तिब्बत में विनाशकारी बाढ़ के बीच क्या छुपा रहा चीन? कई सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट

नेपाल की फ्लैश फ्लड का असर तिब्बत तक पहुंचा. ग्यिरोंग से तबाही के कुछ स्थानीय वीडियो हटाए जाने के दावों के बाद चीन की सूचना व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं, जबकि सरकारी मीडिया रेस्क्यू अभियान को प्रमुखता दे रहा है.

Advertisement
शी जिनपिंग सरकार पर तिब्बत के वीडियो हटाने का आरोप. (File Photo) शी जिनपिंग सरकार पर तिब्बत के वीडियो हटाने का आरोप. (File Photo)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 30 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 9:18 AM IST

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े इलाके में तबाही मचा दी. गांव डूब गए, सड़कें बह गईं, पुल टूट गए. इस आपदा का असर नेपाल-तिब्बत सीमा के दोनों तरफ देखा गया. लेकिन चीन की तरफ से सामने आई तस्वीरों को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं. दावा है कि तिब्बत के स्थानीय लोगों ने बाढ़ की तबाही दिखाने वाले कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर डाले, जिन्हें बाद में हटा दिया गया. दूसरी तरफ चीन की सरकारी मीडिया में राहत और बचाव अभियान की तस्वीरें लगातार दिखाई गईं.

Advertisement

नेपाल और चीन के बीच ग्यिरोंग एक अहम सीमा मार्ग है. यहीं से बाढ़ की तबाही का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया था. इसमें पहाड़ से मिट्टी, पत्थर और पानी का तेज बहाव बॉर्डर इलाके की तरफ आता दिखाई दे रहा था.

द न्यूयॉर्क टाइम्स की 27 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो चीनी सोशल मीडिया पर कुछ समय तक मौजूद रहा. इसके बाद इसे हटा दिया गया. इस रिपोर्ट ने चीन में आपदा से जुड़ी जानकारी कितनी खुलकर सामने आ रही है, इस पर सवाल खड़े कर दिए.

ग्यिरोंग चीन-नेपाल के बीच अहम सीमा मार्ग है. यहां तबाही का असर कितना बड़ा था, इसे लेकर भी पूरी तस्वीर साफ नहीं हो पाई है. चीन के अधिकारियों ने गुरुवार सुबह तक ग्यिरोंग में 558 लोगों के लापता होने की बात कही थी. उस समय तीन मौतों की पुष्टि हुई थी.

Advertisement

चीन में दिखती रही रेस्क्यू की तस्वीरें

स्थानीय लोगों की ओर से सामने आई तस्वीरों की जगह चीन की सरकारी मीडिया शिन्हुआ ने बचाव अभियान पर ज्यादा जोर दिया. शिन्हुआ ने बताया कि सैकड़ों बचावकर्मियों को प्रभावित इलाके में भेजा गया है. इसमें सैन्यकर्मी, आपातकालीन दल, हेलिकॉप्टर तथा दूसरे उपकरण शामिल हैं. वहीं, चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली ने भी राहत अभियान की खबरों को प्रमुखता दी. उसकी रिपोर्ट में शी जिनपिंग के अधिकारियों को हर संभव कोशिश के साथ लोगों को बचाने के निर्देश का जिक्र किया गया.

यही अंतर सवाल खड़ा करता है. नेपाल में पत्रकारों और स्थानीय लोगों से सामने आई तस्वीरें लगातार साझा हो रही थीं, जबकि चीन की तरफ से ज्यादातर जानकारी सरकारी मीडिया के जरिए सामने आई.

सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के दावे पर क्या कहा गया?

इंटेलिजेंस एक्सपर्ट और जियोपॉलिटिकल एनालिस्ट आदिल बरार ने X पर दावा किया कि चीन की तरफ से आई आपदा की तस्वीरें थोड़ी देर ऑनलाइन रहीं, फिर हटा दी गईं. उनका कहना था कि नेपाल की तरफ से सामने आए वीडियो बड़े स्तर पर उपलब्ध रहे, जबकि तिब्बत की तरफ के कुछ वीडियो गायब हो गए. वहीं, रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेल्लानी (Brahma Chellaney) ने X पर चीन पर आपदा से जुड़ी जानकारी को नियंत्रित करने का आरोप लगाया. उन्होंने चिंता जताई कि अगर जमीन पर मौजूद लोगों की जानकारी सामने नहीं आएगी, तो संकट के समय हालात की सही तस्वीर समझना मुश्किल हो सकता है. जबकि, द भूटनीज के संपादक टेनजिंग लैमसांग (Tenzing Lamsang) ने भी ग्यिरोंग में हुई तबाही के स्तर और चीन की ओर से बताए गए शुरुआती मौतों के आंकड़े के बीच अंतर पर सवाल उठाए.

Advertisement

हालांकि, इन सभी दावों को आरोप के तौर पर ही समझना चाहिए. उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना अभी संभव नहीं है कि चीन ने आपदा की पूरी जानकारी जानबूझकर छिपाई.

नेपाल में तबाही का पैमाना कितना बड़ा है?

नेपाल में हालात बेहद गंभीर रहे. रॉयटर्स के मुताबिक 29 अगस्त तक देश में 675 लोगों की मौत हो चुकी थी, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग लापता थे. फ्लैश फ्लड ने सड़कें, पुल, बस्तियां और हाइड्रोपावर से जुड़ा ढांचा तक प्रभावित किया. कई इलाकों में राहत और खोज अभियान अभी भी चुनौती बना हुआ है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई बाढ़ के बाद 275 से ज्यादा भारतीय अब भी लापता हैं, जबकि 108 भारतीय नागरिकों को बचा लिया गया है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में 598 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं. करीब 900 भारतीय अभी चीन की तरफ मौजूद हैं. ये सभी सुरक्षित हैं और उनसे संपर्क किया जा सकता है.

क्या चीन की वजह से आई फ्लैश फ्लड?

यह सवाल अलग है और इसे सोशल मीडिया पोस्ट हटने के दावों से जोड़कर देखना ठीक नहीं होगा. अभी ऐसा कोई पुख्ता सबूत सामने नहीं आया है, जिससे यह कहा जा सके कि चीन के किसी बांध, परियोजना या दूसरे ढांचे की वजह से नेपाल में फ्लैश फ्लड आई. चीनी दूतावास ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि चीन की तरफ कोई बांध टूटा था. चीन की ओर से यह कहा गया कि आपदा की शुरुआत नेपाल की तरफ हुई प्राकृतिक घटना से हुई.

Advertisement

चीनी राजदूत झांग माओमिंग (Zhang Maoming) ने नेपाल के सरकारी चैनल NTV World से बातचीत में कहा कि शुरुआती जानकारी के मुताबिक नेपाल की तरफ भूकंप के बाद बर्फ का बड़ा हिस्सा टूटा. इसके बाद हिमस्खलन तथा मलबे के तेज बहाव से बाढ़ आई. चीन ने यह भी कहा कि वह नेपाल के साथ राहत और बचाव के काम में सहयोग कर रहा है.

सवाल बाढ़ से ज्यादा अब जानकारी पर

एक बात साफ है. बाढ़ की वजह को लेकर अभी चीन के किसी ढांचे को जिम्मेदार ठहराने का आधार नहीं है. लेकिन तिब्बत की तरफ से सामने आई जानकारी को लेकर सवाल जरूर उठ रहे हैं. जब किसी आपदा में सैकड़ों लोग लापता हों, तब जमीन पर मौजूद लोगों की तस्वीरें और वीडियो बेहद अहम होते हैं. वे परिवारों, बचाव दलों तथा दुनिया को यह समझने में मदद कर सकते हैं कि कहां कितना नुकसान हुआ है.

यही वजह है कि ग्यिरोंग के वीडियो हटाए जाने के दावों ने चीन की सूचना व्यवस्था पर बहस छेड़ दी है. एक तरफ सरकारी रेस्क्यू फुटेज दिखाई दे रहा है, दूसरी तरफ स्थानीय लोगों की कुछ पोस्ट गायब होने की बात कही जा रही है. अब सवाल यही है कि तिब्बत की तरफ हुई पूरी तबाही की तस्वीर दुनिया तक कितनी पहुंच पाती है.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement
Latest News in Hindi »