सऊदी अरब के आसमान में जासूस सैटेलाइट, फिर सटीक हमले, क्या रूस ने हूतियों को मदद की?

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच जंग को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. एक निजी फर्म ने आसमान में रूसी सैटेलाइट की स्थिति का आकलन कर दावा किया है कि रूसी उपग्रहों ने सऊदी अरब के अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों की सटीक लोकेशन ईरान को दी. इसके बाद ईरान ने इस लोकेशन को अपने सहयोगियों के साथ शेयर किया. इसी को आधार बनाकर सऊदी अरब पर हमला किया गया.

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रूस के सैटेलाइट सऊदी अरब के ऊपर देखे गए हैं.  (Photo: ITG) रूस के सैटेलाइट सऊदी अरब के ऊपर देखे गए हैं. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 10:59 PM IST

सऊदी अरब के तेल ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के पीछे रूस की खुफिया मदद होने का आरोप लगा है. इस खुलासे से अंतर्राष्ट्रीय राजनयिक और कूटनीतिक हलकों में तहलका मचा दिया है. एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक रूसी सरकारी और सैन्य जासूसी सैटेलाइट ने ईरान समर्थित हूतियों और क्षेत्र में सक्रिय अन्य मिलिशिया को सऊदी अरब के अहम ठिकानों की जानकारी जुटाने में मदद की. एक निजी जिओ स्टेशनरी खुफिया कंपनी के विश्लेषण में दावा किया गया है कि सऊदी अरब पर हुए 40 मिसाइल और ड्रोन हमलों से पहले और बाद में संबंधित इलाकों के ऊपर रूसी सैटेलाइट की गतिविधियां देखी गईं.

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पिछले महीने ईरान समर्थित मिलिशिया ने एक सटीक हमला किया, जिसमें सऊदी अरब की सबसे महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन के पंपिंग स्टेशन को निशाना बनाया गया. इसके कुछ दिनों बाद सऊदी अरब के एक सैन्य एयर बेस पर एक और हमला हुआ, जिसमें हैंगर के अंदर खड़ा एक इतालवी लड़ाकू विमान क्षतिग्रस्त हो गया.

ये हमले सटीक थे और कामयाब भी रहे. इसके पीछे आसमान में चल रही एक गतिविधि का बड़ा हाथ था. दावा किया गया है कि हमले से कई दिन पहले रूस के कई जासूसी उपग्रहों ने खुफिया जानकारी जुटाने के लिए पाइपलाइन और एयर बेस के ऊपर अपना डेरा जमा लिया था. 

सऊदी के आसमान में क्या कर रहे थे रूसी सैटेलाइट

एक निजी जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस फर्म ने बताया कि उसने 1 जुलाई से 19 अक्टूबर के बीच यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों और इराक में मिलिशिया समूहों द्वारा सऊदी अरब पर किए गए 40 मिसाइल और ड्रोन हमलों की जांच की. हर मामले में फर्म ने एक जैसा पैटर्न पाया: हमलों से कई दिन पहले और बाद तक, उन इलाकों के ऊपर रूसी सरकार और सेना के सैटेलाइट चक्कर लगा रहे थे.

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जिनेवा स्थित 'ऑरोरा जियोसिग्नल इंटेलिजेंस'के संस्थापक नवाफ ओबैद ने दावा किया, "हमें जो मिला है वह सैटेलाइट गतिविधियों और हमलों के बीच 100 प्रतिशत मेल खाता है."

ये नतीजे बताते हैं कि माना जा रहा है कि रूस, ईरान और क्षेत्र में उसके सहयोगियों की मदद कर रहा है ताकि वे सऊदी अरब के तेल और सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बना सकें. इन हमलों के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ गई हैं. 

गौरतलब है कि ये जियोस्पेशियल इंटेलिजेंस फर्म का दावा है.

ईरान को मिला रूस और चीन की तकनीक का फायदा

तीन अधिकारियों, जिनमें सऊदी अरब का एक अधिकारी और हूती गुट का एक शीर्ष अधिकारी शामिल है और एक निजी खुफिया विश्लेषक ने 'द बताया कि हूतियों और ईरान के अन्य सहयोगियों को रूस की खुफिया जानकारी और चीन की क्षमताओं से फायदा मिला है.  एपी की रिपोर्ट के अनुसार ईरान के सलाहकारों ने मौके पर ही खुफिया जानकारी का विश्लेषण किया और उसे अपने सहयोगियों तक पहुंचाया.

सऊदी विदेश मंत्रालय में पब्लिक डिप्लोमेसी के उप-मंत्री, रायेद क्रिमली ने पिछले हफ्ते पत्रकारों को बताया कि ईरान और हूतियों को "रूस और चीन के कुछ तत्वों" से खुफिया जानकारी मिलती है, जिनमें कभी-कभी कमर्शियल तत्व भी शामिल होते हैं.

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उन्होंने कहा, "हम चीन और रूस के साथ इन मुद्दों पर नियमित रूप से चर्चा करते हैं, और आगे भी ऐसा करना जारी रखेंगे."

इन आरोपों के बारे में पूछे जाने पर रूसी अधिकारियों की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई.

रूस और ईरान के बीच लंबे समय से सैन्य सहयोग है, जिसमें ड्रोन तकनीक का हस्तांतरण भी शामिल है. हालांकि रूस इस क्षेत्र के युद्धों में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहा है, लेकिन अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों का कहना है कि रूस ने ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा की है. 

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