'जंग के कूटनीतिक फायदों से पेट नहीं भरता', सिंगापुरी नेता ने पाकिस्तान को किया एक्सपोज

ईरान-अमेरिका वार्ता में भूमिका निभाने के बाद पाकिस्तान अपनी कूटनीतिक सफलता का दावा कर रहा है. लेकिन सिंगापुर के पूर्व राजनयिक ने कहा कि डिप्लोमेसी से देश नहीं चलता. उन्होंने पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली, राजनीतिक नेतृत्व और सेना को उसकी सबसे बड़ी समस्या बताया.

Advertisement
 सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलाहारी कौसिकन, PAK पीएम शहबाज शरीफ. (Photo- ITG) सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलाहारी कौसिकन, PAK पीएम शहबाज शरीफ. (Photo- ITG)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 जुलाई 2026,
  • अपडेटेड 6:24 PM IST

ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत में अहम भूमिका निभाने के बाद पाकिस्तान खुद को बड़ी कूटनीतिक सफलता के तौर पर पेश कर रहा है. लेकिन सिंगापुर के पूर्व राजनयिक बिलाहारी कौसिकन ने पाकिस्तान की इस सफलता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है. उन्होंने साफ कहा कि "डिप्लोमैटिक कामयाबी से पाकिस्तान की जनता का पेट नहीं भरता."

एक वैश्विक सम्मेलन में बोलते हुए कौसिकन ने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान संकट के दौरान कूटनीतिक मौके का अच्छा फायदा उठाया और इससे अमेरिका की नजर में उसकी छवि कुछ हद तक सुधरी है. लेकिन उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान की असली समस्याएं खत्म नहीं हो जातीं.

Advertisement

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान पर भारत-जापान की डबल अटैक डिप्लोमेसी, आतंकवाद पर लगाम लगाए PAK

पूर्व राजनयिक ने पाकिस्तान को "नाकामी की कगार पर खड़ा देश" बताते हुए कहा कि उसकी सबसे बड़ी परेशानी भारत या अफगानिस्तान नहीं, बल्कि उसके अपने राजनेता और सेना हैं. उनके मुताबिक, पाकिस्तान की बदहाली के लिए उसकी गलत नीतियां और वर्षों का खराब शासन जिम्मेदार है.

पाकिस्तान के सभी राजनेता समय की बर्बादी!

कौसिकन ने कहा, "हर बात के लिए भौगोलिक स्थिति को दोष नहीं दिया जा सकता. यह सिर्फ एक बहाना है." उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान शुरू से ही बेहद खराब तरीके से चलाया गया है और फिलहाल उन्हें इससे निकलने का कोई रास्ता नजर नहीं आता.

सिंगापुरी पूर्व राजनयिक ने पाकिस्तान के राजनीतिक नेतृत्व पर भी तीखा हमला बोला. उनका कहना था कि "पाकिस्तान के सभी राजनेता समय की बर्बादी हैं, चाहे वे किसी भी पार्टी से हों. वहीं सेना भी इस समस्या का बड़ा हिस्सा है."

Advertisement

पूर्व राजनयिक ने यह भी कहा कि हाल की कूटनीतिक सफलता के बावजूद अमेरिका पाकिस्तान पर लगे सभी प्रतिबंध हटाने वाला नहीं है. उनके मुताबिक, वॉशिंगटन और इस्लामाबाद के रिश्तों में कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन इससे दोनों देशों के संबंध पूरी तरह सामान्य नहीं हो जाएंगे.

यह भी पढ़ें: पाकिस्तान में भीषण सड़क हादसा, खाई में गिरी ओवरलोडेड बस; 40 यात्रियों की मौत

वर्ल्ड बैंक और IMF के पैसे पर निर्भर पाकिस्तान

पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और कर्ज चुकाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसे संस्थानों की मदद पर काफी हद तक निर्भर है. वहीं, रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान दुनिया के उन देशों में शामिल है जहां खाद्य संकट तेजी से बढ़ रहा है.

ऐसे में बिलाहारी कौसिकन का कहना है कि सिर्फ विदेश नीति में मिली सफलता से पाकिस्तान की तस्वीर नहीं बदलेगी. जब तक देश के भीतर आर्थिक हालात, राजनीतिक व्यवस्था और शासन में सुधार नहीं होगा, तब तक कोई भी कूटनीतिक उपलब्धि आम लोगों की जिंदगी में बड़ा बदलाव नहीं ला पाएगी.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »