हूतियों से मार खा रहा सऊदी, अमेरिका नहीं आया बचाने, 'मक्का पैक्ट' वाले पाकिस्तान ने भी दे दी गोली

शहबाज शरीफ ने मोहम्मद बिन सलमान से बात कर हूती हमलों की निंदा दोहराई और सऊदी अरब के साथ एकजुटता जताई. यह बातचीत तब हुई जब यमन में लड़ाई तेज है, ट्रंप ने सीधी अमेरिकी सैन्य मदद से इनकार किया है और मक्का पैक्ट के बावजूद पाकिस्तान की सैन्य भूमिका पर सवाल बने हुए हैं.

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सऊदी-पाकिस्तान ने मक्का में रक्षा समझौता किया था. (Photo- Reuters) सऊदी-पाकिस्तान ने मक्का में रक्षा समझौता किया था. (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 14 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 11:26 AM IST

यमन में हूती हमलों के बीच सऊदी अरब की मुश्किलें बढ़ गई हैं. एक तरफ हूती लगातार सऊदी के नागरिक और आर्थिक ठिकानों को निशाना बना रहे हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका ने हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य कार्रवाई से इनकार कर दिया है. ऐसे में सऊदी के साथ 'मक्का डिफेंस पैक्ट' करने वाला पाकिस्तान भी सैन्य मोर्चे पर पीछे हटता दिख रहा है. हालांकि, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने रविवार को सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात कर रियाद के साथ पूरी एकजुटता जताई है.

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शहबाज शरीफ ने हूती हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि पाकिस्तान सऊदी नेतृत्व और वहां की जनता के साथ पूरी तरह खड़ा है. उन्होंने कहा कि हूती हमले क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इससे ग्लोबल इकॉनमी और एनर्जी सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है.

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'मक्का पैक्ट' पर पाकिस्तान ने साफ की तस्वीर

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट में कहा गया है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला बाकी दोनों पर हमला माना जाएगा. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पिछले हफ्ते कहा था कि अगर यमन की जंग सऊदी तक पहुंचती है तो यह समझौता लागू हो सकता है. लेकिन बाद में इस्लामाबाद ने साफ किया कि यह समझौता मुख्य रूप से रक्षात्मक है और इससे पाकिस्तान अपने सैनिकों को हूतियों के खिलाफ आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए भेजने के लिए अपने आप बाध्य नहीं होता.

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यमन में बढ़ी जंग, सऊदी की चिंता बढ़ी

यमन में ईरान समर्थित हूती और सऊदी समर्थित सरकारी बलों के बीच जंग तेज हो गई है. हूतियों ने हाल में अहम रेड सी पोर्ट मोखा और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक द्वीप पर कब्जा किया है. रविवार को सऊदी समर्थित सरकारी बलों ने मोखा, धुबाब और ताइज प्रांत के दूसरे इलाकों में हूती ठिकानों पर हमले किए, जबकि हूतियों ने सऊदी की तरफ फायरिंग की.

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सितंबर की शुरुआत से अब तक 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित होने की बात सामने आई है. 2022 में संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता में हुई ट्रूस के बाद यह सबसे बड़ी जंग बताई जा रही है.

अमेरिका ने भी नहीं थामा सऊदी का हाथ

बाब-अल-मंदेब पर बढ़ते खतरे के बीच सऊदी ने अमेरिका से भी मदद मांगी है. लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों के खिलाफ सीधे अमेरिकी सैन्य एक्शन से इनकार कर दिया है. ऐसे में सऊदी को अपने सुरक्षा साझेदारों की मदद को लेकर नई चिंता का सामना करना पड़ रहा है. इसी बीच शहबाज शरीफ की 23 सितंबर को न्यूयॉर्क में ट्रंप से मुलाकात प्रस्तावित है. ऐसे में यमन संकट के बीच पाकिस्तान को अमेरिका और सऊदी अरब, दोनों के साथ अपने रिश्तों का संतुलन साधना होगा.

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