सिंगापुर सरकार ने नेपाल-तिब्बत में आई बाढ़ और सिंगापुर एयरलाइंस (SIA) के एयर इंडिया में निवेश को लेकर ऑनलाइन भारतीयों को निशाना बनाने वाली नस्लीय और विदेशी-विरोधी टिप्पणियों के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया है. सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग और गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने चेतावनी दी कि ऐसी बयानबाजी को अनदेखा करने से नस्लीय पूर्वाग्रह सामान्य हो सकता है और देश की मल्टी-रेसियल एकता को खतरा हो सकता है.
प्रधानमंत्री वोंग ने रविवार, 6 सितंबर को कहा कि सिंगापुर को 'किसी भी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह को स्वीकार या सामान्य नहीं होने देना चाहिए.' उन्होंने कहा कि दोनों मुद्दों पर ऑनलाइन चर्चाओं ने एक बदसूरत रूप ले लिया था. वोंग की यह टिप्पणी गृह मंत्री षणमुगम के बयान के एक दिन बाद आई. भारतीय मूल के षणमुगम ने कहा था कि पुलिस शर्मनाक, घटिया और पूरी तरह अस्वीकार्य नस्लीय और विदेशी-विरोधी टिप्पणियों की जांच कर रही है.
इन बयानों के पीछे 26 अगस्त को नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद ऑनलाइन की गई टिप्पणियां थीं. इस बाढ़ में नौ सिंगापुरी नागरिक लापता हुए थे. इसके अलावा एयर इंडिया की ओर से अपने शेयरधारकों से करीब 1.5 अरब डॉलर जुटाने की खबरों के बाद भी भारतीयों के खिलाफ ऑनलाइन टिप्पणियां की गईं. SIA एयर इंडिया के शेयरधारकों में शामिल है.
षणमुगम ने लापता सिंगापुरी नागरिकों को लेकर की गई कई ऑनलाइन टिप्पणियों के उदाहरण दिए. इनमें 'No they are not our own' जैसी टिप्पणियां शामिल थीं. कुछ टिप्पणियों में यह भी कहा गया कि प्रभावित लोग भारतीय जैसे दिखते हैं, इसलिए बचाव प्रयासों को रोक देना चाहिए. उन्होंने बताया कि एक टिप्पणी में ABNN' शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जो भारतीयों के लिए अपमानजनक शब्द है.
किसी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह को सामान्य नहीं होने देना चाहिए
प्रधानमंत्री वोंग ने कहा कि सिंगापुर में मजबूत बहस हो सकती है, लेकिन किसी समुदाय के खिलाफ पूर्वाग्रह या विदेशियों के प्रति दुश्मनी को बढ़ावा देने के लिए वैध तर्कों की आड़ नहीं ली जानी चाहिए.उन्होंने कहा कि नस्लीय टिप्पणियां नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद लापता नौ सिंगापुरी नागरिकों को लेकर हुई चर्चाओं में सामने आईं. वहीं, SIA के एयर इंडिया में निवेश को लेकर उठे सवालों के साथ भारतीय विरोधी टिप्पणियां भी की गईं.
वोंग ने कहा कि ऐसे विचार पूरे सिंगापुर का प्रतिनिधित्व नहीं करते, लेकिन उन्हें केवल ऑनलाइन की सामान्य बातचीत मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसे व्यवहार को रोका नहीं गया तो यह सामान्य हो सकता है, समुदायों के बीच अविश्वास बढ़ सकता है और समाज में विभाजन पैदा हो सकता है.
भारतीय मूल के गृह मंत्री ने जांच के आदेश दिए
गृह मामलों के मंत्री के. षणमुगम ने 5 सितंबर को कहा कि उन्होंने पुलिस से इन पोस्ट की जांच करने को कहा है. डिजिटल डेवलपमेंट एंड इंफॉर्मेशन मंत्रालय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उन टिप्पणियों को हटाने के लिए भी कहेगा, जो उनके नियमों का उल्लंघन करती हैं. नेपाल में आई बाढ़ में एक हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी और नौ सिंगापुरी नागरिकों का पता नहीं चल पाया था. सिंगापुर की आबादी 60 लाख से ज्यादा है. इसमें करीब 75 फीसदी चीनी मूल के लोग, 15 फीसदी मलय और करीब 9 फीसदी भारतीय हैं, जबकि बाकी अन्य समुदायों से हैं.
एयर इंडिया में SIA के निवेश को लेकर भी ऑनलाइन भारतीयों के खिलाफ टिप्पणियां सामने आईं. षणमुगम ने इसे "भारतीय विरोधी, नस्लीय बयानबाजी" बताया. उन्होंने कहा कि ऑनलाइन पोस्ट में 'सांप, करी, प्राटा, काला जादू' और अन्य नस्लीय रूढ़ियों का इस्तेमाल किया गया. इसका निशाना SIA की बहुमत हिस्सेदारी रखने वाली टेमासेक और उसके CEO दिलहान पिल्लै संद्रसेगरा भी बने. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि भारतीय मूल के पिल्लै अपनी पृष्ठभूमि के कारण एयर इंडिया का पक्ष लेंगे. षणमुगम ने इसे नस्लीय और मानहानिकारक तर्क बताया और कहा कि पिल्लै "हममें से किसी भी व्यक्ति की तरह सिंगापुरी हैं."
उन्होंने चेतावनी दी कि अगर लोगों पर उनके जातीय मूल के आधार पर कारोबारी या सरकारी फैसलों को लेकर हमला करने की अनुमति दी गई तो भविष्य में हर व्यक्ति को उसकी जातीयता के आधार पर निशाना बनाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें ऑनलाइन गुमनामी के पीछे छिपने नहीं दिया जाना चाहिए.
सिंगापुर के मीडिया ने भी ऐसी टिप्पणियों को रोकने के लिए कदम उठाए हैं. CNA की सोशल मीडिया मॉडरेशन नीति नफरत फैलाने वाली, नस्लीय या आपत्तिजनक टिप्पणियां करने वाले यूजर्स को ब्लॉक करती है. ब्रॉडकास्टर ने कई टिप्पणियां हटाई हैं और नेपाल आपदा से जुड़ी कुछ पोस्ट पर आपत्तिजनक सामग्री की संख्या और लगातार जारी रहने के कारण कमेंट की सुविधा भी बंद कर दी.
सिंगापुर में भारतीयों के खिलाफ नस्लीय हमले पहले भी हुए
सिंगापुर के पूर्व प्रधानमंत्री ली सियन लूंग ने कहा कि नस्लीय नफरत की घटनाएं सामने आने पर सिंगापुर के नेताओं को "पूरी ताकत और दृढ़ विश्वास" के साथ बोलना चाहिए.ली ने रविवार को फेसबुक पोस्ट में 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीयों के खिलाफ इसी तरह की भावनाओं को याद किया. उन्होंने कहा कि वायरस को लेकर पैदा हुआ डर भारतीयों के प्रति दुश्मनी में बदल गया था. उन्होंने 2025 के आम चुनाव का भी जिक्र किया, जब वोंग को मुस्लिम मतदाताओं को सरकार के खिलाफ प्रभावित करने के लिए धर्म के इस्तेमाल की कोशिशों का सामना करना पड़ा था.
उन्होंने सिंगापुर के लोगों से नफरत को खारिज करने और नेपाल आपदा के पीड़ितों के लिए शोक मनाने वालों के साथ खड़े होने की अपील की, चाहे उनका धर्म, भाषा या नस्ल कुछ भी हो.
aajtak.in