अचानक पुतिन से मिलने पहुंचे ट्रंप के दूत, डीजल संकट या चुनाव की मजबूरी?

डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ यूक्रेन युद्ध खत्म करने के प्रस्तावों पर बातचीत के लिए पुतिन से मिलने रूस पहुंचे. अमेरिका में चुनाव, बढ़ते डीजल संकट और रूस से हुए समझौते के बीच इस अचानक दौरे के समय को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

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स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (Photo- Reuters) स्टीव विटकॉफ और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 2:56 PM IST

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ अचानक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने सेंट पीट्सबर्ग पहुंच गए हैं. उनकी इस यात्रा का मकसद यूक्रेन में जारी जंग खत्म करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाना और शांति समझौते का रास्ता तलाशना है. लेकिन इस मुलाकात के पीछे सिर्फ यूक्रेन युद्ध ही नहीं, बल्कि अमेरिका की घरेलू राजनीति और बढ़ती ईंधन कीमतों का दबाव भी चर्चा में है.

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स्टीव विटकॉफ ऐसे वक्त में रूस पहुंचे हैं, जब अमेरिका में 3 नवंबर को मिडटर्म चुनाव होने वाले हैं. डीजल की बढ़ती कीमतें अमेरिकी सरकार के लिए चुनौती बनी हुई हैं. इसी महीने ट्रंप ने पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस से डीजल की सप्लाई को लेकर समझौते का ऐलान किया था. ऐसे में पुतिन के साथ उनकी बातचीत को यूक्रेन युद्ध खत्म करने की कोशिशों के साथ-साथ ऊर्जा संकट और अमेरिका की राजनीतिक परिस्थितियों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि विटकॉफ की यात्रा सिर्फ डीजल संकट या चुनाव की वजह से हो रही है.

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पहले जेलेंस्की से मिले, अब पुतिन के सामने रखेंगे प्रस्ताव

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स्टीव विटकॉफ की रूस यात्रा से एक दिन पहले मंगलवार को नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत हुई थी. इस बैठक में यूक्रेन और उसके यूरोपीय सहयोगियों के साथ शांति प्रस्तावों पर चर्चा की गई. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, बातचीत में सार्थक प्रगति हुई और यूक्रेन ने कई नए विचार तथा प्रस्ताव रखे, जिन पर विस्तार से चर्चा की गई.

अमेरिकी पक्ष ने कहा कि दोनों देशों के बीच आगे की रणनीति को लेकर सहमति बनी है. बातचीत में यूक्रेन की सुरक्षा की लंबे समय तक गारंटी, युद्ध के बाद देश की अर्थव्यवस्था को फिर से खड़ा करने की योजना और यूरोप की व्यापक सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे शामिल थे. अब विटकॉफ इन चर्चाओं के नतीजे रूस के सामने रखेंगे. रूस की सरकारी समाचार एजेंसी TASS के मुताबिक, पुतिन और विटकॉफ की मुलाकात बुधवार को दिन के पहले हिस्से में तय थी. सेंट पीट्सबर्ग के पुलकोवो एयरपोर्ट पर क्रेमलिन के दूत किरिल दिमित्रिएव ने विटकॉफ का स्वागत किया.

डीजल संकट और मिडटर्म चुनाव का दबाव

अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतें ट्रंप प्रशासन के लिए एक अहम घरेलू मुद्दा बन गई हैं. 9 अक्टूबर को ट्रंप ने रूस से डीजल की सप्लाई को लेकर समझौते का ऐलान किया था. इस कदम का मकसद ईंधन की कीमतों पर दबाव कम करना बताया गया. यह फैसला रूस के खिलाफ अमेरिकी प्रतिबंधों की पुरानी नीति से भी एक बड़ा बदलाव है.

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3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की कीमतों और महंगाई का मुद्दा अमेरिकी मतदाताओं के लिए अहम है. ऐसे में ट्रंप प्रशासन पर आर्थिक दबाव कम करने की जरूरत भी है. हालांकि, रूस से डीजल की सप्लाई का समझौता कीमतों को कितनी राहत देगा, इसे लेकर सवाल बने हुए हैं.

इस बीच, ट्रंप और जेलेंस्की के रिश्तों में भी तनाव रहा है. ट्रंप ने यूक्रेन पर रूस के साथ समझौता करने के लिए दबाव बनाया है. वहीं, जेलेंस्की का कहना है कि किसी भी समझौते में यूक्रेन की सुरक्षा और भविष्य की गारंटी से समझौता नहीं किया जा सकता.

ऐसे माहौल में विटकॉफ की मॉस्को यात्रा अहम हो जाती है. एक तरफ अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए प्रस्तावों पर बातचीत आगे बढ़ाना चाहता है, तो दूसरी तरफ उसे ऊर्जा कीमतों और घरेलू राजनीतिक दबाव का भी सामना करना पड़ रहा है. अब सबकी नजर पुतिन के रुख पर है और इस बात पर कि क्या यह बातचीत यूक्रेन युद्ध को रोकने की दिशा में कोई ठोस रास्ता खोल पाएगी.

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शांति समझौते में सबसे बड़ी अड़चन क्या है?

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यूक्रेन और उसके सहयोगियों का कहना है कि किसी भी शांति समझौते में यूक्रेन की सुरक्षा की गारंटी जरूरी है, ताकि रूस भविष्य में दोबारा हमला न कर सके. यूक्रेन ने अपने क्षेत्र का हिस्सा रूस को सौंपने की मांग भी खारिज की है.

दूसरी तरफ, रूस चाहता है कि यूक्रेन पूर्वी डोनबास क्षेत्र का पूरा इलाका उसे सौंप दे. इस क्षेत्र का बड़ा हिस्सा फिलहाल रूस के नियंत्रण में है. मॉस्को ने यूक्रेन की सेना का आकार काफी कम करने और नाटो में शामिल नहीं होने की प्रतिबद्धता देने की मांग भी की है.

इन मांगों के बीच शांति समझौते की राह आसान नहीं है. विटकॉफ की कोशिश होगी कि ओस्लो में हुई बातचीत के आधार पर रूस के साथ आगे की चर्चा का रास्ता खुले. लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि पुतिन यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी और क्षेत्रीय अखंडता से जुड़ी मांगों पर क्या रुख अपनाएंगे.

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