फटने को तैयार 50 लाख क्यूबिक मीटर पानी! झील ओवरफ्लो, नेपाल के लिए डेंजर हैं अगले 72 घंटे

तिब्बत में हुए लैंडस्लाइड और भोटेकोशी नदी में आए बाढ़ के बाद नेपाल हाल के सबसे बड़े प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है. लेकिन खतरा अभी कायम ही है. चीन के जल मंत्रालय ने कहा है कि हिमालयी क्षेत्र में दो नदियों के संगम के पास एक एक झील बन गया है यहां पानी की इतनी मात्रा जमा हो रही है अगर ये फट जाए तो आने वाली तबाही और भी बड़ी होगी.

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आपदा के बाद तिब्बत के ग्यीरोंग एरिया की एरियल तस्वीर (Photo: AFP) आपदा के बाद तिब्बत के ग्यीरोंग एरिया की एरियल तस्वीर (Photo: AFP)

पंकज दास

  • काठमांडू,
  • 27 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:22 PM IST

नेपाल और चीन की सीमा पर बना संकट टला नहीं है. चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु सांगपो नदियों के संगम के पास एक बड़ा बैरियर लेक बन गया है. गुरुवार सुबह तक इसमें करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और झील पहले से ओवरफ्लो हो रही है. अगले तीन दिनों में और 30 लाख घन मीटर पानी आने का अनुमान है, जिससे झील के फटने का खतरा बहुत अधिक बना हुआ है. 

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यह स्थान नेपाल-चीन सीमा के पास चीन के केरूंग काउंटी में छोचेन नदी और पुरेपु छांग्पो नदी के संगम पर स्थित है. यह नेपाल के रसुवागढ़ी नाके से करीब 2.5 किलोमीटर दूर है. 

चीन का जल मंत्रालय झील में हो रहे बदलावों पर बारीकी से नजर रख रहा है और संभावित रूप से बांध टूटने की स्थिति से निपटने और आपातकालीन बचाव कार्यों में मदद के लिए बाढ़ से जुड़ी सिमुलेशन और विश्लेषण कर रहा है. 

अगर दुर्भाग्य से ये झील अचानक से फटती है तो इसके असर की सिर्फ कल्पना की जा सकती है. 

26 अगस्त को तिब्बत क्षेत्र में ग्लेशियर ढहने से ल्हेंडे नदी ब्लॉक हुई और उसके टूटने से सैलाब नीचे आया. इसकी वजह से तिब्बत का ग्यीरोंग पोर्ट लैंडस्लाइड और फ्लैश फ्लड की चपेट में आ गया. इसके बाद भयानक तबाही हुई. 

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फटने को तैयार है 50 लाख क्यूबिक मीटर पानी

ये झील नेपाल में छोचेन खोला (Chhochen Khola) और पुरेपु सांगपो (Purepu Tsangpo) नदियों के संगम के पास एक बैरियर लेक बन गया है. ये नदियां तिब्बत से निकलकर नेपाल में त्रिशुली/भोटेकोशी रिवर सिस्टम का हिस्सा बनती हैं. यह क्षेत्र चीन-नेपाल सीमा के नजदीक और ग्यीरोंग पोर्ट से ऊपर की तरफ है. 

यहां गुरुवार सुबह तक झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था.  झील पहले से ओवरफ्लो हो रही है. अगले 3 दिनों में और करीब 30 लाख घन मीटर पानी आने का अनुमान है. इस तरह यहां 50 लाख क्यूबिक मीटर पानी जमा हो जाने का अनुमान है. इससे प्राकृतिक बांध के फटने का उच्च जोखिम है. अगर ये नैचुरल बांध टूटा तो अचानक बाढ़ आ सकती है, जो नीचे की तरफ यानी कि ग्यीरोंग पोर्ट और नेपाल की ओर भयंकर तबाही ला सकती है.

चीन ने जारी किया अलर्ट

ग्लोबल टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इसी को लेकर एक ज़रूरी चेतावनी जारी की है और अलर्ट घोषित किया गया है. 

हाइड्रोजियोलॉजिस्ट का अनुमान है कि गुरुवार सुबह तक इस झील में पानी की मात्रा 2 मिलियन क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई थी, और अगले तीन दिनों में इस प्राकृतिक बांध में और 3 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी आने का अनुमान है.

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चाइना सेंट्रल टेलीविज़न ने बताया कि चीनी अधिकारी बाढ़ से जुड़ी रियल-टाइम सिमुलेशन कर रहे हैं ताकि आपातकालीन बचाव कार्यों में मदद मिल सके और नदी के बहाव की दिशा में (डाउनस्ट्रीम) झील के अचानक टूटने से होने वाले खतरों को कम किया जा सके. 

ग्यीरोंग टाउनशिप पहुंचे चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग 

इस बीच चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने गुरुवार को तिब्बत में नेपाल बॉर्डर पोस्ट के पास गिरोंग टाउनशिप का दौरा किया. यहां ज़बरदस्त बाढ़ के कारण भारी नुकसान हुआ था और 360 लोगों के लापता होने की खबर थी.

बुधवार सुबह तिब्बत ऑटोनॉमस रीजन की ग्यीरोंग टाउनशिप में अचानक बाढ़ आ गई थी. इस बाढ़ ने चीन-नेपाल बॉर्डर के पास के गांवों और कस्बों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे तिब्बत में तीन और नेपाल में अबतक कुल 332 लोगों की मौत हो गई, और सैकड़ों लोग लापता हो गए.

 

सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक ली ने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम के साथ आपदा प्रभावित इलाके का दौरा किया.

अधिकारी बचाव और राहत कार्यों की देखरेख करेंगे और आपदा से प्रभावित लोगों से मिलेंगे. 

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वेस्टर्न थिएटर कमांड का एक डायरेक्टिंग ग्रुप जो तिब्बत में भारत-चीन बॉर्डर की देखरेख करता है को गुरुवार को प्रभावित इलाके में भेजा गया. इसका मकसद ग्यीरोंग काउंटी में सेना के जवानों द्वारा किए जा रहे संयुक्त बचाव कार्यों में तालमेल बिठाना था. 

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इस हादसे में मरने वालों की संख्या 332 तक पहुंच चुकी है. जबकि 1500 लोग अब भी लापता है. 

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