रैपर, मेयर और अब पीएम... कैसे बालेन शाह नेपाल में सत्ता की सीढ़ियां चढ़ते चले गए

नेपाल में जेन-ज़ी विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला देशव्यापी चुनाव हो रहा है. करीब 1.9 करोड़ मतदाता वोट डाल रहे हैं. इस चुनाव में पुराने प्रधानमंत्रियों के साथ रैपर और काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह युवाओं के समर्थन से मजबूत चुनौती दे रहे हैं.

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नेपाल के 6 पूर्व प्रधानमंत्रियों को पीछे छोड़ पीएम बनने की राह पर हैं बालेन शाह (Photo: PTI) नेपाल के 6 पूर्व प्रधानमंत्रियों को पीछे छोड़ पीएम बनने की राह पर हैं बालेन शाह (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 06 मार्च 2026,
  • अपडेटेड 7:06 AM IST

भारत के पड़ोसी देश नेपाल में आज वोटिंग हो रही है और दावेदारों की लिस्ट जितनी अलग-अलग है, उतनी ही दिलचस्प भी है. इस मुकाबले में आधा दर्जन पुराने प्रधानमंत्री और एक रैपर भी हैं. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि नेपाल की राजशाही को लेकर भी चर्चा तेज़ हो गई है. यह आम चुनाव सितंबर 2025 में Gen Z विरोध प्रदर्शनों के बाद पहला देशव्यापी चुनाव है, जिसने प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार गिरा दी थी. 

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इस चुनाव की सबसे दिलचस्प बात यह है कि पुराने रैपर और काठमांडू के पुराने मेयर, बालेन शाह, उर्फ ​​"बालेन", पुराने नेताओं का सामना कैसे कर रहे हैं.

आज, जब 1.9 करोड़ वोटर, जिनमें करीब आठ लाख पहली बार वोट देने वाले (Gen Z) शामिल हैं, पोलिंग बूथ पर जा रहे हैं, तो दुनिया देखेगी कि Gen Z विरोध प्रदर्शनों के कारण पहली सरकार के हटने के बाद राजनीतिक माहौल कैसा बनता है. Gen Z पीढ़ी पर भी नज़र रखी जाएगी कि वे कैसे वोट करते हैं.

(Photo: AP)

कैसे सत्ता की सीढ़ी चढ़ते चले गए बालेन?

नेपाल के Gen Z प्रोटेस्ट के बाद ही यह पीढ़ी राजनीति से जुड़ी, जिसे वैसे बहुत अलग-थलग और गैर-राजनीतिक माना जाता था. Gen Z को जो चीज़ पसंद आ रही है, वह पुराने लोग और राजशाही नेता नहीं, बल्कि एक 35 साल का रैपर और नेपाल की राजधानी के पूर्व मेयर बलेन शाह हैं.

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पांच बार के PM शेर बहादुर देउबा की लीडरशिप वाली नेपाली कांग्रेस और ओली की कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ नेपाल (यूनिफाइड मार्क्सिस्ट-लेनिनिस्ट) जैसी पारंपरिक ताकतवर पार्टियों को नए लोगों से कड़ी चुनौती मिल रही है. गौर करने वाली बात यह है कि बालेन शाह युवाओं के बीच नाराज़गी की लहर पर सवार होकर मशहूर हुए थे.

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बड़े प्रोटेस्ट के बाद बदलाव की आहट

छह महीने पहले Gen Z प्रोटेस्ट से पहले, नेपाल में समाज में भ्रष्टाचार और असमानता को लेकर एक अंदरूनी निराशा थी, जो थोड़े वक्त के लिए सोशल मीडिया बैन को लेकर एक आंदोलन में बदल गई. झड़पों में 70 से ज़्यादा लोग मारे गए. अब, लगता है कि बदलाव आने वाला है.

1768 में पृथ्वी नारायण शाह द्वारा इसके एकीकरण से लेकर 28 मई, 2008 को राजशाही के खत्म होने तक नेपाल में 240 साल तक शाह वंश के राजाओं का राज रहा. 2008 से एक फेडरल डेमोक्रेटिक रिपब्लिक के तौर पर, इस पर 18 साल तक प्रधानमंत्रियों का राज रहा है. लेकिन पुराने लोग अब तेज़ी से बदलते समाज से जुड़ते नहीं दिखते.

चुने हुए प्रतिनिधियों से भी निराशा है, जो स्थिरता देने में नाकाम रहे हैं. राजशाही खत्म होने के बाद नेपाल ने सिर्फ़ 17 सालों में 13 अलग-अलग सरकारें देखी हैं.

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कौन हैं बालेन शाह?

बालेन शाह काठमांडू के मेयर हैं. बालेन नेपाल में युवाओं के बीच खास तौर से लोकप्रिय हैं. यही वजह है कि वो किसी भी अन्य मेयर से अलग हैं. जहां ज्यादातर मेयर अपनी नगरपालिकाओं से आगे शायद ही कभी ध्यान दे पाते हैं, वहीं यह शख्स नेपाल के इस बड़े आंदोलन के केंद्र में आ खड़ा हुआ है.

नेपाल न्यूज के मुताबिक,  बालेन के कद और प्रभाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टाइम मैगजीन ने उन्हें 2023 की अपनी शीर्ष 100 शख्सियतों की सूची में शामिल किया था.  द न्यू यॉर्क टाइम्स जैसे विश्व-प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों ने भी उन्हें कवर किया है.

युवाओं के बीच उनके बड़े पैमाने पर फॉलोअर्स हैं. अक्सर सोशल मीडिया पर उनके पोस्ट राष्ट्रीय स्तर पर बहस छेड़ देते हैं और तेजी से ट्रेंड करने लगते हैं. उनका जीवन शैली, रहन-सहन, स्टाइल सबकुछ वहां के युवाओं के लिए एक रोल मॉडल की तरह है. यही वजह है कि इस बड़े आंदोलन को बालेन ने बड़ी आसानी से अपना समर्थन देकर हाईजैक कर लिया.  

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