प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गुट को इजरायल की संसद, नेसेट की 120 में से महतज 53 सीटें मिली हैं. ये शुरुआती नतीजों में सामने आया है. जबकि सरकार बनाने के लिए 61 सीटें चाहिए. उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी, पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट के गुट को 48 सीटें मिली हैं.
कुल मिलाकर यह साफ़ है कि इज़रायल की जनता ने त्रिशंकु संसद चुना है.
गिनती अभी पूरी नहीं हुई है. आधिकारिक नतीजे 4 नवंबर को आएंगे. पर बड़ा सवाल नहीं बदलेगा: 61 सीटें कौन जुटा पाएगा?
क्या बदला?
नेतन्याहू की पार्टी लिकुड अभी भी सबसे बड़ी पार्टी है. उसे 27 सीटें मिली हैं. ये 2022 की 32 सीटों से पांच कम है.
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लेकिन सबसे ज्यादा फायदा अरब पार्टियों को हुआ है. जॉइंट लिस्ट को 11 और रआम को आठ सीटें मिली हैं. यानी कुल 19 सीटें. ये एक ऐतिहासिक आंकड़ा है. 2022 में इनके पास महज 10 सीटें थीं.
इस बार करीब 78 प्रतिशत मतदान हुआ. 2022 में ये करीब 71 प्रतिशत था.
इलाके के हिसाब से बंटा देश
1,224 इलाकों के नतीजों का हमारा विश्लेषण साफ बंटवारा दिखाता है.
नेतन्याहू का गुट यरुशलम जिले में 67.5 प्रतिशत वोट के साथ आगे रहा. दक्षिणी जिले में भी वो 51.2 प्रतिशत वोट के साथ आगे रहा. विपक्षी गुट तेल अवीव जिले में 56.2 प्रतिशत वोट के साथ आगे रहा. मध्य और हाइफा जिलों में भी वही आगे रहा. उत्तरी जिले में अरब पार्टियां 45.6 प्रतिशत वोट के साथ आगे रहीं.
कब्जे वाले वेस्ट बैंक की इजरायली बस्तियों में करीब पांच में से चार वोट नेतन्याहू के गुट को गए.
करीब 20 में से एक वोट उन पार्टियों को गया जो 3.25 प्रतिशत की सीमा पार नहीं कर पाईं. इनमें सबसे बड़ी, योआज हेंडेल की रिजर्विस्ट्स-इकोनॉमिक पार्टी को 2.72 प्रतिशत वोट मिले.
उन्हीं के शब्दों में
नेतन्याहू ने एक बड़े वादे पर चुनाव लड़ा. "हम अपना वादा पूरा करेंगे कि कोई फिलिस्तीनी राष्ट्र नहीं बनेगा. ये जगह हमारी है," उन्होंने कहा.
इस पर उनके प्रतिद्वंद्वी भी सहमत हैं. "दो लोगों के लिए दो राष्ट्र का सिद्धांत एक गलती है," आइजनकोट ने कहा.
गाजा पर नेतन्याहू चाहते हैं कि पहले हमास अपने सारे हथियार छोड़े. "हम असली निरस्त्रीकरण की बात कर रहे हैं, दिखावटी की नहीं," उन्होंने अगस्त में मंत्रियों से कहा.
सेना में भर्ती पर दोनों की राह अलग है. आइजनकोट ने इस वोट को दो सरकारों के बीच चुनाव बताया. "नेतन्याहू की भर्ती से बचने वाली सरकार, या मेरी अगुवाई में भर्ती वाली सरकार."
चुनाव की रात वे आश्वस्त दिखे. "लाखों इजरायली झूठ, नाकामी, बंटवारे और भड़काने की संस्कृति से तंग आ चुके हैं," उन्होंने समर्थकों से कहा.
61 सीट तक पहुंचने के तीन रास्ते
यहूदी-अरब गठबंधन. आइजनकोट का गुट और दोनों अरब पार्टियां मिलकर 67 सीटें बनाती हैं. नेतन्याहू अरब पार्टियों के साथ काम करने से इनकार कर चुके हैं. आइजनकोट ने इनकार नहीं किया है, पर उनकी पार्टी ने शर्तें रखी हैं. एक शर्त ये है कि अरब पार्टियां हमास को आतंकी संगठन कहें और उसके हथियार छीनने का समर्थन करें.
अरब सांसद उनकी सरकार को बाहर से समर्थन भी दे सकते हैं. इसके लिए कम से कम छह अरब सांसदों को सरकार के पक्ष में वोट देना होगा.
एकता सरकार. ताजा गिनती में लिकुड, यशार, टुगेदर और यिसराएल बेतेनू मिलकर 67 सीटें बनाते हैं. पर आइजनकोट ने पूरा चुनाव अभियान नेतन्याहू को हटाने पर ही चलाया.
दलबदल. नेतन्याहू को आठ और सीटें चाहिए. इजरायली सांसदों का पाला बदलना कोई अनोखी बात नहीं है.
किंगमेकर कौन होगा?
अगली चाल राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग की है. वे हर पार्टी से मिलेंगे. फिर किसी एक नेता से सरकार बनाने को कहेंगे. उस नेता को 28 दिन मिलेंगे, जो 14 दिन और बढ़ सकते हैं. हर कोशिश नाकाम हुई, तो इजरायल में फिर चुनाव होंगे.
ऐसा पहले भी हो चुका है. 2019 से 2022 के बीच इजरायल में पांच बार चुनाव हुए.
फिलहाल सबसे बड़ी पार्टी नेतन्याहू के पास है. पर आखिरी फैसला अभी उनके हाथ में नहीं है.
दीपू राय