नेतन्याहू की सत्ता से बेदखली या फिर? एग्जिट पोल में 'बीबी' को बहुमत नहीं, गठबंधन सरकार बनाने में भी चुनौती

इजरायल में 2024 के चुनाव के एग्जिट पोल के अनुसार, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले ब्लॉक को तीन प्रमुख मीडिया संस्थानों ने नेतन्याहू के ब्लॉक से आगे बताया है. हालांकि, किसी भी पक्ष को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है.

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इजरायल में चुनाव बाद एग्जिट पोल में नेतन्याहू को बहुमत नहीं मिला है (Photo: PTI) इजरायल में चुनाव बाद एग्जिट पोल में नेतन्याहू को बहुमत नहीं मिला है (Photo: PTI)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 28 अक्टूबर 2026,
  • अपडेटेड 3:06 AM IST

इजरायल में मतदान खत्म होने के बाद सामने आए एग्जिट पोल के आंकड़ों ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तीन बड़े इजरायली मीडिया संस्थानों के एग्जिट पोल में नेतन्याहू के मुकाबले उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आइजेनकोट के लीडरशिप वाले ब्लॉक को बढ़त मिलती दिखाई दे रही है. हालांकि, किसी भी ब्लॉक को स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में चुनाव के अंतिम नतीजों के बाद सरकार गठन को लेकर गठबंधन की लड़ाई तेज हो सकती है.

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इजरायल के चैनल 13 के मुताबिक, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले ब्लॉक को 53 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि नेतन्याहू के ब्लॉक को 50 सीटें मिल सकती हैं. वहीं, पब्लिक ब्रॉडकास्टर कान (Kan) के एग्जिट पोल में आइजेनकोट के ब्लॉक को 55 और नेतन्याहू के खेमे को 50 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया है.

चैनल 12 के एग्जिट पोल में भी आइजेनकोट का ब्लॉक आगे दिखाई दे रहा है. इसके मुताबिक, आइजेनकोट के नेतृत्व वाले गठबंधन को 52 सीटें और नेतन्याहू के ब्लॉक को 50 सीटें मिलने का अनुमान है.

1988 के बाद सबसे ज्यादा मतदान का संकेत

इजरायल में इस बार मतदान को लेकर मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है. सामने आई जानकारी के मुताबिक, 1988 के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में मतदान हुआ है. वोटिंग खत्म होने से दो घंटे पहले तक 74.3 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था. अनुमान है कि कुल मतदान 75 प्रतिशत से अधिक हो सकता है. मतदान समाप्त होने के बाद अब सभी की नजरें अंतिम चुनाव परिणामों पर टिकी हैं.

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आइजेनकोट बोले- नेतन्याहू पर जनता को भरोसा नहीं

एग्जिट पोल के आंकड़े सामने आने के बाद नेतन्याहू के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी आइजेनकोट ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजे नेतन्याहू के प्रति इजरायली जनता के पूर्ण अविश्वास को दर्शाते हैं.

आइजेनकोट ने अपने बयान में कहा कि अगर चुनाव के अंतिम परिणाम एग्जिट पोल के अनुरूप रहते हैं, तो वह नेतन्याहू की सरकार को बदलने के लिए तत्काल कदम उठाएंगे. उन्होंने सरकार का नेतृत्व करने की अपनी तैयारी भी जाहिर की है.

फिलहाल तीनों एग्जिट पोल में आइजेनकोट का ब्लॉक नेतन्याहू के खेमे से आगे दिखाई दे रहा है, लेकिन स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण होंगे. अंतिम नतीजे आने के बाद ही तय होगा कि इजरायल में अगली सरकार किसके नेतृत्व में बनेगी.

गतिरोध का नेतन्याहू को मिलेगा फायदा?

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, ऐसे बेनतीजा रहे चुनावी परिणाम के बाद देश में कई हफ्तों तक गठबंधन बनाने के लिए बातचीत चल सकती है. यहां तक कि दोबारा चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है. हालांकि, इस राजनीतिक गतिरोध का फायदा नेतन्याहू को मिल सकता है. नई सरकार के गठन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बातचीत चलने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रह सकते हैं.

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चुनाव के अंतिम नतीजे आने में कई दिन लग सकते हैं. इजरायल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं और देश की संसदीय व्यवस्था में छोटे राजनीतिक दल सरकार गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इजरायल के इतिहास में अब तक किसी एक पार्टी को संसद में पूर्ण बहुमत नहीं मिला है. ऐसे में गठबंधन बनाना वहां की राजनीति का अहम हिस्सा रहा है.

रिकॉर्ड मतदान के बीच नेतन्याहू के नेतृत्व की परीक्षा

इजरायल में इस बार रिकॉर्ड मतदान दर्ज किया गया. यह 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में हुए हमलों और उसके बाद गाजा, लेबनान तथा ईरान के साथ हुए युद्धों के बाद पहला राष्ट्रीय चुनाव था. मतदान केंद्रों के बाहर लंबी कतारें देखी गईं. मतदाताओं के सामने 7 अक्टूबर के हमलों और उसके बाद हुए संघर्षों के प्रभाव का सवाल भी था.

नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को अपनी नीतियों के कारण देश के भीतर तीखे मतभेदों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते अलगाव का सामना करना पड़ा है. हालांकि, नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार के दौरान खुद को इजरायल के विरोधियों से मुकाबला करने के लिए सबसे सक्षम नेता के रूप में पेश किया. 77 वर्षीय नेतन्याहू पिछले तीन दशकों में लगभग 19 वर्षों तक प्रधानमंत्री रहे हैं. साल 2009 के बाद उनके विरोधी उन्हें केवल एक बार सत्ता से हटा पाए थे. उस समय दो वर्षों के भीतर चार चुनाव हुए थे, जिनमें कोई निर्णायक परिणाम नहीं निकला था. हालांकि, 18 महीने बाद नेतन्याहू दोबारा सत्ता में लौट आए थे.

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7 अक्टूबर की सुरक्षा चूक भी बनी चुनावी मुद्दा

नेतन्याहू को इस चुनाव में भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों के साथ-साथ 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों से पहले खुफिया और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. नेतन्याहू भ्रष्टाचार के आरोपों से इनकार करते रहे हैं. हमास के नेतृत्व में हुए हमलों में लगभग 1,200 लोग मारे गए थे और 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था.

विपक्ष के कई दलों के लिए यह चुनाव सुरक्षा संबंधी नाकामियों की जवाबदेही तय करने का मुद्दा भी था. विपक्षी दलों ने इन घटनाओं की राष्ट्रीय जांच कराने का वादा किया है, जबकि नेतन्याहू इसका विरोध करते रहे हैं. आलोचनाओं के बावजूद नेतन्याहू का राष्ट्रवादी समर्थक आधार मजबूत बना हुआ है. दूसरी ओर, इजरायल की चुनावी व्यवस्था के कारण विभिन्न विचारधाराओं वाले विपक्षी दलों के लिए नेतन्याहू के दक्षिणपंथी, अति-दक्षिणपंथी और अति-रूढ़िवादी सहयोगियों के खिलाफ एकजुट होना चुनौतीपूर्ण है.

नेतन्याहू ने समर्थकों से की मतदान की अपील

मतदान के दौरान नेतन्याहू ने अपने समर्थकों से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की. उन्होंने चेतावनी दी कि वामपंथी और अरब इजरायली मतदाताओं की अधिक भागीदारी उनके गठबंधन के लिए चुनौती बन सकती है. नेतन्याहू ने कहा, 'आप सभी को मतदान केंद्रों पर पहुंचना चाहिए. यह निर्णायक क्षण है.'

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तेल अवीव के पास रमत गन में रहने वाली 81 वर्षीय रूथ एपस्टीन ने भी इस चुनाव को बेहद महत्वपूर्ण बताया. लंबे समय से वामपंथी दलों की समर्थक रहीं एपस्टीन ने विपक्षी डेमोक्रेट्स को वोट देने के बाद कहा, 'मुझे लगता है कि जितने भी चुनाव मैंने देखे हैं, उनमें यह सबसे महत्वपूर्ण है.'

गादी आइजनकोट बने नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी

66 वर्षीय गादी आइजनकोट इस चुनाव में नेतन्याहू के सबसे प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं. इजरायली सेना के पूर्व प्रमुख आइजनकोट को सुरक्षा मामलों में सख्त रुख रखने वाले नेता के रूप में जाना जाता है. वहीं, घरेलू मुद्दों पर उन्होंने खुद को मध्यमार्गी नेता के तौर पर पेश किया है.

गाजा युद्ध में आइजनकोट ने अपने एक बेटे और दो भतीजों को खो दिया था.

आइजनकोट ने महज चार साल पहले राजनीति में कदम रखा था. 7 अक्टूबर के हमलों के बाद वह नेतन्याहू के युद्ध मंत्रिमंडल में शामिल हुए थे. हालांकि, आठ महीने बाद उन्होंने प्रधानमंत्री के नेतृत्व की आलोचना करते हुए इस्तीफा दे दिया था.

ट्रंप के समर्थन को भी नेतन्याहू ने बनाया चुनावी मुद्दा

नेतन्याहू ने चुनाव प्रचार में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन का भी जिक्र किया. ईरान के खिलाफ युद्ध के दौरान ट्रंप नेतन्याहू के करीबी सहयोगी रहे हैं. ट्रंप ने इजरायल से 'काम पूरा करने' की अपील की थी.

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फिलहाल, एग्जिट पोल में किसी भी पक्ष को स्पष्ट संसदीय बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. ऐसे में इजरायल में अगली सरकार किसकी बनेगी, यह अंतिम चुनाव परिणामों और राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन के लिए होने वाली बातचीत पर निर्भर करेगा.

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