वेस्ट एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग में एक बार फिर तेज हो गई है. अमेरिकी सेना ने बुधवार को ईरान पर बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं. ईरान के सरकारी टेलीविजन ने स्वास्थ्य मंत्री के हवाले से बताया कि अमेरिकी हमलों में अब तक 18 लोगों की मौत हुई है, जबकि 108 लोग घायल हुए हैं. अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास समेत कई इलाकों को निशाना बनाया.
अमेरिका ने ईरान के दो सरकारी तेल टैंकरों पर भी हमला किया है. Axios की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों टैंकर ईरानी तट के पास अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी रेखा के उत्तर में लंगर डाले हुए थे. अमेरिकी ड्रोन ने दोनों जहाजों के इंजन रूम को निशाना बनाकर मिसाइलें दागीं.
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह कार्रवाई 'टैंकर के बदले टैंकर' नीति के तहत की गई. अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया गया.
IRGC के करीब 100 ठिकाने निशाने पर
अमेरिकी हमलों में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े करीब 100 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है. इनमें एयर डिफेंस सेंटर, रडार सिस्टम, समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने से जुड़ी क्षमताएं, संचार सुविधाएं, पोत-रोधी क्रूज मिसाइल लॉन्चर और हमलावर ड्रोन लॉन्चर शामिल हैं.
ईरानी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक दक्षिणी ईरान के बंदर अब्बास, केश्म द्वीप, जास्क और सिरिक में कई जोरदार धमाके सुने गए. इसके अलावा दक्षिण-पूर्वी चाबहार और कोनारक इलाकों में भी प्रोजेक्टाइल गिरने की खबर है. ईरानी मीडिया ने IRGC के प्रवक्ता के हवाले से कहा कि अमेरिका को अपने नए हमलों पर पछताना पड़ेगा.
ईरान ने दागीं करीब 25 बैलिस्टिक मिसाइलें
अमेरिकी कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी पलटवार किया. अमेरिकी पक्ष के मुताबिक ईरान ने करीब 25 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें से लगभग आधी जॉर्डन के एयरस्पेस तक पहुंच सकीं. जॉर्डन ने 10 मिसाइलों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया, जबकि तीन मिसाइलें ऐसी जगह गिरीं जहां किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली.
इसके अलावा बहरीन, कुवैत और इराक के एरबिल में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर दो दर्जन से ज्यादा ड्रोन और मिसाइलें दागे जाने की बात सामने आई है. अमेरिकी पक्ष का दावा है कि इनमें से ज्यादातर को हवा में ही नष्ट कर दिया गया.
व्हाइट हाउस और अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों और समुद्री व्यापार की सुरक्षा के लिए जरूरी थी. अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि हमलों से ईरान की आक्रामक सैन्य क्षमता कमजोर हुई है और कमर्शियल जहाजों पर खतरा कम से कम एक महीने के लिए कम हो गया है.
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