अमेरिका के भारत में राजदूत सर्जियो गोर सोमवार को अचानक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक पहुंचे, जहां चीन और रूस के नेतृत्व वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के नेता भी जुटे थे. गोर ने कहा कि वह रिपब्लिकन सीनेटर स्टीव डेनिस के साथ वर्ल्ड नोमैड गेम्स में अमेरिकी दल का समर्थन करने के लिए बिश्केक पहुंचे हैं.
हालांकि, बिश्केक में गोर की मौजूदगी को सिर्फ संयोग मानना आसान नहीं है. भारत में अमेरिकी राजदूत होने के साथ-साथ गोर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के विशेष दूत भी हैं. ऐसे में मध्य एशिया के देशों में अमेरिकी हितों को आगे बढ़ाना उनके दायरे में आता है.
गोर ने किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान और ताजिकिस्तान के राष्ट्रपतियों के साथ बैठकें भी कीं. इससे संकेत मिलता है कि वर्ल्ड नोमैड गेम्स ने उस क्षेत्र में बिजनेस डिप्लोमेसी का मौका दिया, जो कभी रूस के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा था और अब वहां चीन का प्रभाव बढ़ रहा है.
सोशल मीडिया पोस्ट में दी जानकारी
बिश्केक पहुंचते ही गोर ने एक्स पर इसकी वजह बताते हुए लिखा कि वह सीनेटर स्टीव डेनिस के साथ वर्ल्ड नोमैड गेम्स के लिए किर्गिज गणराज्य पहुंचे हैं और अमेरिकी दल का समर्थन करने के लिए यहां मौजूद हैं. एक अन्य पोस्ट में उन्होंने अमेरिकी खिलाड़ियों का समर्थन करने की बात कही. डेनिस ने भी इसी तस्वीर को दोबारा पोस्ट करते हुए लिखा कि वह अमेरिकी राजदूत के साथ टीम USA का समर्थन कर रहे हैं.
छठे वर्ल्ड नोमैड गेम्स में घुड़सवारी, तीरंदाजी और कुश्ती जैसे पारंपरिक खेल शामिल हैं और इसमें 104 देशों के खिलाड़ी पहुंचे हैं. लेकिन इस बार इन खेलों का आयोजन सामान्य माहौल में नहीं हो रहा था. वर्ल्ड नोमैड गेम्स का उद्घाटन समारोह 31 अगस्त से शुरू हुए दो दिवसीय SCO शिखर सम्मेलन के साथ हुआ.
इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन, कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव और बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको समेत कई नेता शामिल हुए. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए, लेकिन तिब्बत में बाढ़ और भूस्खलन के कारण उद्घाटन समारोह से दूर रहे.
वर्ल्ड नोमैड गेम्स और SCO शिखर सम्मेलन ने कूटनीति के लिए एक-दूसरे से जुड़े मंच उपलब्ध कराए. इससे गोर और डेनिस को SCO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए बिना इस कूटनीतिक माहौल में मौजूद रहने का मौका मिला. अमेरिका इस राजनीतिक और आर्थिक समूह का सदस्य नहीं है, जिसे विशेषज्ञ अमेरिकी और पश्चिमी प्रभाव के प्रतिरोधी के तौर पर देखते हैं.
क्यों अहम है गोर की मौजूदगी?
गोर ने SCO की बैठकों में हिस्सा नहीं लिया, लेकिन जिस दिन रूस, चीन और ईरान समेत कई नेताओं की मौजूदगी थी, उसी दिन ट्रंप के करीबी सहयोगियों में शामिल गोर का बिश्केक पहुंचना चर्चा का विषय बना.
गोर सिर्फ भारत में अमेरिकी दूत नहीं हैं. ट्रंप ने उन्हें दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के लिए अमेरिकी विशेष दूत भी नियुक्त किया है. उनके दायरे में कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान के पांच मध्य एशियाई गणराज्य आते हैं. यह ट्रंप द्वारा बनाए गए नए विशेष दूत पद के तहत उनकी भूमिका है. इसलिए किर्गिस्तान उनकी आधिकारिक जिम्मेदारियों के दायरे में है.
सुशीम मुकुल