल, मध्यावधि चुनाव खत्म होने के बाद ट्रंप ने संकेत दिया है कि उन्होंने ईरान पर फिर से हमला करने का ऑप्शन खुला रखा है. ऐसे में, अगर रिपोर्ट्स की मानें तो अमेरिकी और इजरायली सेनाएं हमला करने के काफी करीब थीं लेकिन ट्रंप ने इसे रोक दिया. वे नहीं चाहते थे कि मध्यावधि चुनाव के लिए मतदान से पहले तेल की कीमतों में उछाल आए.
अमेरिका में मध्यावधि चुनावों को देखते हुए ट्रंप ईरान पर हमला करने से परहेज कर रहे हैं. हालांकि, इजरायल हमले पर जोर दे रहा है. ऐसे में, आने वाले दिनों में अमेरिका ईरान पर एक और बड़ा हमला कर सकता है. आइए, आपको पांच ऐसे कारण बतातें हैं जिनसे ईरान पर हमले का संकेत मिलता है.
1. अमेरिका ने ईरान की ओर एयरक्राफ्ट कैरियर और 9,000 सैनिकों को भेजा
पेंटागन ने मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत किया है. उसने 'USS थियोडोर रूजवेल्ट' एयरक्राफ्ट कैरियर और मरीन सैनिकों को ले जाने वाले एम्फीबियस लैंडिंग जहाजों को फारस की खाड़ी की ओर रवाना कर दिया है.
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यूएस नेवल इंस्टीट्यूट (USNI) के मुताबिक, अमेरिकी विमानवाहक पोत 'थियोडोर रूजवेल्ट' 27 सितंबर को सैन डिएगो से रवाना हुआ था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस तैनाती में करीब 9 हजार सैन्यकर्मी शामिल हैं. एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस तैनाती के बाद इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी बढ़कर 20 हजार से ज्यादा नाविकों और मरीन सैनिकों तक पहुंच सकती हैं. इनके साथ सैकड़ों लड़ाकू और दूसरे सैन्य विमान भी तैनात होंगे.
अमेरिका की इतनी बड़ी सैन्य तैनाती से उसे ईरान के खिलाफ कार्रवाई करने के कई विकल्प मिल सकते हैं. अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमला करने का फैसला करते हैं, तो यह सैन्य ताकत उनके लिए काफी मददगार साबित हो सकती है.
2. इजरायल ने किया हमलों का अभ्यास
इजरायल पहले ही दिखा चुका है कि उसके विमान ईरान पर नए सिरे से हमले करने के लिए कैसे आगे बढ़ सकते हैं. 19 अक्टूबर को, इजरायल के दर्जनों लड़ाकू विमान और ईंधन भरने वाले विमान सीरिया और इराक के ऊपर से होते हुए ईरान की सीमा की ओर बढ़े थे. हालांकि, ईरानी हवाई क्षेत्र में घुसने से पहले ही वे वापस लौट आए.
'एक्सिओस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने पहले ही अमेरिका को इस बारे में बता दिया था. इजरायल ने इसे शक्ति प्रदर्शन बताया था. वहीं, कुछ अमेरिकी अधिकारियों को शक था कि इजरायल ईरान को उकसाकर कोई प्रतिक्रिया दिलाना चाहता है.
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, इन हमलों के संभावित निशानों में ईरान के परमाणु ठिकाने, ऊर्जा से जुड़े ढांचे, मिसाइल और ड्रोन के जखीरे शामिल थे. इन तैयारियों से पता चलता है कि ट्रंप की चेतावनियों के बावजूद, सैन्य योजना बनाने का काम आगे बढ़ चुका है.
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3. ट्रंप ने 'पिकएक्स माउंटेन' को एक लक्ष्य के रूप में चिह्नित किया
ट्रंप ने ईरान के एक खास ठिकाने का भी नाम लिया है, जिस पर हमला हो सकता है. 31 अक्टूबर को फ्लोरिडा में पत्रकारों से बात करते हुए, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास अभी भी परमाणु से जुड़े कुछ ऐसे लक्ष्य हैं, जिनसे निपटना बाकी है.
ट्रंप ने कहा, 'हमने उनके परमाणु (सिस्टम) को नष्ट कर दिया है. अभी भी एक या दो ऐसी जगहें हैं जिन्हें देखना बाकी है, लेकिन हम 10 मिनट में ऐसा कर सकते हैं.' उन्होंने खास तौर पर 'पिकएक्स माउंटेन' का जिक्र किया था. यह ईरान के नतान्ज परमाणु परिसर के पास एक भूमिगत सुविधा है.
सोमवार को, अमेरिकी कमेंटेटर टकर कार्लसन ने दावा किया कि नेतन्याहू, ट्रंप पर उस सुविधा के खिलाफ परमाणु हमले पर विचार करने के लिए दबाव बना रहे हैं. उन्होंने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'इस मामले में करीबी नजर रखने वालों का कहना है कि ट्रंप अगले वीकेंड तक यह तय कर सकते हैं कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करना है या नहीं.'
उन्होंने 7 नवंबर को फैसले की संभावित तारीख बताया है.
4. मध्यावधि चुनाव के बाद फैसला
आज अमेरिका के मध्यावधि चुनाव इस मामले में एक अहम मोड़ साबित हो सकते हैं. अक्टूबर की शुरुआत में, ट्रंप ने कहा था कि मध्यावधि चुनाव तक वह कोई हमला नहीं करेंगे. लेकिन चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई करने को लेकर उन्होंने कुछ नहीं कहा था. वहीं, इजरायल इस संबंध में जल्द फैसला लेने पर जोर दे रहा है. ऐसे में, मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर हमले को लेकर फैसला हो सकता है.
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5. अमेरिका ने खाड़ी सहयोगियों को ईरान के जवाबी हमले के लिए किया अलर्ट
पांचवां संकेत अमेरिका की ओर से मध्य पूर्व के देशों को दी गई चेतावनियों से मिलता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने क्षेत्र के अपने सहयोगी देशों को बताया था कि अमेरिका मध्यावधि चुनाव के बाद ईरान पर हमला कर सकता है. इसलिए उन्हें पहले से तैयार रहने की सलाह दी गई है. अमेरिका ने इन देशों को यह भी चेतावनी दी कि ईरान जवाबी कार्रवाई में उनके ऊर्जा ठिकानों और दूसरे जरूरी बुनियादी ढांचे पर हमला कर सकता है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का नया सैन्य अभियान कई दिनों तक चल सकता है. हालांकि, मध्य पूर्व के देशों को डर है कि ईरान के जवाबी हमलों से यह संघर्ष और लंबा खिंच सकता है.
वहीं, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उस पर दोबारा हमला हुआ तो वह पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी और इजरायली ठिकानों को निशाना बनाएगा. ईरान ने यूरेनियम संवर्धन का काम बंद करने से भी इनकार किया है. उसका कहना है कि परमाणु कार्यक्रम चलाना उसका अधिकार है. ईरान के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ईरान अपनी परमाणु नीति से पीछे नहीं हटेगा. हालांकि, कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं.
रविवार को दोहा में ईरानी प्रतिनिधियों और कतरी मध्यस्थों के बीत लगातार तीसरे दिन बातचीत हुई. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भी कहा है कि ईरान रक्षा और कूटनीति दोनों के लिए तैयार है.
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