रूसी तेल पर यूक्रेनी पत्रकार का सवाल, जयशंकर का जवाब- किसी के खरीदने, न खरीदने से जंग नहीं रुकेगी

2022 में यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय रिफाइनरों ने कच्चे तेल के लिए रूस की ओर रुख किया. रूस भारत को कच्चे तेल पर डिस्काउंट दे रहा था. इसका फायदा भारत ने उठाया और भारत को अपने ऑयल बिल को कंट्रोल करने में मदद मिली.

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विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यूक्रेन युद्ध को खत्म करवाने के लिए हर मदद करने को तैयार है. (Photo:X/@DrSJaishankar) विदेश मंत्री ने कहा कि भारत यूक्रेन युद्ध को खत्म करवाने के लिए हर मदद करने को तैयार है. (Photo:X/@DrSJaishankar)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 10:17 PM IST

यूक्रेन यात्रा पर राजधानी कीव पहुंचे भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस से कच्चे तेल की खरीद पर भारत के रुख को एक बार फिर से स्पष्ट किया है. राजधानी कीव में एक यूक्रेनी पत्रकार के सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध का मसला इसलिए नहीं सॉल्व होगा कि कोई तेल, मिनरल या मेटल खरीद रहा है या नहीं. यह विवाद बातचीत और कूटनीति के जरिए ही हल होगा. 

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दरअसल कीव में यूक्रेन के एक पत्रकार ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा कि क्या भारत रूस से कच्चा तेल खरीदता रहेगा? 

इस सवाल का जवाब विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने ही अंदाज में दिया. उन्होंने कहा, "आपके सवाल की वजह मैं समझ सकता हूं, लेकिन मैं समझता हूं आपलोग भी 1 अरब 40 करोड़ लोगों को एनर्जी मुहैया कराने की चुनौतियों को समझें. वो भी ऐसे समय में जब दुनिया एनर्जी सेक्टर की स्थिति काफी मुश्किल बनी हुई है."

आगे उन्होंने भारत के पक्ष को रखते हुए कहा, "मैं कहूंगा कि ये एक ऐसी चीज है जहां यूक्रेन का भी अपना पक्ष है, जिसका हम आदर करते हैं, लेकिन यहां हमारा भी एक नजरिया है और मैं उम्मीद करता हूं कि दूसरे लोग भी इसका सम्मान करेंगे. लेकिन मुझे एक चीज जोड़ने दीजिए वो ये कि ये लड़ाई जो आज अपने पांचवें साल में है, सिर्फ़ इसलिए खत्म नहीं हो जाएगी कि कोई तेल, एल्युमिना, मिनरल, मेटल या फ़र्टिलाइज़र खरीद रहा है या नहीं. यह टकराव बातचीत, कूटनीति और मोल-भाव से ही हल होगा. इसीलिए हम ऐसी कोशिशों को बढ़ावा देंगे."

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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को कीव में अपने यूक्रेनी समकक्ष आंद्री सिबिहा के साथ व्यापक बातचीत के दौरान कहा कि भारत यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म करने के लिए "किसी भी तरह से कोई भी मदद" करने को तैयार है. 

सिबिहा के साथ बातचीत के बाद एक संयुक्त प्रेस बयान में उन्होंने कहा, "भारत का हमेशा से यह मानना ​​रहा है कि यह युद्ध का दौर नहीं है और समाधान युद्ध के मैदान से नहीं निकलेंगे."

जयशंकर ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सिर्फ़ दो दिन पहले ही शंघाई सहयोग संगठन शिखर सम्मेलन के दौरान बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ बैठक में कहा था कि अंतहीन युद्ध की जगह अब युद्ध को खत्म करने की कोशिश होनी चाहिए.

उन्होंने कहा, "संघर्ष के हर बीतते दिन का मतलब है और अधिक मौतें और और अधिक तबाही. जाहिर है रास्ता खोजने की ज़िम्मेदारी इसमें शामिल पक्षों की है. लेकिन अगर भारत किसी भी तरह से मदद कर सकता है, तो हम तैयार हैं."

बता दें कि भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के ज़रिए रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म करने की अपील करता रहा है.

उन्होंने आगे कहा, "युद्ध खत्म करने की प्रधानमंत्री मोदी की अपील के अनुरूप मेरी यात्रा बातचीत और कूटनीति की संभावनाओं पर केंद्रित है. मैं आज यूक्रेनी पक्ष द्वारा साझा किए गए विचारों और रुख को अपने साथ ले जाऊंगा."

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बाद में जयशंकर ने राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की से मुलाकात की और उन्हें द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर अपने यूक्रेनी समकक्ष के साथ हुई बातचीत के बारे में जानकारी दी.

मंत्री ने कहा, "हमारी बातचीत चल रहे संघर्ष को खत्म करने के तरीकों पर केंद्रित थी." उन्होंने पहले ही कहा था कि वह राष्ट्रपति तक पीएम मोदी की शुभकामनाएं और बधाई पहुंचाएंगे. 

भारत का अहम क्रूड सप्लायर है रूस

बता दें कि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल आयातक है और अपनी जरूरत का करीब 90% क्रूड विदेशों से खरीदता है. रूस पिछले कुछ वर्षों में भारत का सबसे अहम तेल सप्लायर बन गया है. 2022 में यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बाद रूसी तेल पर छूट मिलने लगी.  भारतीय रिफाइनरों ने इस सस्ते क्रूड का फायदा उठाते हुए रूस से खरीद तेजी से बढ़ाई. 

जुलाई 2026 में रूस से भारत का तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था. रूस से आने वाला क्रूड भारत के कुल तेल आयात का 50.83%, यानी करीब 24.7 लाख बैरल प्रतिदिन था. अप्रैल-जुलाई के दौरान भी रूस की औसत हिस्सेदारी करीब 43.25% रही. 

भारत के लिए रूसी तेल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे देश की रिफाइनरियों को कम कीमत पर क्रूड मिलता है और महंगे आयात बिल को कंट्रोल करने में मदद मिलती है. लेकिन इसके लिए भारत को अमेरिका समेत यूरोपीय देशों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है. अमेरिका और यूरोप का कहना है कि भारत रूस का कच्चा तेल खरीदकर उसके वॉर मशीन की फंडिंग कर रहा है.  

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