नेपाल बाढ़ में 133 भारतीय टूरिस्ट लापता, कैलाश यात्रा पर थे ज्यादातर लोग

नेपाल के रसुवा में भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ में 400 से ज्यादा पर्यटक और ट्रेकर्स लापता हो गए हैं. इनमें 133 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं. नेपाल सेना, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां राहत और बचाव कार्यों में जुटी हैं. प्रभावित क्षेत्रों में 15 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं और मेडिकल सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है.

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नेपाल में आई बाढ़ में कई देशों के नागरिक लापता हैं. (Photo- AP/PTI) नेपाल में आई बाढ़ में कई देशों के नागरिक लापता हैं. (Photo- AP/PTI)

आशुतोष मिश्रा / पंकज दास / मंजीत नेगी

  • नई दिल्ली,
  • 26 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 6:41 PM IST

नेपाल के रसुवा की सुबह भोटेकोशी नदी में अचानक आई बाढ़ की वजह से तबाही मच गई है. इस त्रासदी में 133 भारतीय पर्यटक और 400 से ज्यादा यात्री और ट्रेकर्स लापता हो गए हैं. इसमें से ज्यादातर कैलाश मानसरोवर जा रहे थे.

बाढ़ सुबह 8:30-9:15 बजे के आसपास आई, जिससे नेपाल-चीन मितेरी पुल बह गया और तीर्थयात्रा मार्ग पर संपर्क टूट गया. इस तबाही में 40 किलोमीटर तक की सड़क और 19 पुल तबाह हो गए हैं.

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नेपाल सेना, स्पेशल ऑपरेशन्स टीम और मेडिकल टीम बड़े पैमाने पर स्थानीय लोगों और पर्यटकों को निकालने में जुटे हैं. नेपाल सेना ने बताया कि राहत और बचाव कार्यों के लिए फिलहाल भारत से किसी मदद की मांग नहीं की गई है.

ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स और अमेरिका के नागरिक भी लापता

विदेशी पर्यटकों में भारत के अलावा ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड्स, अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के नागरिक भी शामिल हैं. हालांकि कई अन्य विदेशी पर्यटकों की राष्ट्रीयता की पुष्टि होना अभी बाकी है, जिससे लापता भारतीय नागरिकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है.

घटना के बाद नेपाल पर्यटन बोर्ड, टूरिस्ट पुलिस, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां मिलकर बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. नेपाल प्रशासन और ट्रैवल एजेंसियां लापता यात्रियों की डिटेल्स जुटाने और उनकी सही लोकेशन का पता लगाने में जुटी हैं.

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रेस्क्यू के लिए हेलीकॉप्टर तैनात

नेपाल सेना ने जानकारी दी है कि सबसे ज्यादा प्रभावित बुसी और तुसु से अब तक 20 लोगों को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया है. नेपाल सेना के प्रवक्ता के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए 15 हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं. इनमें से 7 हेलीकॉप्टर नेपाली सेना के हैं, जबकि बाकी हेलीकॉप्टर सशस्त्र पुलिस बल और निजी ऑपरेटरों के हैं.

इसके अलावा, मछली ट्रेनिंग कैंप में एक विशेष मेडिकल सेंटर स्थापित किया गया है, जहां घायल लोगों का इलाज किया जा रहा है. काठमांडू से भी रसुवा के लिए अतिरिक्त सैन्य और मेडिकल टीमें भेजी गई हैं.

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33 सुरक्षाकर्मी भी लापता

33 सुरक्षाकर्मी भी लापताबाढ़ के कारण हुए नुकसान और घायलों का सटीक आंकड़ा जुटाया जा रहा है. इससे पहले 55 शव बरामद किए जाने और 33 सुरक्षाकर्मियों के लापता होने की खबर सामने आई थी. सेना और स्थानीय प्रशासन लगातार दूरदराज के इलाकों से जानकारी जुटाने और फंसे लोगों को निकालने में लगे हैं.

बता दें कि विदेश मंत्रालय ने जून-अगस्त 2026 तक लिपुलेख दर्रा (उत्तराखंड) और नाथू ला (सिक्किम) के जरिए 50 तीर्थयात्रियों में से हर के 10 बैचों की यात्रा तय कार्यक्रम के मुताबिक जारी की है. ये रास्ते नेपाल से होकर नहीं जाते.

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सबसे सस्ता और सबसे पॉपुलर निजी मार्ग रसुवागढ़ी-केरुंग मार्ग पूरी तरह से बंद है. मितेरी पुल ढह गया, रसुवा में सड़कें खत्म हो गईं, और फाइबर/मोबाइल नेटवर्क बंद हो गए. नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार, 400 से ज्यादा तीर्थयात्री (133 से ज्यादा भारतीयों सहित) जो आज सीमा पार करने के लिए आए थे, संपर्क से बाहर हैं.

प्रभावित मार्ग रसुवागढ़ी के जरिए तिब्बत के लिए नेपाल का सबसे पुराना व्यापार और तीर्थयात्रा मार्ग है. बाढ़ के कारण नेपाल-चीन को जोड़ने वाला मितेरी पुल बह गया है. त्रिशूली पर 6 से ज्यादा पुल चरमरा गए. चितवन-पोखरा जाने वाले पृथ्वी राजमार्ग को बंद कर दिया गया. रसुवा में फाइबर और मोबाइल नेटवर्क भी बंद है.

एसोसिएशन ऑफ नेपाल (TAAN) ने नेपाल के विदेश मंत्रालय और चीनी दूतावास से तीर्थयात्रियों के लिए वैकल्पिक क्रॉसिंग तातोपानी, कोरोला, हिल्सा खोलने और वीजा मंजूरी को सरल बनाने की अपील की है.

इस साल, 5 साल के अंतराल के बाद यात्रा फिर से शुरू होने पर नेपाल को कैलाश मानसरोवर के लिए कम से कम 25,000 भारतीय तीर्थयात्रियों की मेजबानी करने की उम्मीद थी. लिपुलेख और नाथू ला के रास्ते विदेश मंत्रालय की आधिकारिक यात्रा प्रभावित नहीं हुई है, लेकिन नेपाल के रास्ते बड़ा निजी-ऑपरेटर मार्ग फिलहाल रुका हुआ है

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