इजरायल ने ब्रिटेन के साथ जारी विवाद को नया मोड़ दे दिया है. इजरायल ने ऐलान किया कि वह पूर्वी येरुशलम में मौजूद ब्रिटिश वाणिज्य दूतावास को बंद कर देगा. यह कदम ब्रिटेन, फ्रांस और कनाडा की उस योजना के जवाब में उठाया गया है, जिसमें कब्जे वाले वेस्ट बैंक की यहूदी बस्तियों से आने वाले सामान के आयात पर रोक लगाने की बात कही गई है. इजरायल के विदेश मंत्री गिडियन सार ने बताया कि यह फैसला प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मिलकर लिए गए कई कदमों का हिस्सा है.
यह वाणिज्य दूतावास ब्रिटेन और फिलिस्तीनी अथॉरिटी के बीच संबंधों को संभालता था. इजरायल ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के नेतृत्व वाले गाजा समन्वय मिशन से ब्रिटेन को बाहर कर देगा और फिलिस्तीनी सुरक्षा बलों को दी जाने वाली ब्रिटिश ट्रेनिंग भी बंद कर देगा.
इसके अलावा जेरेमी कॉर्बिन सहित 12 चुने हुए ब्रिटिश अधिकारियों और कुछ अन्य नागरिकों के इजरायल में प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी. इजरायल का आरोप है कि इन लोगों की गतिविधियां यहूदी विरोधी और इज़राइल विरोधी रही हैं.
सार ने ब्रिटेन के इस कदम को गलत और किसी संप्रभु देश के मामलों में सीधा दखल बताया. उन्होंने ब्रिटेन के विदेश सचिव एड मिलिबैंड के उस आरोप को भी झूठा करार दिया, जिसमें कहा गया था कि वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों से फिलिस्तीनियों को जबरन हटाया जा रहा है.
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दूसरी ओर अमेरिका ने इन व्यापारिक पाबंदियों का विरोध किया है. विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस मुहिम में शामिल नहीं होगा और चेतावनी दी कि इससे वेस्ट बैंक में अस्थिरता बढ़ सकती है.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साझा बयान में कहा कि यह दो-राष्ट्र समाधान की रक्षा की दिशा में अहम मोड़ है. वे सितंबर में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भी यह मुद्दा उठाएंगे. डेनमार्क, नॉर्वे, पोलैंड, स्पेन और स्वीडन ने भी दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया है.
वेस्ट बैंक की बस्तियों से मुख्य रूप से खजूर, खट्टे फल, जड़ी बूटियां और वाइन जैसे कृषि उत्पाद निर्यात होते हैं, जो इजरायल के कुल निर्यात का बहुत छोटा हिस्सा हैं. इसलिए यह पाबंदी असर में सीमित है, लेकिन कूटनीतिक रूप से बड़ा संदेश देती है. इसी बीच इजरायल वेस्ट बैंक में 1,000 नए घर बनाने की योजना पर आगे बढ़ रहा है, जिसमें ई1 बस्ती प्रोजेक्ट को लेकर सबसे ज्यादा चिंता जताई जा रही है.
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