इजरायल-लेबनान में 45 दिनों के लिए बढ़ा सीजफायर, अमेरिकी मध्यस्थता में हुआ बड़ा फैसला

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की पहल पर दोनों पड़ोसी देशों ने अस्थायी शांति बनाए रखने का निर्णय लिया है. नई वार्ताओं के जरिए सीमा सुरक्षा, सैन्य गतिविधियों और क्षेत्रीय स्थिरता पर आगे बातचीत होगी.

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दक्षिणी लेबनान में इज़रायल-लेबनान सीमा के पास हुए धमाकों के बाद उठता धुआं (Photo- Reuters) दक्षिणी लेबनान में इज़रायल-लेबनान सीमा के पास हुए धमाकों के बाद उठता धुआं (Photo- Reuters)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2026,
  • अपडेटेड 4:50 AM IST

मिडिल-ईस्ट में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है. वॉशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता में दो दिनों तक चली उच्च स्तरीय बातचीत के बाद इजरायल और लेबनान अपने बीच लागू संघर्ष-विराम (सीज़फायर) को अगले 45 दिनों के लिए और बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं. रविवार को खत्म हो रही इस युद्धविराम की समय-सीमा को बढ़ाने का उद्देश्य दोनों देशों के बीच सीमा पर दोबारा भड़कने वाली हिंसा को रोकना और एक स्थायी शांति का रास्ता खोजना है.

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इस बातचीत की सबसे बड़ी बात यह रही कि लेबनान की आधिकारिक सरकार ने उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह के कड़े विरोध के बावजूद इस शांति वार्ता में हिस्सा लिया. वार्ता के दौरान दोनों पक्षों के सैन्य और सुरक्षा अधिकारी आमने-सामने बैठे, जो पिछले कई दशकों में दोनों देशों के बीच हुई सबसे उच्च स्तरीय सीधी मुलाकातों में से एक है. 

जहां लेबनान का पूरा जोर युद्ध को पूरी तरह रोकने पर था, वहीं इजरायल ने अपनी पुरानी शर्त को दोहराते हुए कहा कि किसी भी दीर्घकालिक शांति समझौते के लिए हिजबुल्लाह का पूरी तरह निशस्त्रीकरण होना अनिवार्य है.

डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर हुआ था पहला समझौता
आपको बता दें कि अमेरिका और इजरायल की ईरान के साथ शुरू हुई जंग के ठीक तीन दिन बाद, 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइलें दागी थीं. इसके जवाब में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में भीषण हवाई हमले और ज़मीनी सैन्य अभियान शुरू कर दिया था, जिसके कारण लेबनान के करीब 12 लाख लोग विस्थापित हो गए थे. 

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इस भारी तबाही के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल पर पिछले महीने पहली बार इस सीज़फायर की घोषणा की गई थी, जिसने दोनों देशों के बीच जारी खूनी संघर्ष को काफी हद तक शांत किया. हालांकि, अब भी दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा जोन में इजरायली सैनिकों और हिजबुल्लाह के बीच छिटपुट झड़पें जारी हैं.

सीज़फायर के विस्तार की घोषणा करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा, "16 अप्रैल को लागू हुआ संघर्ष-विराम अब अगले 45 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जा रहा है ताकि इस दिशा में और प्रगति की जा सके. वॉशिंगटन को उम्मीद है कि यह चर्चा दोनों देशों के बीच स्थायी शांति, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान और साझा सीमा पर वास्तविक सुरक्षा स्थापित करने में मददगार साबित होगी."

पेंटागन और स्टेट डिपार्टमेंट में होगी अगली बैठक
इस सीज़फायर को एक स्थायी समझौते में बदलने के लिए बैठकों का दौर जारी रहेगा. अमेरिकी प्रवक्ता के अनुसार, 29 मई से अमेरिकी रक्षा मंत्रालय यानी 'पेंटागन' में एक नए "सुरक्षा ट्रैक" की बातचीत शुरू होगी. इसके बाद 2 और 3 जून को अमेरिकी विदेश विभाग (State Department) एक बार फिर राजनीतिक दौर की वार्ता की मेजबानी करेगा.

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बैठक के बाद लेबनानी प्रतिनिधिमंडल ने उम्मीद जताई कि इस समय-सीमा के बढ़ने से देश के नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी और राज्य की संस्थाएं मजबूत होंगी. वहीं, अमेरिका में इजरायल के राजदूत येहिएल लीटर ने भी इस बातचीत को "स्पष्ट और सकारात्मक" बताते हुए कहा कि उतार-चढ़ाव के बावजूद इस शांति वार्ता के सफल होने की संभावनाएं बहुत ज्यादा हैं, बशर्ते इजरायली नागरिकों और सैनिकों की सुरक्षा सर्वोपरि रहे. दूसरी तरफ, ईरान ने भी साफ किया है कि लेबनान में इजरायली सैन्य अभियान का अंत होना क्षेत्रीय संघर्ष को समाप्त करने की उसकी मुख्य शर्तों में से एक है.

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