बांग्लादेश के राष्ट्रपति बने BNP के फखरुल इस्लाम, कभी भारत में ली थी शरण

बांग्लादेश के नए राष्ट्रपति का ऐलान हो गया है. BNP के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर विपक्षी उम्मीदवार ओली अहमद को हराकर नए राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने कभी भारत में शरण ली थी. यहां तक कि उनकी पत्नी का भी भारत से खास कनेक्शन है. यहां हम आपको उनके अब तक के सफर के बारे में बता रहे हैं.

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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ओली अहमद को हराया. (Photo- AFP) मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने ओली अहमद को हराया. (Photo- AFP)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 20 अगस्त 2026,
  • अपडेटेड 7:04 PM IST

बांग्लादेश में 35 साल बाद हुए राष्ट्रपति पद के चुनाव के नतीजे आ गए हैं. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति चुन लिए गए हैं. उन्होंने विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद को भारी मतों से हराकर जीत हासिल की.

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और निर्वाचन रिटर्निंग अधिकारी AMM नासिर उद्दीन ने गुरुवार को नतीजों का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि 349 रजिस्टर्ड सांसदों में से 343 ने मतदान किया, जबकि 6 सांसदों ने वोट नहीं दिया.

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बीएनपी के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को कुल 255 वोट मिले. वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी और जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11 दलीय विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को सिर्फ 88 वोट हासिल हुए.

शुक्रवार को होगा नए राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण

राष्ट्रपति चुने जाने से पहले आलमगीर प्रधानमंत्री तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार में स्थानीय सरकार, ग्रामीण विकास और सहकारिता मंत्री का पद संभाल रहे थे. नवनिर्वाचित राष्ट्रपति शुक्रवार शाम बंगभवन के दरबार हॉल में शपथ लेंगे.

बांग्लादेश के नए प्रेसिडेंट के तौर पर मिर्जा फखरुल के चुने जाने के बाद, BNP ने अपने नेता रूहुल कबीर रिजवी को पार्टी सेक्रेटरी जनरल बनाया है.

35 साल बाद हुआ चुनावी मुकाबला

बांग्लादेश में 1991 के बाद ये पहला मौका है जब राष्ट्रपति पद के लिए ऐसा प्रत्यक्ष मुकाबला हुआ है. बीते कुछ दशकों में ये पद ज्यादातर आम सहमति से बिन विरोध के भरा जाता रहा था. पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने के बाद ये पद खाली हो गया था.

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वामपंथी छात्र राजनीति से देश के राष्ट्रपति बनने तक का सफर

1960 के दशक के उत्तरार्ध में छात्र राजनीति से अपनी यात्रा शुरू करने वाले मिर्जा फखरुल का राजनीतिक सफर बेहद दिलचस्प रहा है. ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान वो ईस्ट पाकिस्तान स्टूडेंट्स यूनियन में शामिल हुए थे. 1971 के मुक्ति संग्राम के समय उन्होंने भारत में शरण ली थी और वामपंथी स्वतंत्रता सेनानियों के संगठन में अहम भूमिका निभाई थी.

राजनीति में आने से पहले वो सिविल सेवा में थे और 1972 से अर्थशास्त्र के टीचर रहे. 1986 में सरकारी नौकरी छोड़कर वो मुख्यधारा की राजनीति में उतरे. अपने गृह नगर ठाकुरगांव से निर्दलीय नगरपालिका अध्यक्ष चुने जाने के बाद वे 1990 के दशक में बीएनपी से जुड़े.

बीएनपी के सबसे लंबे समय तक महासचिव रहने का रिकॉर्ड

मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर बीएनपी में दो दशकों तक लगातार पदोन्नत होते रहे. 2011 में उन्हें पार्टी का कार्यकारी महासचिव और 2016 में पूर्ण महासचिव बनाया गया. वो बीएनपी के इतिहास में सबसे लंबे समय तक इस पद पर रहने वाले नेता बने.

अपनी विनम्र और शालीन छवि के लिए जाने जाने वाले आलमगीर 2001 में पहली बार ठाकुरगांव-1 से सांसद बने और कृषि और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री रहे. फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में वो एक बार फिर ठाकुरगांव-1 से चुने गए थे.

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मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की पत्नी राहत आरा बेगम कलकत्ता यूनिवर्सिटी की पूर्व छात्रा रही हैं. उनकी दो बेटियां हैं-एक ऑस्ट्रेलिया में पोस्टडॉक्टरल फेलो हैं और दूसरी ढाका के एक स्कूल में पढ़ाती हैं.

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