नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाते हुए कई जिंदगियां छीन लीं. रसुवा क्षेत्र की भोटेकोशी नदी में आए उफान से हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. इस आपदा में अब तक 160 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं.
हादसे की भयावहता बयां करते हुए केशव प्रसाद बराल नाम के एक आदमी ने बताया कि बाढ़ का पानी उनके घर की ऊपरी मंजिल तक पहुंच गया था. रॉयटर्स के अनुसार, केशव ने कहा कि इस भीषण आपदा में उनकी पत्नी पहले ही मलबे में दब गई थीं, जबकि उनकी जान 5 घंटे बाद बचाई जा सकी.
केशव ने कहा, 'मेरी पत्नी मलबे में दब गई थीं, जबकि हम जान बचाने के लिए छत पर थे. करीब 4 से 5 घंटे के बाद मुझे हेलीकॉप्टर के जरिए रेस्क्यू किया गया.'
वहीं, 11 साल की रिहाना लामिछाने, जो स्कूल से लौट रही थी, उसने कहा कि मेरे दोस्त कहां गए पता नहीं. मैं तो स्कूल से लौटते हुए नदी पार कर रही थी, तभी अचानक से बाढ़ का पानी आ गया.
रिहाना ने बताया कि वह स्कूल में थी, लेकिन बाढ़ के खतरे के चलते स्कूल बंद कर दिया गया. इसके बाद बच्चों को घर जाने के लिए कहा गया.
उसने बताया, 'मैं नदी पार कर रही थी, तभी अचानक बाढ़ का पानी तेजी से आ गया.' हादसे में उसकी छाती और पैर में चोट आई है. रिहाना ने बताया कि वह सुरक्षित होने से खुश तो है, लेकिन उसे नहीं पता कि उसके दोस्तों के साथ क्या हुआ.
इस बीच, नेपाल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया है कि इस आपदा में 484 पर्यटक लापता हो गए, जिनमें से 391 विदेशी और 93 नेपाल के नागरिक थे.
US जियोलॉजिकल सर्वे के अनुसार, नेपाल में यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए एक जबरदस्त भूस्खलन के बाद आई, जिससे 5.2 तीव्रता वाले भूकंप के बराबर सीस्मिस सिग्नल पैदा हुए.
माना जा रहा है कि इस भूस्खलन में ग्लेशियर का एक हिस्सा ढह गया था, जिससे भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और पानी भोटेकोशी नदी की सहायक नदी 'ल्हेन्डे खोला' में बह गया.
नेपाल के पर्यटन मंत्रालय ने जानकारी दी कि लापता विदेशी यात्रियों में 100 से अधिक भारतीय, तीन अमेरिकी नागरिक और 12 ब्रिटिश नागरिक शामिल हैं.
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