इजरायल में चुनाव के बाद भी सरकार बनाने पर सस्पेंस बरकरार है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से पीछे है. वहीं विपक्षी गादी आइजनकोट का गुट भी बहुमत हासिल करने में नाकाम रहा है. अब सबकी नजर डबल इनवेलप वोट पर है. इन वोटों की गिनती से सीटों का गणित बदल सकता है. हालांकि, इससे सरकार किसकी बनेगी, यह अभी तय नहीं है.
दरअसल, इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है. इसमें कुल 120 सीटें हैं. सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों का समर्थन जरूरी है. आंशिक काउंटिंग में नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिलने का अनुमान है. वहीं, गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को 48 सीटें मिलती दिख रही हैं. अरब दलों को 19 सीटें मिलने का अनुमान है. विपक्षी गठबंधन और अरब दलों की सीटें जोड़ने पर आंकड़ा 67 तक पहुंचता है. लेकिन इनके बीच राजनीतिक मतभेद हैं.
नेतन्याहू ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को देश विरोधी करार दिया. वहीं आइजनकोट गुट भी अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने के पक्ष में नहीं है. नेतन्याहू और आइजनकोट ने एक दूसरे के साथ मिलकर भी सरकार बनाने की संभावना से इनकार कर दिया है. ऐसे में डबल इनवेलप वोटों की गिनती दोनों गुटों के लिए अहम मानी जा रही है.
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क्या होते हैं डबल इनवेलप वोट?
दरअसल, डबल इनवेलप वोट उन मतदाताओं के वोट होते हैं, जो अपने तय मतदान केंद्र पर जाकर वोट नहीं डाल पाते. इनमें सैनिक, जेल में बंद वोटर्स, मेडिकल स्टाफ, कुछ बीमार लोग और विदेश में तैनात इजरायली प्रतिनिधि शामिल हैं. ऐसे मतदाताओं के वोट अलग प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं.
इन वोटों को डबल इनवेलप यानी दो लिफाफों वाली प्रक्रिया से गिना जाता है. इसमें वोटर्स की पहचान और उसके वोट की जांच की जाती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि कोई व्यक्ति दो बार वोट न डाल सके. पहचान और जरूरी जांच पूरी होने के बाद ही वोट को गिनती में शामिल किया जाता है.
चुनाव आयोग के मुताबिक, करीब 6 लाख डबल इनवेलप वोटों की गिनती बाकी थी. इनकी जांच के बाद नतीजों में बदलाव हो सकता है. हालांकि, यह बदलाव कितना बड़ा होगा, इसका अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता. आम वोटों की गिनती भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई थी. कुछ मतदान केंद्रों के नतीजों की जांच जारी है. इसलिए इन वोटों को अहम माना जा रहा है. अगर कुछ दलों की सीटें बढ़ती या घटती हैं, तो सरकार बनाने की बातचीत पर असर पड़ सकता है. लेकिन सिर्फ डबल इनवेलप वोटों से ही सरकार का फैसला हो जाएगा, ऐसा कहना अभी जल्दबाजी होगी.
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नेतन्याहू के सामने क्या है चुनौती?
PM नेतन्याहू के गठबंधन को बहुमत के लिए कम से कम 8 और सीटों की जरूरत है. दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी अपने दम पर 61 सीटों तक नहीं पहुंच रहा है. ऐसे में अरब दलों का समर्थन अहम हो सकता है. लेकिन नेतन्याहू अरब दलों के सहारे सरकार बनाने के खिलाफ रहे हैं. विपक्ष में भी इन दलों को गठबंधन में शामिल करने को लेकर मतभेद हैं.
इजरायल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने सभी दलों से मिलकर सरकार बनाने की कोशिश करने की अपील की है. उन्होंने कहा है कि देश में फिर से चुनाव कराने से बचने के लिए सभी को खुले मन से बातचीत करनी चाहिए.
ऐसे में सवाल उठता है कि आगे क्या होगा?
इजरायल के चुनाव आयोग को 4 नवंबर तक अंतिम नतीजे जारी करने हैं. इसके बाद राष्ट्रपति अलग-अलग दलों के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे. फिर वह उस सांसद को सरकार बनाने का मौका देंगे, जिसके पास बहुमत जुटाने की बेहतर संभावना होगी. पहले उम्मीदवार को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं. जरूरत पड़ने पर 14 दिन की अतिरिक्त मोहलत भी दी जा सकती है. अगर वह नाकाम रहता है, तो दूसरे सांसद को मौका मिल सकता है. कोई भी बहुमत नहीं जुटा पाया, तो देश में फिर चुनाव कराने की नौबत आ सकती है.
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फिलहाल डबल इनवेलप वोटों की गिनती से तस्वीर कुछ साफ हो सकती है. लेकिन सरकार किसकी बनेगी, यह तय करने के लिए सीटों के अंतिम आंकड़े और दलों के बीच समझौते अहम होंगे.
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