'मनमानी' रुकेगी, महाभियोग का भी खतरा… मिड टर्म चुनाव हारे तो फंस जाएंगे ट्रंप!

मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार ट्रंप के लिए कई राजनीतिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है. अगर डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल करती है तो उसे ट्रंप प्रशासन के फैसलों की जांच करने और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की ताकत मिलेगी.

Advertisement
मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी बड़ी परीक्षा है. (Photo: Reuters) मध्यावधि चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भी बड़ी परीक्षा है. (Photo: Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 04 नवंबर 2026,
  • अपडेटेड 7:23 AM IST

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़ी परीक्षा हैं. इन चुनावों में उनकी रिपब्लिकन पार्टी हारती है तो ट्रंप की कुर्सी नहीं जाएगी. लेकिन अगले दो साल उनके लिए मुश्किल हो सकते हैं. संसद में डेमोक्रेट्स का दबदबा बढ़ सकता है. इससे ट्रंप के फैसलों पर रोक लगाने की कोशिश होगी. उनके प्रशासन और कारोबारी हितों की जांच भी शुरू हो सकती है. यहां तक कि महाभियोग की प्रक्रिया का खतरा भी बढ़ सकता है. 

Advertisement

संसद में बढ़ेगी ट्रंप की मुश्किल

अमेरिका में मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति चुनाव के दो साल बाद होते हैं. इनमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की करीब एक तिहाई सीटों पर चुनाव होता है. इन नतीजों से तय होता है कि संसद के दोनों सदनों में किस पार्टी का बहुमत रहेगा.

अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा में बहुमत हासिल कर लेते हैं तो वे कई संसदीय समितियों का नियंत्रण संभाल लेंगे. इन समितियों के जरिए ट्रंप सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए जा सकेंगे. अधिकारी पूछताछ के लिए बुलाए जा सकेंगे. दस्तावेज मांगे जा सकेंगे. जरूरत पड़ने पर समन भी जारी किए जा सकेंगे.

इससे ट्रंप के लिए अपनी मर्जी से फैसले लेना आसान नहीं रहेगा. उन्हें संसद में विपक्ष के सवालों का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, राष्ट्रपति के पास अपने अधिकार बने रहेंगे. वे कई मामलों में कार्यकारी आदेश जारी कर सकते हैं. 

Advertisement

महाभियोग की तलवार भी लटक सकती है

डेमोक्रेट्स की जीत के बाद ट्रंप पर महाभियोग की कार्रवाई की चर्चा तेज हो सकती है. अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी प्रतिनिधि सभा को राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग चलाने का अधिकार है. इसके लिए साधारण बहुमत की जरूरत होती है.

लेकिन महाभियोग लगने का मतलब राष्ट्रपति को पद से हटाना नहीं है. इसके बाद सीनेट में सुनवाई होती है. राष्ट्रपति को दोषी ठहराने और पद से हटाने के लिए सीनेट में दो तिहाई वोट जरूरी हैं. इसलिए डेमोक्रेट्स की जीत के बाद महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, लेकिन ट्रंप का पद जाना तय नहीं होगा. 

ट्रंप के लिए ईरान के साथ जारी युद्ध भी बड़ी चुनौती बन सकता है. डेमोक्रेट्स युद्ध से जुड़े फैसलों और खर्च पर सवाल उठा सकते हैं. वे रक्षा बजट और सैन्य खर्च को लेकर सुनवाई कर सकते हैं. संसद में फंडिंग को लेकर टकराव भी बढ़ सकता है. 

अगर डेमोक्रेट्स को बहुमत मिलता है तो वे युद्ध के लिए अतिरिक्त फंड देने के फैसले को मुश्किल बना सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि चुनाव हारते ही युद्ध का पैसा अपने आप बंद हो जाएगा. विदेश नीति और सैन्य कार्रवाई से जुड़े कई अधिकार राष्ट्रपति के पास बने रहेंगे. 

Advertisement

एलन मस्क की कंपनियां भी जांच के घेरे में?

इस चुनाव का असर दुनिया के सबसे अमीर कारोबारी एलन मस्क पर भी पड़ सकता है. मीडिया मुताबिक, डेमोक्रेट्स की नजर ट्रंप से जुड़े कारोबार और सरकारी ठेकों पर है. इसमें मस्क की कंपनियां भी शामिल हो सकती हैं.

टेस्ला और स्पेसएक्स के सरकारी सौदों और नियामक मामलों की जांच की मांग उठ सकती है. ट्रंप सरकार में सरकारी खर्च घटाने वाली संस्था DOGE में मस्क की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ सकती है. हालांकि, अभी किसी जांच में मस्क की कंपनियों को दोषी नहीं ठहराया गया है. न ही जांच के लिए अंतिम लिस्ट तय हुई है. 


ट्रंप की विदेश नीति पर कितना असर पड़ेगा?

चुनाव में हारने के बाद भी ट्रंप टैरिफ, व्यापार और विदेश नीति से जुड़े फैसले ले सकेंगे. लेकिन घरेलू नीतियों और बजट से जुड़े बड़े फैसलों में उन्हें डेमोक्रेट्स का सामना करना पड़ सकता है. सीनेट में डेमोक्रेट्स का बहुमत हुआ तो ट्रंप के नए अधिकारियों और जजों की नियुक्तियों पर भी अड़चन आ सकती है. यानी मिडटर्म चुनाव में हार ट्रंप को राष्ट्रपति पद से नहीं हटाएगी. लेकिन संसद में विपक्ष मजबूत हुआ तो उनके लिए सरकार चलाना पहले से ज्यादा मुश्किल हो सकता है. 
 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »