'रवैया सुधारो, कहीं और से तेल खरीदो', US सांसद की भारत-चीन को धमकाने की कोशिश

अमेरिकी सांसद रिचर्ड ब्लूमेंथल ने भारत और चीन से रूस से तेल और गैस खरीद बंद करने को कहा, ठीक उस वक्त जब हाउस ने ऐसा बिल पास किया जो ट्रंप को अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है. इससे भारत पर तुरंत 100% टैरिफ नहीं लगेगा, लेकिन कानून की शर्तों के तहत कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है.

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अमेरिकी संसद ने 100% टैरिफ वाला एक बिल पास किया है. (Photo- @SenBlumenthal) अमेरिकी संसद ने 100% टैरिफ वाला एक बिल पास किया है. (Photo- @SenBlumenthal)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 17 सितंबर 2026,
  • अपडेटेड 1:22 PM IST

अमेरिका में रूस से तेल और गैस खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बढ़ता दिख रहा है. अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने बुधवार को भारत और चीन को रूस से तेल और गैस खरीदना बंद करने की चेतावनी दी. उनका यह बयान अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े बिल के पास होने के बाद आया.

ब्लूमेंथल ने भारत और चीन को संबोधित करते हुए कहा, "आपको अपना रवैया सुधारना होगा. अपना तेल और गैस कहीं और से खरीदिए. खुश करने की नीति कोई रणनीति नहीं है."

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दरअसल, अमेरिकी हाउस ने बुधवार को 'लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' को मंजूरी दी है. बिल के पक्ष में 262 वोट पड़े, जबकि 159 सांसदों ने इसका विरोध किया. इससे पहले पिछले महीने अमेरिकी सीनेट में भी यह बिल 86-11 के वोट से पास हो चुका है. अब यह बिल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास जाएगा.

भारत पर क्या असर पड़ेगा?

इस बिल का मतलब यह नहीं है कि भारत के सामान पर सीधे 100 फीसदी टैरिफ लग जाएगा. बिल ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले पांच सबसे बड़े देशों पर उनकी खरीद से जुड़ी तय शर्तों के तहत 100 फीसदी तक अतिरिक्त टैरिफ लगाने का अधिकार देता है.

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भारत और चीन के अलावा अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया जैसे देश भी इसकी चपेट में आ सकते हैं. इस कानून का मकसद रूस की तेल और गैस से होने वाली कमाई को कम करना है. अमेरिका का कहना है कि इस कमाई से रूस को यूक्रेन में जंग जारी रखने में मदद मिलती है.

बिल में रूस के अधिकारियों, वित्तीय संस्थानों और कथित 'शैडो फ्लीट' पर भी कार्रवाई का प्रावधान है. शैडो फ्लीट उन जहाजों का नेटवर्क है, जिस पर रूस के मौजूदा प्रतिबंधों से बचने में मदद करने का आरोप है. इसके अलावा ईरान के एनर्जी और हथियार सेक्टर पर प्रतिबंधों को पांच साल तक बढ़ाने का भी प्रावधान है.

यह भी पढ़ें: 'ऊर्जा सुरक्षा से कोई समझौता नहीं', अमेरिकी 100% टैरिफ बिल पर भारत का दो टूक जवाब

अमेरिकी सांसदों ने भारत-चीन को घेरा

डेमोक्रेट सीनेटर जीन शहीन ने भी रूस से एनर्जी खरीदने वाले देशों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि रूस शैडो फ्लीट के जरिए तेल और गैस बेच रहा है और यह खरीद चीन और भारत जैसे देशों को हो रही है.

शहीन ने कहा कि चीन रूस के तेल और गैस का सबसे बड़ा खरीदार है और अमेरिका को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ-साथ रूस से तेल खरीदने वाले देशों को भी कड़ा संदेश देना चाहिए. बिल के समर्थकों का कहना है कि ऐसे टैरिफ से देशों पर रूस से एनर्जी खरीद कम करने का दबाव बढ़ेगा और मॉस्को की कमाई पर असर पड़ेगा. उधर भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि एनर्जी खरीद देश का अपना विषय है.

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